खास बातें
- राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए आने वाले दिनों में उसका क्या रुख रहेगा, उसका खाका पेश किया।
नई दिल्ली: राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए आने वाले दिनों में उसका क्या रुख रहेगा, उसका खाका पेश किया। साथ ही उन्होंने विश्वास जताया कि शीघ्र ही आर्थिक विकास को पुन: आठ से नौ फीसदी की उच्च दर पर वापस लाने में सरकार सफल होगी।
बजट सत्र के पहले दिन संसद के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को सम्बोधित करते हुए पाटील ने सोमवार को कहा कि यह वर्ष विश्व अर्थव्यवस्था के लिए मुश्किलों भरा रहा है और आर्थिक अनिश्चितताओं का पूरे विश्व पर प्रतिकूल प्रभाव रहा है। उन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय जगत में राजनीतिक अनिश्चितताएं एवं अशांति बढ़ गई है। पिछले एक वर्ष के दौरान हमारे सामने चुनौतियां बढ़ गई हैं। हमारी अर्थव्यवस्था 2010-11 के दौरान 8.4 फीसदी की दर से बढ़ी थी लेकिन इस वर्ष धीमी होकर यह सात फीसदी के करीब हो गई है।" उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है।
राष्ट्रपति ने कहा, "हमारी सरकार इस विषय में आश्वस्त है कि देश जल्द ही वापस आठ से नौ फीसदी की विकास दर पर अग्रसर होगा।" उन्होंने कहा कि ईमानदार एवं कुशल प्रशासन देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।
राष्ट्रपति ने कहा, "मुझे इस बात की खुशी है कि देश में 2010-11 में खाद्यान्न का रिकार्ड 24.15 करोड़ टन उत्पादन हुआ।" उन्होंने कहा कि गत शीतकालीन सत्र में लोकसभा में खाद्य सुरक्षा विधेयक पेश करने के अलावा सरकार जनवितरण प्रणाली के पूर्ण कम्प्यूटरीकरण के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रही है। उन्होंने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन और राष्ट्रीय बागवानी मिशन जैसी सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि किसानों के अनुकूल समर्थन मूल्य की नीति पिछले सात सालों से जारी है।
राष्ट्रपति ने कहा, "2011-12 में कुछ कृषि उपज के न्यूनतम समर्थन मूल्य में पिछले साल के मुकाबले 10 से 40 फीसदी वृद्धि की गई है।" उन्होंने कहा कि 2010-11 में कृषि क्षेत्र में 4,60,000 करोड़ ऋण दिया गया, जो लक्ष्य से 22 फीसदी अधिक है। उन्होंने आशा जताई कि 2011-12 में 4,75,000 करोड़ रुपये ऋण जारी करने का लक्ष्य हासिल हो जाएगा।
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार की मुख्य चिंता देश की बहुसंख्यक आबादी को आजीविका एवं स्वास्थ्य सुरक्षा मुहैया कराना है। देश से गरीबी, भूख तथा अशिक्षा समाप्त करने के लिए सरकार लगातार काम करती रहेगी।
पाटील ने कहा कि लोगों में शिक्षा तथा कौशल विकास के आधार पर तेज व व्यापक विकास के जरिये ही आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
राष्ट्रपति ने कहा, "मेरी सरकार वर्ष 2012-13 के दौरान 12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत 85 लाख लोगों को कौशल प्रशिक्षण देगी। सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत सरकार देश में 1,500 नए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान और 5,000 कौशल विकास केंद्र खोलेगी, जिन पर 13,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी।"
शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों के महत्व पर जोर देते हुए पाटील ने कहा, "मेरी सरकार शिक्षकों के लिए नेशनल मिशन शुरू करना चाहती है, ताकि उन्हें बेहतर प्रशिक्षण दिया जा सके।" उन्होंने कहा कि सरकार 'हायर एजुकेशन क्रेडिट गारंटी ऑथोरिटी' की स्थापना भी करना चाहती है, ताकि शिक्षा ऋण पर सीमित क्रेडिट गारंटी प्रदान की जा सके।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में कम खर्च पर चिंता जताते हुए पाटील ने कहा, "स्वास्थ्य क्षेत्र में अधिक निवेश के बावजूद पिछले सात वर्षों से इस मद में सार्वजनिक खर्च कम बना हुआ है।" उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में वैश्विक उद्देश्य को हासिल करने के लिए सरकार वर्ष 2017 तक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 2.5 प्रतिशत खर्च करेगी।
पाटील ने यह भी कहा कि सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में मानव संसाधन की कमी की पूर्ति के लिए भी काम कर रही है।
पाटील ने कहा, "नेशनल इंटेलीजेंस ग्रिड तथा एनसीटीसी का उद्देश्य आंतरिक सुरक्षा के खतरों से निपटने की क्षमता में सुधार करना है।"
आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर पाटील ने कहा कि हिंसा से सख्ती से निपटने की जरूरत है, लेकिन इस क्रम में मानवीय दृष्टिकोण को नहीं भूलना चाहिए।
जम्मू एवं कश्मीर में हिंसा में आई कमी पर खुशी जताते हुए उन्होंने कहा कि सरकार उन सभी संगठनों से बातचीत करने के पक्ष में है, जो हिंसा का रास्ता छोड़ने के लिए तैयार हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि देश में परमाणु बिजली का उत्पादन 2017 तक दोगुना हो जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार सुरक्षा से सम्बंधित पहलुओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि देश में कुल 4,780 मेगावाट परमाणु बिजली उत्पादन की क्षमता स्थापित कर ली गई है, जिसे 12वीं योजना अवधि (2012-17) में बढ़ाकर 10,080 मेगावाट किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मार्च 2011 में फुकुशिमा परमाणु संयंत्र दुर्घटना के बाद सरकार ने देश में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की सुरक्षा प्रणालियों की प्रौद्योगिकी जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट को सार्वजनिक किया गया है और उसकी सिफारिशों पर अमल किया गया है। संसद में परमाणु सुरक्षा नियामक प्राधिकरण विधेयक पेश किया गया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार ने काले धन के विषय में विदेशों से सूचनाएं एकत्र करने के लिए कदम उठाए हैं। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के साथ स्वचालित ढंग से सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध कराने से भ्रष्टाचार कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि आधार संख्या योजना से सामाजिक क्षेत्र के कार्यक्रमों में पारदर्शिता आने के साथ जवाबदेही एवं गुणवत्ता में सुधार होगा।
राष्ट्रपति के अभिभाषण के समय संक्षिप्त समय के लिए थोड़ा व्यवधान भी हुआ। उन्होंने काले धन से निपटने के लिए उठाए जा रहे उपायों के विषय में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम को लागू करने के लिए कार्रवाई शुरू करने के अलावा देश-विदेश में जमा काले धन की जानकारी के लिए भी उपाय किए हैं।
राष्ट्रपति ने कहा, "हमने काले धन की उत्पत्ति एवं देश से इसके बाहर जाने को रोकने और काले धन के विषय में दूसरे देशों से जानकारी हासिल करने के लिए कई कदम उठाए हैं।" उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ई-गवर्नेस कार्यक्रम के तहत 97,000 से अधिक नागरिक सेवा केंद्र खोले गए हैं ताकि आम लोगों को सार्वजनिक सेवाएं आराम से मिल सकें।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की चर्चा करते हुए पाटील ने कहा कि लोकपाल एवं लोकायुक्त विधेयक, भ्रष्टाचार का खुलासा करने वाले को संरक्षण विधेयक सहित कई विधेयक संसद में पेश किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा, "मैं आशा व्यक्त करती हूं कि सत्र उपयोगी एवं फलदायक होगा।"