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पति के इंतजार में गाया जाता था ये लोकगीत, शमशाद बेगम की आवाज ने घर-घर पहुंचाया, 15 साल पहले रणबीर कपूर ने बनाया कल्ट

रणबीर कपूर ने जिस गाने को कल्ट बना दिया, वह असल में सदियों पुराना पंजाबी लोकगीत है, जिसे कभी पति के इंतजार में महिलाएं गाती थीं और शमशाद बेगम की आवाज ने घर-घर पहुंचा दिया था.

पति के इंतजार में गाया जाता था ये लोकगीत, शमशाद बेगम की आवाज ने घर-घर पहुंचाया, 15 साल पहले रणबीर कपूर ने बनाया कल्ट
पति के इंतजार में महिलाएं गाती थीं ये लोकगीत

‘रॉकस्टार' का ‘कतिया करूं' सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि एक एहसास है. इम्तियाज अली की फिल्मों की सबसे बड़ी पहचान उनकी कहानियों के साथ-साथ उनके गीत भी रहे हैं, जो दर्शकों के दिलों में लंबे समय तक बस जाते हैं. हाल ही में उनकी नई फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा' के गाने और कहानी की खूब चर्चा हो रही है, लेकिन जब भी इम्तियाज अली के यादगार संगीत की बात होती है तो ‘रॉकस्टार' का नाम सबसे पहले आता है. ए. आर. रहमान के संगीत और इरशाद कामिल के शब्दों से सजा ‘कतिया करूं' आज भी लोगों की प्लेलिस्ट का हिस्सा है. यह गाना सुनते तो लगभग सभी हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि ‘कतिया करूं' का असली मतलब क्या है और इसके पीछे सदियों पुरानी एक लोक परंपरा छिपी हुई है.

लोकगीत ‘कतिया करूं' का मतलब क्या है?

ए. आर. रहमान के संगीत और हर्षदीप कौर की आवाज में सजा ‘कतिया करूं' रणबीर कपूर और नरगिस फाखरी पर फिल्माया गया था. दरअसल, यह एक पारंपरिक पंजाबी लोकगीत है. ग्रामीण इलाकों में महिलाएं चरखे पर सूत कातते समय और अपने पति के घर लौटने का इंतजार करते हुए इसे गाया करती थीं. फिल्म के लिए गीतकार इरशाद कामिल ने इस लोकगीत को नए अंदाज में लिखा और इसमें सूफी भाव जोड़ दिए. उनके मुताबिक, ‘सारी रातें कतिया करूं' का अर्थ पूरी रात अपने प्रेमी की इबादत करना है. वहीं चरखा सांसों का प्रतीक माना गया है, जो जीवन के अंत तक चलता रहता है. रुई कातना यहां प्रेमी के नाम का लगातार जप करने का रूपक बन जाता है.

‘रॉकस्टार' ने बनाया गाने को नई पहचान

2011 में रिलीज हुई ‘रॉकस्टार' इम्तियाज अली की सबसे चर्चित फिल्मों में गिनी जाती है. फिल्म में रणबीर कपूर ने जनार्दन जाखड़ उर्फ जॉर्डन का किरदार निभाया, जो बड़ा रॉकस्टार बनने का सपना देखता है. नरगिस फाखरी, अदिति राव हैदरी, पीयूष मिश्रा, कुमुद मिश्रा और शेरनाज पटेल भी अहम भूमिकाओं में नजर आए. फिल्म की कहानी, ए. आर. रहमान का संगीत और इरशाद कामिल के गीत दर्शकों के दिलों में उतर गए. लगभग 60 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने भारत में 83.71 करोड़ और दुनियाभर में 108.71 करोड़ रुपये का कारोबार किया था.

शमशाद बेगम ने सबसे पहले गाया था यह गीत

बहुत कम लोग जानते हैं कि ‘कतिया करूं' की लोकप्रियता सिर्फ ‘रॉकस्टार' से शुरू नहीं हुई थी. इस लोकधुन का इस्तेमाल सबसे पहले 1963 की फिल्म ‘पिंड दी कुड़ी' में किया गया था. उस समय इसे ‘कते करूं तेरी रूं' नाम से पेश किया गया था और महान गायिका शमशाद बेगम ने अपनी आवाज दी थी. फिल्म में यह गीत अभिनेत्री निशी पर फिल्माया गया था और उस दौर में भी इसे खूब पसंद किया गया. इम्तियाज अली और इरशाद कामिल ने इसी पारंपरिक लोकगीत को नए अर्थ, नई संवेदना और आधुनिक संगीत के साथ पेश किया, जिसकी वजह से ‘कतिया करूं' आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे खूबसूरत और भावनात्मक गीतों में गिना जाता है.

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