नेटफ्लिक्स से लेकर मेटा तक...सभी को मानना होगा भारत का कानून, अश्विनी वैष्णव की टेक कंपनियों को दो टूक

Social Media Regulations: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि नेटफ्लिक्स, मेटा, यूट्यूब और एक्स जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स को भारत के संविधान के दायरे में रहकर ही काम करना होगा.

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Social Media Regulations: भारत की डिजिटल दुनिया में अब मनमानी नहीं चलने वाली. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने टेक दिग्गजों में शामिल नेटफ्लिक्स, यूट्यूब, मेटा और एक्स को साफ और बड़ा संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि भारत में कारोबार करने वाले किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म को देश के संविधान और कानून का पालन करना ही होगा.

संविधान सबसे ऊपर

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि चाहे वह कंटेंट स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म (OTT) हों या सोशल मीडिया, उनके काम करने के तरीके भारत के संवैधानिक ढांचे के अंदर होनी चाहिए. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रेस की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी जरूरी है, लेकिन यह अधिकार बिना किसी जिम्मेदारी के नहीं आते.

सोशल मीडिया और ओटीटी पर कड़ा रुख

पिछले कुछ समय से ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर दिखाए जा रहे कंटेंट और सोशल मीडिया पर फैल रही फेक न्यूज को लेकर अश्विनी वैष्णव ने कहा कि फ्रीडम ऑफ स्पीच का मतलब यह कतई नहीं है कि आप फेक न्यूज फैलाएं या ऐसी कंटेंट दें जो भारतीय संस्कृति और सेफ्टी के खिलाफ हो. प्लेटफॉर्म्स को एल्गोरिदम की आड़ में अपनी जिम्मेदारियों से नहीं बचना चाहिए.

जवाबदेही तय करना क्यों जरूरी?

आज के समय में डीपफेक, ऑनलाइन फ्रॉड ने देश के सामने नई चुनौतियां पेश की हैं. वैष्णव के इस बयान से पता चल रहा है कि सरकार डिजिटल इंडिया एक्ट पर तेजी से काम कर रही है. यह कानून पुराने पड़ चुके आईटी एक्ट 2000 की जगह लेगा.

क्या है डिजिटल इंडिया एक्ट में नए कानून

  • प्लेटफॉर्म्स को आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के लिए तुरंत कार्रवाई करनी होगी.
  • सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को संवैधानिक बातों का ध्यान रखना होगा.
  • महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सेफ्टी सरकार की लिस्ट में सबसे ऊपर है.

क्या होगा टेक कंपनियों पर असर?

भारत दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल बाजारों में से एक है. मेटा, गूगल और नेटफ्लिक्स जैसी कंपनियों के लिए भारत एक बड़ा यूजर बेस है. ऐसे में अश्विनी वैष्णव का यह बयान यह साफ करता है कि भारत अब केवल एक बाजार नहीं रहेगा, बल्कि अपने नागरिकों की सेफ्टी के लिए भी सबसे आगे खड़ा रहेगा. टेक कंपनियों को अब अपनी ग्लोबल पॉलिसीज को भारतीय कानून के अनुरूप बनाना होगा.

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