दशहरे के पावन अवसर पर जब भी रावण दहन और बुराई पर अच्छाई की जीत की बात होती है, तो रामायण से जुड़े कई वाक्ये याद आते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि आज से 109 साल पहले भी हिंदी सिनेमा में भगवान राम और हनुमान की कहानी दिखाई गई थी? ये उस दौर की बात है जब फिल्मों में न तो कलाकरों को आवाज सुनाई देती थी और न ही किसी तरह के डायलॉग होते थे. इसके बावजूद 1917 में आई एक फिल्म ने दर्शकों के बीच ऐसी लोकप्रियता हासिल की कि, फिल्म जब सिनेमाघरों में लगी तो इसे देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी. इस फिल्म का नाम था 'लंका दहन', जिसे भारतीय सिनेमा के जनक दादासाहेब फाल्के ने बनाया था.
1917 में रिलीज हुई थी 'लंका दहन'
बात करें हिंदी सिनेमा के शुरुआती दौर की तो इस समय फिल्में साइलेंट हुआ करती थीं. इनमें कलाकारों के डायलॉग सुनाई नहीं देते थे और कहानी को उनकी एक्टिंग, एक्सप्रेशन पर पर्दे पर सीन्स के जरिए समझाया जाता था. इसी दौर में दादासाहेब फाल्के ने फिल्म 'लंका दहन' बनाई थी. ये फिल्म साल 1917 में रिलीज हुई और रामायण पर बनी थी, जिसमें रावण माता सीता का हरण कर के उन्हें लंका ले आता है और भगवान राम उन्हें वापस लाने के लिए युद्ध करते हैं. फिल्म में हनुमान के लंका पहुंचने, सीता से मिलने और रावण की लंका को जलाना दिखाया गया था. हिंदी सिनेमा के इतिहास में इसे शुरुआती पौराणिक फिल्मों में गिना जाता है. इसकी कहानी और जिस तरह से पर्दे पर दिखाया गया, उसे दर्शकों ने काफी प्रभावित किया था.
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एक ही कलाकार ने निभाए थे राम और सीता के किरदार
फिल्म 'लंका दहन' से जुड़ा एक दिलचस्प काफी मशहूर है, वो है इसकी कास्टिंग. फिल्म में अन्ना सालुंके ने भगवान राम और माता सीता, दोनों का ही रोल प्ले किया था. उस समय का महिलाओं को एक्टिंग करना अच्छा नहीं माना जाता था. ऐसे में मेल एक्टर ही दोनों का रोल प्ले करते थे. सालुंके का दोनों रोल प्ले किए थे, जिसे उस समय भारतीय सिनेमा के शुरुआती दौर की एक खास उपलब्धि माना जाता है. इसके साथ ही फिल्म में गणपत जी शिंदे ने हनुमान और डी. डी. दाबके ने रावण का रोल प्ले किया था. दादासाहेब फाल्के ने सिर्फ फिल्म का डायरेक्शन नहीं किया था बल्कि इसको लिखा और बनाने की जिम्मेदारी भी उन्होंने संभाली थी.
सिनेमाघरों में उमड़ी भीड़, बॉक्स ऑफिस पर भी रही कामयाब
बिना आवाज और डायलॉग के भी फिल्म 'लंका दहन' सिर्फ अपनी कहानी और किरदारों के लिए नहीं, बल्कि इसकी कामयाबी के लिए भी याद की जाती है. रिपोर्ट्स की मानें तो उस वक्त मुंबई के वेस्ट एंड सिनेमा में इसे देखने के लिए भारी भीड़ पहुंची थी. दर्शकों को फिल्म इतनी ज्यादा पसंद आई थी कि इसके शो सुबह से लेकर देर रात तक चलते थे. इसके साथ ही बॉम्बे के वेस्ट एंड सिनेमा में फिल्म ने शुरुआती 10 दिनों में करीब 32,000 रुपये कमाए थे, जो उस समय पर बहुत बड़ी रकम मानी जाती थी.
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