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प्रकाश राज मां के अंतिम संस्कार की वजह से हो रहे ट्रोल, अब बोले- मैं भगवान को नहीं मानता, मां तो मानती थी

मां के निधन के बाद ईसाई रीति से अंतिम संस्कार करने पर उठे सवालों के बीच प्रकाश राज ने अपना पक्ष रखा है. उनके जवाब से आप समझ सकते हैं कि अपने विचारों में वह कितने क्लियर हैं.

प्रकाश राज मां के अंतिम संस्कार की वजह से हो रहे ट्रोल, अब बोले- मैं भगवान को नहीं मानता, मां तो मानती थी
प्रकाश राज ने मां के अंतिम संस्कार पर ट्रोल करने वालों को दिया करारा जवाब
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नई दिल्ली:

साउथ और बॉलीवुड के जाने-माने एक्टर प्रकाश राज के लिए ये समय बेहद दुखभरा है, क्योंकि उनकी मां स्वर्णलता का हाल ही में निधन हो गया है. वे 86 साल की थीं और लंबे समय से उम्र से जुड़ी बीमारियों से जूझ रही थीं. बेंगलुरु में उन्होंने आखिरी सांस ली. मां के जाने से प्रकाश राज काफी टूटे नजर आए, क्योंकि उनकी मां उनकी जिंदगी का सबसे मजबूत सहारा रही थीं. यही वजह है कि उनके निधन की खबर सामने आते ही फैंस और इंडस्ट्री के लोगों ने भी गहरा दुख जताया. सोशल मीडिया पर हर तरफ प्रकाश राज की मां को श्रद्धांजलि दी गई लेकिन कुछ लोगों ने प्रकाश राज को ट्रोल करना भी शुरू कर दिया.

मां के निधन के बाद लोगों ने किया ट्रोल 

मां के निधन के बाद जब उनका अंतिम संस्कार किया गया, तो उसे लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई. प्रकाश राज की मां स्वर्णलता का अंतिम संस्कार ईसाई रीति-रिवाज से किया गया, जिसे लेकर कुछ लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए लोगों का कहना था कि जब प्रकाश राज खुद को नास्तिक बताते हैं, तो उन्होंने अपनी मां का अंतिम संस्कार ईसाई रीति रिवाज से क्यों किया.

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प्रकाश राज ने ट्रोल्स को दिया दिल छू लेने वाला जवाब

इन सवालों के बीच प्रकाश राज ने चुप रहने के बजाय साफ शब्दों में जवाब दिया. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि, 'वे भगवान में विश्वास नहीं करते, लेकिन उनकी मां करती थीं. ऐसे में वे कौन होते हैं उनकी आस्था के मुताबिक उन्हें विदाई ना देने वाले'. उन्होंने ये भी कहा कि यही एक-दूसरे के लिए बुनियादी सम्मान होता है. उनका ये जवाब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया.

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संघर्षों से भरी थी मां की जिंदगी

इस पूरे मामले में उनकी मां की जिंदगी की कहानी भी सामने आई. बताया गया कि बचपन में उन्हें अनाथ आश्रम में रहना पड़ा था. वहीं उन्होंने ईसाई धर्म अपनाया और आगे चलकर नर्स बनीं. उन्होंने अपने दम पर परिवार को संभाला और जिंदगी भर संघर्ष किया. ऐसे में उनकी आखिरी इच्छा का सम्मान करना परिवार के लिए सबसे जरूरी था.

लोगों ने किया सपोर्ट

जहां कुछ लोगों ने सवाल उठाए, वहीं बड़ी संख्या में यूजर्स ने प्रकाश राज के फैसले की तारीफ की. लोगों ने कहा कि अपनी सोच अलग होने के बावजूद मां की इच्छा का सम्मान करना ही असली इंसानियत है.

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