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18 साल तक अलमारी में बंद रही थी इस गाने की धुन, धर्मेंद्र-शर्मिला टैगोर पर गया फिल्माया, बना किशोर-लता का सबसे हिट गीत

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे गीत हैं जिनकी सफलता के पीछे एक लंबा संघर्ष छिपा है. कुछ धुनें पहली ही फिल्म में जगह बना लेती हैं, जबकि कुछ सालों तक अपने सही मुकाम का इंतजार करती रहती हैं. मशहूर संगीतकार रवि शंकर शर्मा उर्फ रवि के साथ भी ऐसा ही हुआ.

18 साल तक अलमारी में बंद रही थी इस गाने की धुन, धर्मेंद्र-शर्मिला टैगोर पर गया फिल्माया, बना किशोर-लता का सबसे हिट गीत
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हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे गीत हैं जिनकी सफलता के पीछे एक लंबा संघर्ष छिपा है. कुछ धुनें पहली ही फिल्म में जगह बना लेती हैं, जबकि कुछ सालों तक अपने सही मुकाम का इंतजार करती रहती हैं. मशहूर संगीतकार रवि शंकर शर्मा उर्फ रवि के साथ भी ऐसा ही हुआ. उन्होंने एक ऐसी धुन तैयार की थी, जिसे वे बेहद खास मानते थे, लेकिन वह किसी फिल्म में इस्तेमाल नहीं हो सकी. करीब 18 साल तक यह धुन उनके पास सुरक्षित रही. आखिरकार जब इसे सही कहानी, सही कलाकार और बेहतरीन बोल मिले, तो वही गीत हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार रोमांटिक गानों में शामिल हो गया.

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बिना संगीत की पढ़ाई बने दिग्गज संगीतकार

रवि शंकर शर्मा ने कभी संगीत की औपचारिक शिक्षा नहीं ली थी, लेकिन संगीत के प्रति उनका जुनून उन्हें मुंबई तक ले आया. शुरुआत में उनकी इच्छा पार्श्व गायक बनने की थी, मगर किस्मत ने उन्हें संगीत निर्देशन की राह पर आगे बढ़ाया. उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर संगीतकार हेमंत कुमार ने उन्हें अपना सहायक बनाया. इसी दौरान रवि ने संगीत की बारीकियां सीखीं और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बना ली. आगे चलकर उन्होंने ‘चौदहवीं का चांद', ‘छू लेने दो नाज़ुक होठों को' और ‘सावन का महीना पवन करे शोर' जैसे कई कालजयी गीतों को संगीत देकर अपनी छाप छोड़ी.

‘नागिन' की बीन से लेकर 18 साल बाद मिली सफलता तक

साल 1954 में रिलीज हुई फिल्म नागिन की मशहूर बीन की धुन तैयार करने का श्रेय भी रवि को दिया जाता है. हालांकि इस धुन को क्लावियोलिन पर कल्याणजी वीरजी शाह ने बजाया था, लेकिन इसकी मूल रचना रवि ने ही की थी. उनकी इसी काबिलियत से प्रभावित होकर हेमंत कुमार ने उन्हें स्वतंत्र संगीतकार बनने के लिए प्रेरित किया. इसके बाद 1957 में फिल्म एक साल के लिए रवि ने एक बेहद खूबसूरत धुन तैयार की, लेकिन फिल्म की रचनात्मक जरूरतों के कारण उसका इस्तेमाल नहीं हो पाया. रवि को इस धुन पर पूरा भरोसा था, इसलिए उन्होंने उसे संभालकर रखा और सही मौके का इंतजार करते रहे.

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करीब 18 साल बाद साल 1975 में फिल्म एक महल हो सपनों का के लिए वह अवसर आया. गीतकार साहिर लुधियानवी ने इस धुन पर खूबसूरत बोल लिखे और रवि ने उसे अंतिम रूप दिया. इस तरह जन्म हुआ सदाबहार गीत ‘दिल में किसी के प्यार का जलता हुआ दिया' का. इस गाने के दो संस्करण रिकॉर्ड किए गए, जिनमें एक किशोर कुमार और दूसरा लता मंगेशकर की आवाज में था. धर्मेंद्र और शर्मीला टैगोर पर फिल्माया गया यह रोमांटिक गीत रिलीज होते ही दर्शकों के दिलों में बस गया. दोनों सितारों की शानदार केमिस्ट्री और रवि के मधुर संगीत ने इस गीत को हमेशा के लिए अमर बना दिया.

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