नई दिल्ली: अमेजॉन और टाटा के प्रतिनिधियों सहित ऑनलाइन खुदरा विक्रेताओं ने ई-कॉमर्स के लिए सख्त नए नियमों को लेकर चिंता जताई है. उन्होंने सरकारी अधिकारियों से मुलाकात की. नए नियम उनके व्यापार मॉडल के लिए एक बड़ा झटका माने जा रहे हैं. सूत्रों ने शनिवार को एनडीटीवी को यह जानकारी दी. सूत्रों ने कहा कि शनिवार को एक बैठक कंपनियों के प्रतिनिधियों ने उपभोक्ता मामलों के विभाग को बताया कि वे प्रस्तावित नियमों से चिंतित हैं. उन्होंने कहा कि उनके कमेंट जमा करने की 6 जुलाई तक की समय सीमा बढ़ा दी जाए.
उन्होंने कहा कि प्रमुख मुद्दों में फ्लैश बिक्री पर प्रतिबंध, संबंधित पार्टियों की परिभाषा और ई-कॉमर्स की बड़ी कंपनियों के लिए मानदंडों का अनुपालन शामिल है. उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारियों ने नियमों पर लिखित प्रतिक्रिया मांगी है.
उपभोक्ताओं और छोटे खुदरा विक्रेताओं की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से 21 जून को सरकार ने सख्त नए ई-कॉमर्स नियम घोषित किए. इससे देश के ऑनलाइन विक्रेताओं, विशेष रूप से इस बाजार के लीडर अमेज़ॉन और फ्लिपकार्ट में चिंता देखी जा रही है.
फ्लैश बिक्री को सीमित करने वाले नए नियम, भ्रामक विज्ञापनों पर रोक और शिकायत प्रणाली को अनिवार्य करने सहित अन्य प्रस्तावों के चलते अमेजॉन और फ्लिपकार्ट को अपने व्यावसायिक ढांचे की समीक्षा करनी पड़ सकती है और रिलायंस इंडस्ट्रीज के JioMart, BigBasket और Snapdeal सहित घरेलू प्रतिद्वंद्वियों के लिए लागत बढ़ सकती है.
अमेज़ॉन ने तर्क दिया है कि COVID-19 ने पहले से ही छोटे व्यवसायों को प्रभावित किया है, प्रस्तावित नियमों का विक्रेताओं पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ेगा. प्रस्तावित नीति में कहा गया है कि ई-कॉमर्स फर्मों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका कोई भी संबंधित उद्यम उनकी वेबसाइटों पर विक्रेता के रूप में सूचीबद्ध नहीं है. यह विशेष रूप से अमेज़ॉन को प्रभावित कर सकता है क्योंकि इसकी कम से कम दो विक्रेताओं, क्लाउडटेल और अप्पारियो में अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी है.