यह ख़बर 14 अगस्त, 2011 को प्रकाशित हुई थी

एआई को बिना रुकावट ईंधन आपूर्ति चाहता है मंत्रालय

खास बातें

  • नागरिक उड्डयन मंत्रालय चाहता है कि नकदी संकट से जूझ रही एयर इंडिया को जेट फ्यूल की आपूर्ति में किसी तरह की रुकावट न आने पाए।
नई दिल्ली:

नागरिक उड्डयन मंत्रालय चाहता है कि नकदी संकट से जूझ रही राष्ट्रीय एयरलाइन कंपनी एयर इंडिया को जेट फ्यूल (एटीएफ) की आपूर्ति में किसी तरह की रुकावट न आने पाए। साथ ही मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि सभी पेट्रोलियम कंपनियों को भुगतान सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। इस बारे में कुछ दिन पहले नागरिक उड्डयन मंत्री व्यालार रवि की पेट्रोलियम मंत्री एस जयपाल रेड्डी से मुलाकात हुई थी। आधिकारिक सूत्रांे ने बताया कि इस बैठक के बाद गत शुक्रवार को नागरिक उड्डयन सचिव नसीम जैदी ने पेट्रोलियम मंत्रालय को पत्र लिखकर एयर इंडिया को बाधारहित ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा है। मंत्रालय ने कहा है कि एयर इंडिया द्वारा एटीएफ के लिए किए जाने वाले दैनिक भुगतान में एक या दो दिन की देरी होने पर ईंधन की आपूर्ति नहीं रोकी जानी चाहिए। जैदी ने कहा कि नकदी संकट की वजह से एयरलाइन को दैनिक आधार पर धन की व्यवस्था करने में दिक्कत हो सकती है। पत्र में कहा गया है कि ईंधन की आपूर्ति में किसी तरह की बाधा से उड़ानों में अड़चन आ सकती है, जिससे यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि एयरलाइन सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों को पहले से इस बात की सूचना देगी कि निकट भविष्य में उसके समक्ष कोई परेशानी तो नहीं आने वाली है। ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 30 जून तक एयर इंडिया पर इंडियन आयल कारपोरेशन का 1,558.18 करोड़ रुपये का बकाया था। इसी तरह उसे हिंदुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन के 342.27 करोड़ रुपये तथा भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन के 432.65 करोड़ रुपये चुकाने थे। इस तरह विमानन कंपनी पर पेट्रोलियम कंपनियों का कुल बकाया 2,333 करोड़ रुपये का था। एटीएफ के दामों में बढ़ोतरी की वजह से एयर इंडिया का ईंधन पर दैनिक खर्च 12-13 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 15 से 16 करोड़ रुपये हो गया है। एयर इंडिया के अधिकारियों का कहना है कि एयरलाइन की दैनिक आमदनी 22 करोड़ रुपये की है। पेट्रोलियम कंपनियों को रोजाना 16.7 करोड़ रुपये का भुगतान करने के बाद कंपनी के पास कर्ज, कार्यशील पूंजी पर ब्याज के भुगतान के लिए सिर्फ 5.3 करोड़ रुपये बचते हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा संकटग्रस्त एयरलाइन को ईंधन की आपूर्ति रोकने की वजह से 27 मई से 2 जून के बीच एयर इंडिया का परिचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ था। उस समय वह अपनी 320 दैनिक उड़ानों से मात्र 147 का ही परिचालन कर पाई थी। चार दिन पहले भी पेट्रोलियम कंपनियों ने एयर इंडिया को एटीएफ की आपूर्ति रोक दी थी, पर सरकार के निर्देश के बाद एक घंटे के भीतर की आपूर्ति फिर बहाल कर दी गई। एयरलाइन को अपनी दैनिक जरूरत के लिए प्रतिदिन 225 किलोलीटर एटीएफ की खरीदना पड़ता है। एयरलाइन कंपनियों को ईंधन बिल के भुगतान के लिए 90 दिन का समय मिलता है। पर एयरइंडिया द्वारा कई बार समय पर ईंधन का भुगतान नहीं करने की वजह से पेट्रोलियम कंपनियां एयर इंडिया के साथ इस नियम का पालन नहीं करती हैं। एयर इंडिया चाहती है कि निजी क्षेत्र की कंपनियों की तरह उसे भी ईंधन पर रियायत दी जाए। पेट्रोलियम कंपनियां निजी एयरलाइंस को निश्चित समय पर भुगतान के आश्वासन पर 1,600 से 1,800 रुपये प्रति किलोलीटर की रियायत देती हैं। 90 दिन के रिण के समय के फाइनेंस शुल्क को जोड़ने के बाद यह रियायत 3,600 रुपये प्रति किलोलीटर बैठती है।


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