- तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और तीसरी पार्टी की सरकार बनाई है
- मुख्यमंत्री विजय ने बताया कि राज्य पर दस लाख करोड़ रुपये से अधिक कर्ज है और खजाना पूरी तरह खाली है
- पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु का कर्ज सीमा के भीतर है और फंड की कमी का दावा गलत है
तमिलनाडु में 'विजय राज' शुरू हो गया है. अभिनेता से नेता बने विजय ने रविवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. तमिलनाडु के इतिहास में 60 साल में यह पहली बार है जब राज्य में AIADMK और DMK के अलावा किसी तीसरी पार्टी की सरकार बनी है. लेकिन नई सरकार के बनते ही 'खाली खजाने' को लेकर भी बहस छिड़ गई है. मुख्यमंत्री विजय और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बीच यह बहस हुई.
शपथ के बाद अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए विजय ने कहा कि 'मुझे आपको तमिलनाडु सरकर की मौजूदा स्थिति के बारे में बताना है. राज्य पर 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज है और खजाना पूरी तरह खाली हो चुका है.'
इस पर एमके स्टालिन ने जवाब दिया. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार का कर्ज सीमा के भीतर है और अभी से फंड की कमी का रोना न रोएं.
स्टालिन ने कहा कि 'तमिलनाडु का कर्ज का स्तर सीमा के भीतर है. अभी से यह कहना शुरू न करें कि सरकार के पास पैसे नहीं हैं.'
उन्होंने कहा, 'हमने फरवरी के बजट में ही तमिलनाडु सरकार की वित्तीय स्थिति के बारे में साफ-साफ बता दिया था. क्या आपको यह जानकारी नहीं थी? इसके बाद ही आपने जनता से इतने सारे वादे किए. जिन लोगों ने आपको वोट दिया है, उन्हें धोखा न दें और मुद्दे को भटकाने की कोशिश न करें.'
क्या वाकई इतने कर्ज में है तमिलनाडु?
जीडीपी के लिहाज से तमिलनाडु दूसरा बड़ा राज्य है. पहले नंबर पर महाराष्ट्र है. सबसे ज्यादा कर्ज के मामले में भी तमिलनाडु दूसरे नंबर पर है.
फरवरी में जब तमिलनाडु सरकार का अंतरिम बजट आया था, तब उसमें बताया गया था कि मार्च 2027 तक कर्ज बढ़कर 10.71 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा. 2025-26 तक तमिलनाडु पर 9.52 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था.
हालांकि, कर्ज की तुलना हमेशा राज्य की GSDP के हिसाब से की जाती है. फिस्कल रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट रिव्यू कमेटी (FRBM) का सुझाव है कि राज्यों की GSDP से 20% से ज्यादा कर्ज नहीं होना चाहिए. लेकिन 2026-27 तक तमिलनाडु पर उसकी GSDP का 26.12% कर्ज होने का अनुमान है. हालांकि, GSDP का 30% तक कर्ज सीमा के भीतर माना जाता है.
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इतना कर्ज कैसे हो गया?
अंतरिम बजट में सरकार ने दावा किया था कि 9वें वित्त आयोग ने केंद्र सरकार के टैक्स रेवेन्यू में तमिलनाडु का शेयर 7.93% रखा था. लेकिन बाद के आयोगों ने इसे घटाकर 4.07% कर दिया. इससे सरकार को 3.17 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जो कुल कर्ज का 33% है.
इसके अलावा, इसकी एक वजह खर्च भी है. तमिलनाडु सरकार का 80 फीसदी से ज्यादा खर्च ऐसी जगह होता है, जहां से भविष्य में कोई कमाई की उम्मीद नहीं है. 2026-27 में तमिलनाडु के बजट का लगभग 27% तो सैलरी, पेंशन और रिटायरमेंट बेनेफिट्स पर खर्च होगा. 10% कर्ज चुकाने और 15.1% ब्याज चुकाने में चला जाएगा. 30.1% सब्सिडी पर खर्च होगा.
तमिलनाडु सरकार का सब्सिडी पर खर्च लगातार बढ़ रहा है. अंतरिम बजट में अनुमान लगाया गया था कि 2026-27 में तमिलनाडु सरकार का 1.56 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च सब्सिडी पर होगा. 2027-28 में यह बढ़कर 1.64 लाख करोड़ और 2028-29 में 1.72 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाएगा. यह दिखाता है कि सब्सिडी पर होने वाला खर्च हर साल 5 फीसदी की दर से बढ़ेगा.
ब्याज चुकाने में ही रोज खर्च होंगे 215 करोड़!
सब्सिडी, सैलरी और पेंशन पर खर्च के अलावा कर्ज और उस पर लगने वाला ब्याज तमिलनाडु का बजट खत्म कर देता है.
तमिलनाडु पर कर्ज इतना है कि उसका सिर्फ ब्याज चुकाने में ही हर दिन करोड़ों रुपये खर्च होते हैं. अंतरिम बजट की मानें तो 2026-27 में ही तमिलनाडु सरकार 78,677 करोड़ रुपये से ज्यादा का सिर्फ ब्याज चुकाएगी. अगर इसका औसत निकाला जाए तो हर दिन 215 करोड़ रुपये से ज्यादा सिर्फ सूद भरने में जाएगा.
हैरानी वाली बात यह है कि लगातार बढ़ रहा है. 2027-28 में कर्ज पर लगने वाला ब्याज बढ़कर 89,692 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. जबकि, 2028-29 में यह 1.02 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो जाएगा.
तमिलनाडु सरकार ने अंतरिम बजट में बताया था कि 2026-27 में वह 1.79 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज लेगी. इस साल 60,413 करोड़ रुपये का कर्ज भी चुका देगी.
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