चांदी पर सरकार का बड़ा एक्शन, आयात पर बढ़ाई सख्ती, नियम में बड़ा बदलाव

सरकार ने केवल सिल्वर बार्स ही नहीं, बल्कि बिना ढली हुई चांदी (कच्ची सिल्वर), अर्ध-निर्मित चांदी (सेमी-मैन्युफैक्चर्ड सिल्वर) और चांदी के पाउडर जैसे उत्पादों के आयात पर भी सख्ती बढ़ाई है. अब इन श्रेणियों में आयात करने के लिए संबंधित सरकारी अनुमति जरूरी होगी.

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  • सरकार ने चांदी की इंपोर्ट पॉलिसी में बदलाव करते हुए सिल्वर बार्स को रिस्ट्रिक्टेड कैटेगरी में रखा है.
  • अब चांदी के बार्स, कच्ची चांदी, अर्ध-निर्मित चांदी और चांदी के पाउडर आयात के लिए विशेष अनुमति अनिवार्य होगी.
  • सरकार ने सोना और चांदी के आयात पर शुल्क बढ़ाकर पंद्रह प्रतिशत कर दिया है और लाइसेंसिंग नियम कड़े किए हैं.
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नई दिल्ली:

केंद्र सरकार ने चांदी की इंपोर्ट पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत डीजीएफटी की नई अधिसूचना के अनुसार, सिल्वर बार्स सहित चांदी की कई प्रमुख श्रेणियों को ‘फ्री' श्रेणी से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड' कैटेगरी में डाल दिया गया है. इस बदलाव के बाद अब व्यापारियों को इन उत्पादों के आयात के लिए सीधे आयात करने की अनुमति नहीं होगी, बल्कि पहले सरकार से विशेष अनुमति या लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा.

डीजीएफटी की अधिसूचना संख्या 17/2026-27 के अनुसार आईटीसी (एचएस) कोड 71069221 और 71069229 के तहत आने वाली सिल्वर बार्स पर नई शर्तें लागू की गई हैं. पहले इनका आयात रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के नियमों के अधीन 'फ्री' कैटेगरी में किया जा सकता था, लेकिन अब इन्हें 'रिस्ट्रिक्टेड' श्रेणी में रखा गया है.

सरकार ने केवल सिल्वर बार्स ही नहीं, बल्कि बिना ढली हुई चांदी (कच्ची सिल्वर), अर्ध-निर्मित चांदी (सेमी-मैन्युफैक्चर्ड सिल्वर) और चांदी के पाउडर जैसे उत्पादों के आयात पर भी सख्ती बढ़ाई है. अब इन श्रेणियों में आयात करने के लिए संबंधित सरकारी अनुमति जरूरी होगी.

कुछ मामलों में आयात को आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अधीन भी रखा गया है. यह बदलाव आईटीसी (एचएस) वर्गीकरण के तहत आयात नीति अनुसूची में संशोधन करके किया गया है. सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश का कीमती धातुओं का आयात बिल लगातार बढ़ रहा है. केंद्र सरकार सोना और चांदी के आयात पर निगरानी बढ़ाकर विदेशी मुद्रा पर पड़ने वाले दबाव को कम करना चाहती है.

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इससे पहले सरकार ने सोना और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था. साथ ही, रत्न एवं आभूषण निर्यातकों के लिए एडवांस ऑथराइजेशन (एए) योजना के तहत ड्यूटी-फ्री गोल्ड इंपोर्ट के नियम भी सख्त किए गए थे. सरकार ने नए नियमों के तहत एडवांस ऑथराइजेशन योजना में प्रति लाइसेंस अधिकतम 100 किलोग्राम सोने के आयात की सीमा तय कर दी है. पहली बार आवेदन करने वाली कंपनियों के लिए निर्माण इकाइयों का फिजिकल निरीक्षण भी अनिवार्य किया गया है.

इसके अलावा, पुराने लाइसेंस के तहत कम से कम 50 प्रतिशत निर्यात दायित्व पूरा करने के बाद ही नई अनुमति दी जाएगी. ड्यूटी-फ्री गोल्ड आयात करने वाले निर्यातकों को अब हर 15 दिन में चार्टर्ड अकाउंटेंट से प्रमाणित आयात-निर्यात रिपोर्ट भी जमा करनी होगी. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सोने का आयात 24 प्रतिशत से अधिक बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया. हालांकि आयात की मात्रा कम रही, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी के कारण कुल आयात बिल बढ़ गया.

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भारत में सबसे अधिक सोना स्विट्जरलैंड से आयात किया गया, जबकि यूएई और दक्षिण अफ्रीका दूसरे और तीसरे बड़े स्रोत रहे.
 ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (जीजेसी) सहित कई उद्योग संगठनों ने सरकार के इस कदम पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि ज्यादा आयात शुल्क और कड़े प्रतिबंधों से ग्रे मार्केट गतिविधियां और तस्करी बढ़ सकती है. हालांकि, सरकार का मानना है कि इन कदमों से कीमती धातुओं के आयात पर बेहतर नियंत्रण होगा और देश के बढ़ते आयात बिल को संतुलित करने में मदद मिलेगी.

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