भारत सरकार ने सफाई अभियान के जरिए एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. पुराने कागजों और बेकार पड़े सामान यानी कबाड़ को बेचकर सरकार ने करोड़ों की कमाई की है. यह खबर दिलचस्प है क्योंकि यह दिखाती है कि कैसे साफ-सफाई से भी खजाना भरा जा सकता है.
सफाई अभियान से सरकारी खजाने में आए करोड़ों रुपये
केंद्र सरकार ने साल 2021 से लेकर जनवरी 2026 तक स्वच्छता अभियान के तहत कबाड़ बेचकर कुल 4,405.28 करोड़ रुपये की कमाई की है. सिर्फ दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के दो महीनों में ही सरकार ने कबाड़ हटाकर 200.21 करोड़ रुपये जुटाए हैं. इस अभियान का मकसद ऑफिस को साफ सुथरा बनाना और बेकार पड़ी चीजों से पैसा कमाना है.
लाखों पुरानी फाइलें हटाई गईं और जगह हुई खाली
सराकीर रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी के महीने में देशभर के 5,188 सरकारी दफ्तरों में सफाई अभियान चलाया गया. इस दौरान करीब 81 हजार से ज्यादा पुरानी फाइलों को हटा दिया गया जिससे दफ्तरों में काफी जगह बन गई. आंकड़ों के अनुसार लगभग 4.34 लाख वर्ग फुट जगह अब खाली हो चुकी है जिसका इस्तेमाल दूसरे जरूरी कामों के लिए किया जा सकता है.
कोयला और रेलवे मंत्रालय ने कबाड़ से की सबसे ज्यादा कमाई
जनवरी के महीने में कबाड़ बेचने से कुल 115.85 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिला है. इसमें सबसे ज्यादा योगदान कोयला मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और रेलवे मंत्रालय का रहा है. कोयला मंत्रालय ने अकेले ही करीब 1.88 लाख वर्ग फुट जगह खाली करवाई है. इन मंत्रालयों ने अपनी पुरानी मशीनों और लोहे के कबाड़ को बेचकर सरकार की कमाई में बड़ा हिस्सा जोड़ा है.
ऑफिस में फाइलों के क्लियर होने की रफ्तार तेज
अब सरकारी काम कागजों के बजाय कंप्यूटर पर ज्यादा हो रहा है. जनवरी 2026 में बनी कुल फाइलों में से लगभग 94 प्रतिशत फाइलें ई-फाइल यानी डिजिटल रूप में थीं. करीब 65 सरकारी विभाग ऐसे हैं जिन्होंने 90 प्रतिशत से ज्यादा काम डिजिटल तरीके से करना शुरू कर दिया है. इससे न सिर्फ फाइलों का अंबार कम हुआ है बल्कि काम में तेजी और पारदर्शिता भी आई है.
आम जनता की शिकायतों का हुआ तेजी से निपटारा
सफाई के साथ-साथ सरकार ने लोगों की समस्याओं को सुलझाने पर भी ध्यान दिया है. रिपोर्ट बताती है कि जनवरी में जनता की शिकायतों में से 90 प्रतिशत से ज्यादा का निपटारा कर दिया गया. कुल 5.57 लाख से ज्यादा शिकायतों को हल किया गया है. इसके अलावा सांसदों और राज्य सरकारों की ओर से भेजे गए जरूरी पत्रों पर भी समय रहते कार्रवाई की गई है.
सरकारी फाइलें अब नहीं अटकेंगी
पहले एक फाइल को एक मेज से दूसरी डेस्क तक जाने में बहुत समय लगता था लेकिन अब सरकार ने इस प्रक्रिया को छोटा कर दिया है. साल 2021 में जहां एक फाइल को कई लेवल से गुजरना पड़ता था वहीं अब यह लेवल घटकर बहुत कम हो गया है. इससे फाइलों के मूवमेंट में आसानी हुई है और सरकारी काम अब पहले के मुकाबले ज्यादा जल्दी पूरे हो रहे हैं.














