खास बातें
- भारतीय अर्थव्यवस्था के अगले कुछ वर्षों तक आठ प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ने के साथ ही कॉफी उद्योग के पास घरेलू बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के पर्याप्त मौके हैं।
नई दिल्ली: भारतीय अर्थव्यवस्था के अगले कुछ वर्षों तक आठ प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ने के साथ ही कॉफी उद्योग के पास घरेलू बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के पर्याप्त मौके हैं। यह बात योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कही।
इंडिया इंटरनेशनल कॉफी समारोह को संबोधित करते हुए अहलूवालिया ने कहा कि भारतीय लोगों की आय में बढ़ोतरी से अगले 20 साल में 50 करोड़ भारतीय कॉफी जैसे उत्पाद पर खर्च करने की स्थिति में होंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘अगले कुछ साल तक भारतीय अर्थव्यवस्था के सात से नौ प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है। हमारा लक्ष्य प्रत्येक नौ साल में प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करने का है। इसके फलस्वरूप 20 साल से भी कम अवधि में इसमें चार गुने की बढ़ोतरी होगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ इसका मतलब है कि 50 करोड़ लोग रोजमर्रा के सामानों पर खर्च करने के साथ-साथ दूसरी वस्तुओं पर भी खर्च करने की स्थिति में होंगे। इसलिए कॉफी उद्योग के पास पर्याप्त अवसर मौजूद है।’’ उन्होंने कॉफी उद्योग से परंपरागत दक्षिण भारतीय बाजार से बाहर की ओर रुख करने की अपील की। इसके अलावा उन्होंने कॉफी विनिर्माताओं से स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर स्वाद और सुगंध वाली कॉफी के विकास का आग्रह किया।
अहलूवालिया ने कहा कि देश की विशाल जनसंख्या को देखते हुए ब्रांड पहचान और इसकी क्षेत्रीय किस्मों के विकास जैसी पर्याप्त संभावनाएं हैं। तीव्र आर्थिक वृद्धि से आशा है कि कॉफी उद्योग के पास पर्याप्त अवसर होगा। उन्होंने भारतीय कॉफी बाजार में उद्यमिता को बढ़ावा देने की भी अपील की। उन्होंने कहा, ‘‘ यहां उद्यमिता को बढ़ावा देने के पर्याप्त मौके हैं। खुदरा स्तर पर कार्यरत कॉफी आउटलेट एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा क्यों नहीं करते हैं।’’ अहलूवालिया ने इस क्षेत्र के विकास के लिए कॉफी उद्यमियों से 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-2017) के लिए सुझाव भी मांगे। अंतरराष्ट्रीय कॉफी संगठन (आईसीओ) के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2011-12 के दौरान देश में 54 लाख बैग (करीब 3,24,00 टन) कॉफी का उत्पादन होने की संभावना है।