बॉलीवुड में कई फिल्में हिट होती हैं, कई फ्लॉप भी हो जाती हैं. लेकिन बहुत कम फिल्में ऐसी होती हैं जो अपने ही प्रोड्यूसर्स और हीरो की जिंदगी उलट-पुलट कर दें. एक ऐसी ही फिल्म ने सुनील दत्त की जिंदगी में ऐसा तूफान ला दिया कि देखते ही देखते शोहरत के साथ-साथ उनकी दौलत भी फिसलने लगी. सिर्फ दो महीने की देरी ने पूरा हिसाब बिगाड़ दिया. बढ़ते खर्च ने उन्हें कर्ज में डुबो दिया, कार बेचनी पड़ी, बंगला गिरवी रखना पड़ा और एक दौर ऐसा भी आया जब करोड़ों दिलों के चहेते स्टार को बस से सफर करना पड़ा. आखिर एक फिल्म ने सुनील दत्त को इस हाल तक कैसे पहुंचा दिया, इसकी कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है.
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एक फिल्म ने बदल दी पूरी कहानी
सुनील दत्त सिर्फ शानदार एक्टर ही नहीं थे, बल्कि फिल्में बनाने का भी बड़ा सपना रखते थे. इसी सपने के साथ उन्होंने अमिताभ बच्चन, वहीदा रहमान, विनोद खन्ना, राखी और कई बड़े सितारों को लेकर 'रेशमा और शेरा' बनाई. उन्हें भरोसा था कि ये फिल्म उनके करियर की सबसे बड़ी कामयाबी बनेगी. लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था.
15 दिन का काम पहुंच गया 2 महीने तक
फिल्म की शूटिंग लगभग पूरी हो चुकी थी और सिर्फ 15 दिन का काम बचा था. तभी सुनील दत्त को लगा कि फिल्म उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं बन रही. उन्होंने बड़ा फैसला लिया और कई हिस्सों की दोबारा शूटिंग शुरू करवा दी. यही फैसला सबसे भारी पड़ गया. 15 दिन में खत्म होने वाला काम करीब 2 महीने तक खिंच गया. शूटिंग बढ़ी तो खर्च भी तेजी से बढ़ता गया और देखते ही देखते सुनील दत्त करीब 60 लाख रुपये के कर्ज में डूब गए.
बिक गई कार, गिरवी रखना पड़ा बंगला
कर्ज इतना बढ़ गया कि सुनील दत्त को सबसे पहले अपनी कार बेचनी पड़ी. इसके बाद भी नुकसान पूरा नहीं हुआ तो अपना बंगला गिरवी रखना पड़ा. आर्थिक तंगी का आलम ये था कि वो अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए बस से सफर करते थे. कई प्रोड्यूसर्स ने भी उन पर पैसा लगाने से दूरी बना ली. एक वक्त ऐसा भी आया जब उन्हें बी-ग्रेड फिल्मों में काम करना पड़ा, ताकि आर्थिक हालत संभल सके.
फिर नहीं मानी हार
मुश्किलों का ये दौर लंबा जरूर था, लेकिन सुनील दत्त ने हार नहीं मानी. उन्होंने लगातार मेहनत की, धीरे-धीरे कर्ज से बाहर निकले और फिर अच्छे प्रोजेक्ट्स के साथ अपनी मजबूत पहचान वापस बनाई. उनकी ये कहानी बताती है कि कभी-कभी एक फैसला इंसान को जमीन पर ला सकता है, लेकिन हौसला हो तो वहीं से नई शुरुआत भी की जा सकती है.
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