खास बातें
- वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने रुपये की गिरती हालत और शेयर बाजार की अस्थिर स्थिति पर पहली बार बयान देते हुए कहा कि सभी उभरती अर्थव्यवस्थाएं मुद्राओं के उतार-चढ़ाव से प्रभावित हैं।
नई दिल्ली: रुपये की विनिमय दर में तेज गिरावट के बीच वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने गुरुवार को कहा कि भारतीय मुद्रा को बाजार में कम आंका जा रहा है और यह अपने उचित स्तर से इस समय ज्यादा ही नीचे चली गई है। उन्होंने निवेशकों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि मौजूदा हालात से ‘ज्यादा निराश होने की जरूरत नहीं है’ और रुपया अपना स्तर पुन: हासिल कर लेगा।
रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पांच दिन में 5.5 प्रतिशत टूट चुका है। पूरे सप्ताह रुपये में लगातार गिरावट पर चुप्पी साधे रहने के बाद चिदंबरम ने आज ऐसे समय एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया जबकि रुपये की विनिमय दर प्रति डॉलर 65 से भी नीचे चली गई थी।
उन्होंने कहा कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है। मुद्रा बाजार में जल्द ही स्थिरता आएगी क्योंकि सरकार निवेश को प्रोत्साहित करने और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा ‘‘हमारा मानना है कि रुपये का मूल्य कम आंका जा रहा है और इसमें गिरावट तार्किक रूप से उचित माने जाने वाले इसके स्तर से ज्यादा हो गई है।’’
चिदंबरम ने आज दिन में रिजर्व बैंक गवर्नर डी सुब्बाराव और रिजर्व बैंक गवर्नर मनोनीत रघुराम राजन के साथ यहां तीन घंटे लंबी बैठक की। उन्होंने संवाददाताओं से कहा ‘‘घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है, लगता है विदेशी विनिमय बाजार घबराहट में है और इसका असर दूसरे बाजारों पर भी पड़ रहा है।’’
वित्तमंत्री ने कहा ‘‘हमें पूरा भरोसा है कि इन बाजारों में स्थिरता जल्द लौटेगी और हम निवेश तथा आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के काम को आगे बढ़ा सकेंगे।’’ चिदंबरम ने कहा कि बाजार में अत्यधिक निराशा का कोई कारण नहीं है।
उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव को कम करने तथा सट्टेबाजी को दबाने के लिए हाल में जो कदम उठाए हैं, स्थिति शांत हो जाने के बाद उनकी समीक्षा की जाएगी।
रिजर्व बैंक के गवर्नर सुब्बाराव ने एक अलग मीडिया ब्रीफिंग में कहा मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है और आरबीआई रुपये की घटबढ़ थामने के लिए उचित उपाय करेगा।
वित्तमंत्री ने यह भी कहा कि चालू खाते के घाटे (कैड) को काबू में रखने के लिए सरकार का पूंजी नियंत्रण की दिशा में बढ़ने के लिए कोई इरादा नहीं है।
उन्होंने कहा ‘‘(विदेशी निवेशकों पर) पूंजी को स्वदेश भेजने सहित पूंजी की आवाजाही पर किसी भी तरह का अंकुश लगाने की न तो कोई मंशा थी और न है। सरकार अथवा रिजर्व बैंक की पूंजी नियंत्रण उपाय शुरू करने की कोई नीति नहीं है। पूंजी खाते को उदार बनाने की दिशा में उठाए गए कदमों को भी वापस लेने की कोई मंशा नहीं है। पिछले सप्ताह जो उपाय किए गए स्थिरता लौटने पर उनकी समीक्षा की जाएगी।’’