अप्रैल महीने से कई जरूरी चीजें महंगी हो सकती हैं. इस लिस्ट में आपके रोजमर्रा के आइटम शामिल हैं जैसे कार, टू व्हीलर, टीवी, फ्रिज और एयर कंडीशनर आदि. ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि इन सामानों को बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. इसके साथ ही ट्रांसपोर्ट और शिपिंग की लागत भी बढ़ गई है. खबरों के मुताबिक इन चीज़ों की कीमतों में लगभग 5 से 6 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है. यानी अप्रैल महीने से अब आपको ये सामान खरीदने के लिए पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं.
कच्चे माल की बढ़ती कीमत
रिपोर्ट के अनुसार कई कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे माल जैसे प्लास्टिक, रेजिन और पॉलिमर की कीमतों में अचानक आई तेजी है. इन कच्चे माल का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक सामान और ऑटोमोबाइल बनाने में काफी ज्यादा होता है. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माल ढुलाई यानी फ्रेट रेट भी बढ़ गए हैं. पिछले कुछ समय में माल ढुलाई की दरों में लगभग 7 से 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है.
जब कंपनियों को सामान बनाने और उसे बाजार तक पहुंचाने में ज्यादा खर्च करना पड़ता है, तो वे उस लागत को प्रोडक्ट की कीमत में जोड़ देती हैं. इसी कारण ग्राहकों को महंगे दाम चुकाने पड़ सकते हैं.
कार होंगी महंगी
रिपोर्ट के मुताबिक कई कार निर्माता कंपनियां लगभग 2 से 3 प्रतिशत तक कीमत बढ़ाने पर विचार कर रही हैं. कुछ लग्जरी कार कंपनियां पहले ही इसकी घोषणा कर चुकी हैं जैसे कि Mercedes-Benz और Audi ने बताया है कि वे 1 अप्रैल से अपनी कारों की कीमतों में लगभग 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी करेंगी. वहीं, आम बाजार की कार बनाने वाली कंपनियां भी अपने नए दाम तय करने की प्रक्रिया में हैं.
टीवी, फ्रिज भी महंगे
सिर्फ कार ही नहीं बल्कि टीवी, फ्रिज, एयर कंडीशनर जैसे अन्य घरेलू इलेक्ट्रॉनिक सामान भी महंगे हो सकते हैं. क्योंकि इन प्रोडक्ट्स में प्लास्टिक आधारित पार्ट्स का काफी इस्तेमाल होता है. कंपनियां इनकी कीमतों में लगभग 5 से 6 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर सकती हैं.
और क्या होगा महंगा?
इसके अलावा जूते, सिंथेटिक फाइबर से बने कपड़े और घर में इस्तेमाल होने वाले डेकोरेटिव पेंट भी 9 से 10 प्रतिशत तक महंगे हो सकते हैं.
इसके अलावा भारतीय रुपये की कीमत भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 2 प्रतिशत कमजोर हुई है. जब रुपये की कीमत गिरती है तो विदेश से आयात होने वाले सामान महंगे हो जाते हैं. इसका सीधा असर कंपनियों की लागत पर पड़ता है.














