स्विस बैंक खातों में भारतीयों के रुपये सर्वाधिक!

खास बातें

  • असांजे ने काले धन के मुद्दे कहा कि स्विस बैंक संबंधी जानकारी की सूची में भारतीयों के नाम भी हैं, जिन्हें सार्वजनिक किया जाएगा।
New Delhi:

विकीलीक्स के संस्थापक जूलियन असांजे ने काले धन के मुद्दे पर नया विवाद खड़ा कर सकने वाली टिप्पणी करते हुए मंगलवार को कहा कि स्विस बैंक संबंधी जानकारी की सूची में भारतीयों के नाम भी हैं जिन्हें सार्वजनिक किया जाएगा। असांजे ने एक टीवी चैनल को बताया, हां, जानकारी में भारतीयों के नाम भी हैं जिनका हम पहले ही प्रकाशन कर चुके हैं या करने वाले हैं। मुझे किसी विशिष्ट भारतीय का नाम याद नहीं है जो हमारे आगामी प्रकाशन में होगा। लेकिन मैंने भारतीय नाम पढ़े हैं। स्विस बैंकों में खाता रखने वाले भारतीयों में कुछ बड़े नाम होने के संकेत देते हुए उन्होंने कहा कि इन निजी स्विस बैंकिंग संस्थानों में आपको खाता खोलने के लिए कम से कम 10 लाख डॉलर की जरूरत होती है, जो काफी ज्यादा राशि है और यह किसी आम भारतीय के पास नहीं होती। इस सवाल पर कि क्या नामों का कभी भी खुलासा हो जाएगा, उन्होंने कहा, आपको उम्मीद बिल्कुल नहीं छोड़नी चाहिए। बहरहाल, असांजे ने इस मुद्दे पर अधिक खुलासा करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें स्विस बैंकों में दूसरे देशों के नागरिकों के बजाय भारतीयों की अधिक मात्रा में राशि जमा होने की बात एक खबर के जरिए पता लगी।असांजे ने कहा कि इस बारे में भारत के अधिक आक्रामक नहीं होने का कोई कारण नहीं है। दूसरे देशों में जमा काले धन का पता लगाने के जर्मन सरकार के आक्रामक तरीके की तारीफ करते हुए विकीलीक्स के संस्थापक ने कहा कि भारत को अधिक आक्रामक होना चाहिए क्योंकि ऐसा प्रतीत होता है कि भारत को प्रति व्यक्ति प्राप्त होने वाले कर के मामले में जर्मनी के मुकाबले अधिक नुकसान हो रहा है। असांजे ने आरोप लगाया कि विकीलीक्स के केबलों पर भारत सरकार की प्रतिक्रिया विश्व में बदतर रही और केबलों में क्या है, इस बारे में देश को गुमराह करने की साफ तौर पर कोशिश हुई। उन्होंने भारत सरकार के इन दावों को भी खारिज कर दिया कि कालेधन का पता लगाने के तरीके में दोहरा कराधान रोकने संबंधी संधियां अवरोध पैदा कर रही हैं। असांजे ने कहा, दोहरे कराधान का छिपाकर रखी गई दौलत से कोई लेना-देना नहीं है। इससे छिपा कर रखी गई संपत्ति पर पर्दा नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि विदेशी बैंकों में कालाधन छिपाकर रखने का मुद्दा स्थानीय स्तर पर होने वाले भ्रष्टाचार से भी बदतर है क्योंकि इसमें धन को देश से बाहर भेज दिया जाता है। असांजे ने कहा कि हर बार वे रुपये को बेचते हैं, जिसके नतीजतन देश की मुद्रा का मूल्य कम होता है। ..इस हस्तांतरण के चलते सभी भारतीयों के लिए सब कुछ महंगा हो जाता है। उन्होंने पूर्व में दावा किया था कि उन्हें पूर्व बैंकर रूडॉल्फ एल्मर से बैंक खातों संबंधी दस्तावेज मिले थे। झंडाबरदार वेबसाइट चलाने वाले असांजे ने यह भी दावा किया था कि दस्तावेजों में मौजूद नाम अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, ऑस्ट्रिया और एशिया ..सभी क्षेत्रों के हैं तथा इनमें कारोबारी, नेता, कला क्षेत्र के लोग और बहुराष्ट्रीय कंपनियां चलाने वाले लोग शामिल हैं।


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