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कभी स्कूल टीचर थी ये हीरोइन, शादी के बाद बनी एक्ट्रेस, पेंटिंग में देती हैं सलमान खान को भी टक्कर

किसी ने सही कहा है, ‘एक कलाकार के अंदर, सौ कलाकार होते हैं...’. ये लाइन सुचित्रा सेन और दीबानाथ सेन के घर 28 मार्च 1954 को जन्मीं बहुमुखी प्रतिभा की धनी अभिनेत्री मुनमुन सेन पर ठीक बैठती है.

कभी स्कूल टीचर थी ये हीरोइन, शादी के बाद बनी एक्ट्रेस, पेंटिंग में देती हैं सलमान खान को भी टक्कर
मंझी हुई अभिनेत्री के अलावा बेहतरीन पेंटर भी हैं मुनमुन सेन
नई दिल्ली:

किसी ने सही कहा है, ‘एक कलाकार के अंदर, सौ कलाकार होते हैं...'. ये लाइन सुचित्रा सेन और दीबानाथ सेन के घर 28 मार्च 1954 को जन्मीं बहुमुखी प्रतिभा की धनी अभिनेत्री मुनमुन सेन पर ठीक बैठती है. ठीक इसलिए क्योंकि वह न केवल मंझी हुई अभिनेत्री हैं, बल्कि बेहतरीन चित्रकार भी हैं, और यह गुर उन्होंने जैमिनी रॉय से सीखा था. मुनमुन सेन का जन्म कोलकाता में बंगाली अभिनेत्री सुचित्रा सेन और दीबानाथ सेन के घर हुआ था. उनके पिता की गिनती कोलकाता के सबसे धनी व्यापारियों में की जाती थी. मुनमुन का बचपन जितना शाही था, शादी के बाद और भी शाही बन गया.

कलाकार मां के गुण उनमें थे और वह अदाकारी में रुचि रखती थीं. हालांकि, यह काफी कम लोगों को पता है कि मुनमुन एक बेहतरीन चित्रकार भी हैं और उन्होंने बचपन में देश के महानतम कलाकारों में से एक जैमिनी रॉय से चित्रकारी सीखी थी. मुनमुन को पेंटिंग और प्राचीन वस्तुओं का संग्रह करना पसंद है और उनकी इसी पसंद ने उन्हें कैनवास पर रंगों के छींटे देने के लिए मजबूर कर दिया.

पुरानी चीजों को संभालकर अपने घरों में रखने वाली अभिनेत्री आज भी कई पेंटिंग को अपने घर में सहेजकर रखा है. मुनमुन बतौर शिक्षिका स्कूल में पढ़ा भी चुकी हैं. वह अंग्रेजी विषय के साथ बच्चों को चित्रकारी भी सिखाया करती थीं. मुनमुन सेन की पहली फिल्म मां बनने के बाद आई थी. उन्होंने 1984 में आई फिल्म 'अंदर बाहर' से करियर की शुरुआत की थी. फिल्म में उनके साथ अनिल कपूर और जैकी श्रॉफ मुख्य भूमिकाओं में थे.

एक्शन फिल्म 'अंदर बहार' का निर्देशन राज एन. सिप्पी ने किया और निर्माण रोमू सिप्पी ने किया था. यह फिल्म 1982 की हॉलीवुड फिल्म '48 ऑवर्स' का रीमेक है. मुनमुन सेन, अनिल कपूर, जैकी श्रॉफ के साथ फिल्म में डैनी डेन्जोंगपा और गुलशन ग्रोवर भी हैं. फिल्म का संगीत आर.डी. बर्मन ने तैयार किया था. गीत गुलशन बावरा ने लिखे थे. शैलेन्द्र सिंह, सुरेश वाडकर और आशा भोसले ने गीतों को आवाज दी थी. मुनमुन हिंदी के साथ ही बांग्ला, कन्नड़, तमिल, मलयालम, मराठी समेत अन्य भाषाओं की फिल्मों में काम कर चुकी हैं. वह कई टीवी शोज में भी काम कर चुकी हैं.
 

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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