इस साल होली 4 मार्च को देशभर में धूम-धाम से मनाई जाएगी. इस साल रंगों का त्यौहार भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा धमाका लेकर आ रही है. इसको लेकर बाजारों में रौनक दिखने लगी है. व्यापारियों की देश में सबसे बड़ी संस्था कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) का अनुमान है कि इस बार होली पर 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्ड व्यापार होगा.
बाजारों में अभी से ही ग्राहकों की भारी भीड़ जुटने लगी है और व्यापारियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है.
'वोकल फॉर लोकल' का जादू: चीनी प्रोडक्ट्स को लगा बड़ा झटका
देश के कई शहरों के बड़े बाजारों से इकठा किये गए आंकड़ों और जानकारी के आधार पर CAIT ने कहा है कि होली से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “वोकल फॉर लोकल” मिशन का असर बाजारों में साफ दिखने लगा है.एक समय था जब 2021 से पहले बाजारों में चीनी पिचकारियों और रंगों का कब्जा हुआ करता था, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है.
व्यापारियों का कहना है कि लोग अब केमिकल वाले रंगों से दूरी बना रहे हैं और क्वालिटी वाले देसी प्रोडक्ट्स पर भरोसा जता रहे हैं.
मिठाई, कपड़े और गिफ्ट आइटम्स की भारी डिमांड
सिर्फ रंग और गुलाल ही नहीं, बल्कि होली पर मिठाइयों, ड्राई फ्रूट्स,गिफ्ट आइटम,फूल-फल कपड़े और फर्निशिंग फैब्रिक, किराना,एफएमसीजी प्रोडक्ट्स भी बाजारों में भारी मांग देखी जा रही है. खास तौर पर सफेद टी-शर्ट, कुर्ता-पायजामा, सलवार-सूट और "हैप्पी होली" लिखी टी-शर्ट की मांग बहुत बढ़ गई है. दिल्ली के सदर बाजार से लेकर चांदनी चौक तक, थोक और खुदरा बाजार रंग-बिरंगे पैकेटों और गुजिया की मालाओं से सजे हुए हैं. मिठाई की दुकानों पर भी पारंपरिक गुजिया की बुकिंग अभी से ही जोरों पर है.
दिल्ली में होलिका दहन 3 मार्च को होगा और रंगों की होली 4 मार्च को खेली जाएगी.
दिल्ली में ₹15,000 करोड़ की कमाई का अनुमान
अकेले दिल्ली की बात करें, तो CAIT द्वारा जारी की गयी जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में इस बार लगभग 15 हजार करोड़ रुपये का व्यापार होने की संभावना है. शहर के थोक और खुदरा बाजार रंग-बिरंगे गुलाल, आकर्षक पिचकारियों, गुजिया की मालाओं और ड्राई फ्रूट पैकों से सजे हैं और दुकानों पर ग्राहकों की भारी दिखनी शुरू हो गयी है. मिठाई की दुकानों पर भी विशेष रूप से होली की पारंपरिक मिठाई गुजिया की बिक्री में बढ़ोतरी देखी जा रही है.
जाहिर है, होली के अवसर पर इस बार रिकॉर्ड व्यापार से आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है. ये देशभर के व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं, छोटे व्यापारियों, कुटीर उद्योगों और एमएसएमई क्षेत्र के लिए फायदेमंद साबित होगा और इससे स्वदेशी व्यापार भी मजबूत होगा.














