Stock Market Crash: आज यानी सोमवार, 11 मई को भारतीय शेयर बाजार खुलते ही धाराशायी हो गया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के शांति प्रस्ताव को ठुकराए जाने के बाद ग्लोबल मार्केट में हड़कंप मच गया है. इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर दिख रहा है.कच्चे तेल की कीमतों में आए उबाल और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने बाजार का सेंटिमेंट पूरी तरह बिगाड़ दिया है.
आज सुबह जैसे ही मार्केट खुला सेंसेक्स करीब 0.89% या 830.25 अंक टूटकर 76,638.09 के स्तर पर आ गया. NIFTY 50 में भी 1.02% या 245.50 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह 23,930.65 के स्तर पर फिसल गया. बाजार में चारों तरफ बिकवाली नजर आ रहा है. शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों करीब 1 फीसदी तक टूट गए. सुबह के कारोबार में सेंसेक्स 943 अंक यानी 1.22% टूटकर 76,384 के इंट्राडे लो तक पहुंच गया. वहीं निफ्टी 280 अंक यानी 1.15% गिरकर 23,897 पर आ गया.
कौन-कौन से सेक्टर सबसे ज्यादा टूटे?
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो सभी इंडेक्स लाल निशान में कारोबार कर रहे थे. निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी ऑटो, निफ्टी PSU बैंक, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी केमिकल्स इंडेक्स में करीब 3% तक की गिरावट दर्ज की गई. तेल की कीमतों में तेजी और बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव का असर सबसे ज्यादा ऑटो और ऑयल से जुड़े शेयरों पर दिखाई दिया.
इन बड़े शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट
निफ्टी के टॉप लूजर्स में टाइटन, इंडिगो, महिंद्रा एंड महिंद्रा, श्रीराम फाइनेंस, इटरनल, मारुति सुजुकी, बजाज ऑटो, बजाज फिनसर्व, भारती एयरटेल, HDFC लाइफ, आयशर मोटर्स और डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज शामिल रहे.
मार्केट वोलैटिलिटी इंडेक्स यानी India VIX करीब 2% बढ़कर 10.7 पर पहुंच गया. यह संकेत देता है कि निवेशकों के बीच बाजार को लेकर डर और अनिश्चितता बढ़ रही है.
एक्सपर्ट ने बताई गिरावट की बड़ी वजह
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक सोमवार को बाजार पर दो बड़े दबाव रहे. पहला, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की उम्मीद टूट गई. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के जवाब को टोटली अनएक्सेप्टेबल” बताया, जिससे वेस्ट एशिया संकट और गहरा गया.
दूसरा, ब्रेंट क्रूड की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जिससे भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट पर दबाव बढ़ सकता है. भारत दुनिया का बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए तेल महंगा होना अर्थव्यवस्था के लिए चिंता की बात माना जाता है.
एक्सपर्ट्स के मुताबिक पेट्रोलियम, फर्टिलाइजर, गोल्ड, एविएशन और होटल सेक्टर पर सेंटीमेंट आधारित दबाव बना रह सकता है. हालांकि फार्मा सेक्टर को डिफेंसिव माना जा रहा है और इसमें मजबूती देखने को मिल सकती है.
US-Iran बातचीत फेल, ट्रंप के बयान ने बिगाड़ा खेल
ऑयल मार्केट और ग्लोबल इकोनॉमी में मची इस हलचल की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का टूटना है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की तरफ से भेजे गए शांति प्रस्ताव (Peace Proposal) को Totally Unacceptable यानी पूरी तरह से अस्वीकार्य करार दिया. ट्रंप के इस कड़े रुख के बाद निवेशकों की उम्मीदें टूट गईं और बाजार में यह डर बैठ गया कि अब युद्ध जैसी स्थिति और गहरी हो सकती है. सप्लाई चेन रुकने की चिंता में निवेशकों ने धड़ाधड़ बिकवाली शुरू कर दी.
कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग,$105 के करीब पहुंचा कच्चा तेल
इस तनाव बढ़ने का सबसे बड़ा असर तेल की कीमतों (Oil Prices) पर पड़ा है. सोमवार को बाजार खुलते ही कमोडिटी मार्केट में ब्रेंट क्रूड 4.41% बढ़कर 105.76 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया. वहीं US WTI क्रूड भी 5.12% उछलकर 100.31 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज के जरिए तेल सप्लाई दोबारा शुरू होने की उम्मीदें फिलहाल कमजोर पड़ गई हैं..भारत जैसे देश के लिए कच्चा तेल महंगा होना महंगाई की घंटी है, क्योंकि हम अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट से कोई सकारात्मक खबर नहीं आती, तब तक भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बना रह सकता है.
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