खास बातें
- जोशी ने तर्क दिया है कि जेल में बंद होने के कारण उन्हें तलब किए जाने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।
New Delhi: टूजी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला भले ही तिहाड जेल में बंद ए राजा के इर्द-गिर्द घूम रहा हो लेकिन लोक लेखा समिति के कुछ सदस्यों की मांग के बावजूद इसके अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने पूर्व दूरसंचार मंत्री को पीएसी के समक्ष तलब किए जाने से इनकार कर दिया है। जोशी ने तर्क दिया है कि जेल में बंद होने के कारण उन्हें तलब किए जाने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इसके अलावा राजा का बयान नहीं लिए जाने के बावजूद समिति के पास अन्य गवाहों के इतने बयान और अन्य साक्ष्य मौजूद हैं कि उनके ही आधार पर पीएसी किसी नतीजे पर पंहुच सकती है। राजा सहित अन्य गवाहों को पीएसी के समक्ष बुलाए जाने की इसके कुछ कांग्रेस और द्रमुक सदस्यों की मांग पर जोशी ने समिति के अपने सहयोगियों को लिखे पत्र में कहा है कि पूर्व दूरसंचार मंत्री को तलब करने की बात समिति का कार्यकाल समाप्त होने के अंतिम दिनों में उठाई गई है और अब यह संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर ही समिति किसी नतीजे तक पंहुचने में सक्षम है। जोशी ने अपने पत्र में कहा, चूंकि राजा न्यायिक हिरासत में हैं, इसलिए उन्हें समिति के समक्ष बुलाने में समय लगेगा। वर्तमान पीएसी का कार्यकाल 30 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। पीएसी की 21 अप्रैल को हुई आंतरिक बैठक में कुछ सदस्यों ने इस मांग पर ज़ोर दिया कि पूरे ड्रामा के मुख्य हीरो राजा को भी समिति के समक्ष बुलाया जाना चाहिए। इस सवाल पर कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन की जांच के लिए जेपीसी का गठन हो जाने के बाद क्या पीएसी को इस मामले की जांच जारी रखनी चाहिए, जोशी ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार पहले ही व्यवस्था दे चुकी हैं कि जेपीसी के गठन के बाद भी पीएसी की भूमिका को कमतर नहीं किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान पीएसी का कार्यकाल बढ़ाए जाने की नियम अनुमति नहीं देते। सूत्रों ने बताया कि 2जी स्पैक्ट्रम रिपोर्ट को अपनाने के संबंध में चर्चा के लिए 28 अप्रैल को 22 सदस्यीय पीएसी की बैठक बुलाई गई है। सूत्रों के अनुसार जोशी रिपोर्ट अपनाने पर जोर दे रहे हैं। अगर सर्वसम्मति या बहुमत के फैसले से भी रिपोर्ट अपना ली जाती है तो अध्यक्ष के तौर पर जोशी को संसद का सत्र नहीं चलने की स्थिति में भी इसे लोकसभा अध्यक्ष को सौंपने का अधिकार होगा। ऐसा समिति का कार्यकाल समाप्त होने से पहले 30 अप्रैल तक किया जा सकता है। पिछली दो बैठकों में पीएसी इस मुद्दे पर बंटी नजर आई कि क्या जेपीसी के गठन के बाद इसे 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच करनी चाहिए। इसके अलावा उनका तर्क यह भी है कि उच्चतम न्यायालय की देख रेख में सीबीआई भी इसकी जांच कर रही है।