आज भले ही म्यूजिक की दुनिया में हर दिन नए गाने रिलीज हो रहे हों. लेकिन हिंदी सिनेमा के गोल्डन पीरियड यानी 1950 और 1960 के दशक के कुछ गीत ऐसे हैं, जिनका जादू आज भी बरकरार है. इन गानों का दिल को छू लेने वाला म्यूजिक, इनके लिरिक्स और बेहतरीन गायकी ने इन्हें पीढ़ियों तक पॉपुलर बनाए रखा है. चाहे रेडियो हो, पुराने गीतों के प्रोग्राम हों या सोशल मीडिया, ये गाने आज भी उतने ही पसंद किए जाते हैं जितने अपने दौर में थे. इन गीतों में अगर मधुबाला की हसीन अदाकारी और दिलकश स्माइल जुड़ जाती थी तो बात ही कुछ और होती थी. आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ सदाबहार गीतों के बारे में जिन्हें मधुबाला की प्रेजेंस ने खास बना दिया.
प्यार किया तो डरना क्या: प्रेम की बेमिसाल घोषणा
1960 में रिलीज हुई फिल्म 'मुगल-ए-आजम' का ये गीत इंडियन सिनेमा के सबसे यादगार गीतों में गिना जाता है. लता मंगेशकर की आवाज में सजे इस गीत को नौशाद ने संगीत दिया था. जबकि इसके बोल शकील बदायूनी ने लिखे थे. मधुबाला पर फिल्माया गया ये गीत आज भी प्रेम और बगावत का उदाहरण माना जाता है.
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अच्छा जी मैं हारी चलो: नोकझोंक से भरा प्यारा गीत
फिल्म 'काला पानी' (1958) का ये गीत मधुबाला के चुलबुले अंदाज के लिए याद किया जाता है. आशा भोसले और मोहम्मद रफी की शानदार जुगलबंदी ने इसे खास बना दिया. इसके संगीतकार एस. डी. बर्मन थे और गीत के बोल मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे. देव आनंद और मधुबाला पर फिल्माया गया ये गीत आज भी चेहरे पर मुस्कान ले आता है.
आइए मेहरबान: अदाओं और संगीत का शानदार मेल
1958 की फिल्म 'हावड़ा ब्रिज' का ये गीत सुनते ही मधुबाला की दिलकश अदाएं याद आ जाती हैं. आशा भोसले की मधुर आवाज, ओ. पी. नय्यर का संगीत और कमर जलालाबादी के बोल ने इसे एक क्लासिक गीत बना दिया.
हाल कैसा है जनाब का: मस्ती और रोमांस का खूबसूरत संगम
फिल्म 'चलती का नाम गाड़ी' (1958) का ये गीत आशा भोसले और किशोर कुमार की आवाज में रिकॉर्ड किया गया था. एस. डी. बर्मन के संगीत और मजरूह सुल्तानपुरी के गीत ने इसे बेहद खूबसूरत बनाया. किशोर कुमार और मधुबाला की मस्ती से भरपूर केमिस्ट्री इस गाने की सबसे बड़ी खासियत है.
ठंडी हवा काली घटा: बारिश के मौसम का सदाबहार गीत
1955 में आई फिल्म 'मिस्टर एंड मिसेज 55' का ये गीत आज भी मानसून की प्लेलिस्ट का अहम हिस्सा माना जाता है. आशा भोसले की आवाज में गाए गए इस गीत को ओ. पी. नय्यर ने म्यूजिक से सजाया था. जबकि इसके बोल मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे. दो चोटी और रिबिन वाला मधुबाला का लुक भी बेहद हसीन था.
जिंदगी भर नहीं भूलेगी: मोहब्बत की यादों से भरा गीत
फिल्म 'बरसात की रात' (1960) का ये गीत मोहम्मद रफी की सबसे यादगार पेशकश में से एक माना जाता है. इसका संगीत रोशन ने तैयार किया था और इसके बोल साहिर लुधियानवी ने लिखे थे. गाने बेशक मेल वॉइस में था लेकिन इसके हर लफ्ज में मधुबाला की खूबसूरती शामिल थी.
मोहे पनघट पे: शास्त्रीय संगीत की खूबसूरत झलक
'मुगल-ए-आजम' का एक और अमर गीत 'मोहे पनघट पे' भारतीय शास्त्रीय संगीत की मिठास से भरपूर है. लता मंगेशकर की सुरीली आवाज, नौशाद का संगीत और शकील बदायूनी के बोल इस गीत को खास बनाते हैं. फिल्म में इसके भव्य सेट और मधुबाला के बेमिसाल एक्सप्रेशन इसे बेहद सुंदर बनाते हैं.
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