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मां की मौत के 4 दिन बाद दुनिया को अलविदा कह गए थे इरफान, आज भी दिल कचोटती है उनकी ये बात

इरफान खान: मां की मौत के चार दिन बाद दुनिया को कहा अलविदा, 'सिनेमा के साहबजादे' का अंदाज-ए-बयां ही कुछ और था...इरफान खान के जन्मदिन यानी 7 जनवरी पर कुछ खास बातें...

मां की मौत के 4 दिन बाद दुनिया को अलविदा कह गए थे इरफान, आज भी दिल कचोटती है उनकी ये बात
इरफान खान के जन्मदिन पर कुछ खास मुलाकातें और बातें
नई दिल्ली:

'आदमी जितना बड़ा होता है, उसके छुपने की जगह उतनी ही कम होती है.' ये डायलॉग 2001 में आई फिल्म कसूर का है. जिसे इरफान ने स्क्रीन पर बोला था. वही इरफान, जिसका सिनेमा की दुनिया में नाम हरी काफी है. सिनेमा की दुनिया में आप बॉक्स ऑफिस के बादशाह, सिनेमा के महानायक जैसे कई शख्सियतों से रूबरू हुए हैं लेकिन इरफान को एक्टिंग और एक्सप्रेशन का किंग कहा जाए तो कतई गलत नहीं होगा. इरफान वो एक्टर रहे जिन्हें एक्सप्रेशन से कहानी कहने की बेमिसाल अदा आती थी. उनकी डायलॉग डिलिवरी ऐसी थी कि शब्द सीधे दिलोदिमाग पर उतर जाते थे. इसकी बेहतरीन मिसाल उनकी फिल्म 'चॉकलेट (2005)' थी, जिसमें उनकी घनघोर किस्सागोई दिखी. बेशक फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई चमत्कार नहीं कर सकी, लेकिन पिप्पी का किरदार जरूर मेरे जेहन पर छपा रह गया. ये डायलॉग इस मायने में भी अहम हो जाता है कि टीवी की दुनिया से हॉलीवुड तक छा जाने वाले इरफान को उनके हालात कतई भी कामयाबी से छिपा नहीं सके और उन्हें शानदार कलाकार के तौर पर दुनिया के सामने पेश किया.

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अब इस कद का कलाकार हो और एक फिल्म पत्रकार को उसका इंटरव्यू करने का मौका मिले तो इससे बेहतर क्या हो सकता है. बात 2011 की है. 'ये साली जिंदगी' फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही थी. ट्रेलर में इरफान का ये डायलॉग 'लोग सुनेंगे तो क्‍या कहेंगे...आशिकी के चक्कर में मर गया, और लौन्डिया भी नहीं मिली.' बहुत ही कमाल का लगा था. अब इंटरव्यू का दिन आया और होटल पहुंच गए. काले कोट-पैंट में इरफान एकदम चुस्त और पूरे जी-जान से फिल्म प्रमोशन में लगे थे. एक दो इंटरव्यू हुए और उसके बाद पता चला कि वो आगे इंटरव्यू नहीं कर पाएंगे और उन्हें एयरपोर्ट निकलना है. अब यह खबर किसी शॉक से कम नहीं थी. फिल्म के पीआर ने कहा कि आप टीम के बाकी किसी कलाकार का इंटरव्यू कर सकते हैं. मैंने यही सोचा, अब क्या फायदा? बुझे हुए मन से मना कर दिया. लेकिन जाने से पहले इरफान से हाय-हैलो हुई और फिर कभी इंटरव्यू करने की बात कहकर मैं निकल गया. 

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फिर साल 2012 आया. फरवरी का महीना था और इरफान की फिल्म 'पान सिंह तोमर' रिलीज हो रही थी. इंटरव्यू फाइनल हुआ. ये इंटरव्यू फिल्म के डायरेक्टर तिग्मांशू धूलिया के साथ होना था. एकदम से इरफान से मुलाकात हुआ. सफेद कमीज और काले सूट में वह बहुत ही गर्मजोशी के साथ मिले. पान सिंह तोमर के लिए उन्होंने खूब मेहनत की थी और हंसते हुए कहा था कि 45 साल की उम्र में स्टीपलचेज के एथलीट का रोल करना आसान नहीं था. एक लंबा इंटरव्यू हुआ, फोटोशूट हुआ और इस दौरान पूरे समय उनके हाथ में रोल वाली सिगरेट जलती-बुझती रही और इरफान बहुत ही बेबाकी के साथ जवाब देते रहे. वह उन्हीं दिनों स्पाइडरमैन की शूटिंग भी खत्म करके आए थे. कुल मिलाकर एक शानदार मुलाकात रही. इस बीच जब उनसे टीम ने खाने के लिए पूछा तो उन्होंने कहा कि यार दिल्ली आए हैं तो राज कचौड़ी जरूर खाएंगे. चेहरे पर मुस्कान के साथ उनसे विदा ली और फिर दोबारा मिलने की बात कहकर मैं निकल गया.

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इसके बाद इरफान की 'हिंदी मीडियम' से लेकर जुरासिक पार्क जैसी कई फिल्में आईं. एक सितारा जो सिर्फ भारत ही नहीं दुनियाभर में चमक कर रहा था. लाइफ ऑफ पाई और स्लमडॉग मिलियनेयर जैसी फिल्मों ने उसकी चमक को कई गुना बढ़ा दिया था. लेकिन इस दौरान चाहकर भी व्यस्तता की वजह से मुलाकात नहीं हो सकी. 

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5 मार्च 2018 की वो सुबह शॉकिंग थी. इस दिन इरफान ने खुद के स्वस्थ ना होने के बारे में फैन्स को बताया. इसके बात 16 मार्च को उन्होंने बताया कि उन्हें न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर है. इसने तो फैन्स को तोड़ ही दिया. लंदन में इलाज कराया और हालत में सुधार हुआ तो उन्होंने 2019 में अपनी फिल्म 'अंग्रेजी मीडियम' की शूटिंग पूरी की.

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इरफान अपनी मां से बहुत प्यार किया करते थे. लेकिन जब वह खुद बीमारी से लड़ रहे थे, उस समय उनको तोड़ देने वाली खबर आई. 25 अप्रैल, 2020 को उनकी मां का निधन जयपुर में हो गया. लेकिन कोरोना की वजह से लॉकडाउन लगा था और उन्होंने वीडियो कॉल के जरिये मां को अंतिम विदाई दी. 

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इरफान मां के निधन के दौरान बीमारी से जंग लड़ रहे थे. दुनियाभर में कोविड की वजह से लोग घरों में बंद थे. अभी उनकी मां के निधन को चार ही दिन हुए थे कि 29 अप्रैल 2020 को वो मनहूस खबर आई जिसने झकझोर कर रख दिया. सिनेमा की दुनिया का साहेबजादा अचानक हम सबको अलविदा कह गया. हमेशा लाइमलाइट से दूर रहने वाले इरफान की अंतिम विदाई भी बहुत ही खामोशी के साथ हुई. सिनेमा की दुनिया का एक ऐसा चिराग जिसकी जैसे ही अपने उफान पर पहुंचने वाली थी, बुझ गया. वो दिन बहुत ही खराब था और इरफान का निधन का दिन और उनका 'लाइफ ऑफ पाई' का ये डायलॉग आज भी जेहन में कौंधता है, 'मुझे लगता है, आखिर में जिंदगी सिर्फ छोड़ते जाने का नाम है…लेकिन सबसे बड़ा दर्द तब होता है जब अलविदा कहने का एक पल भी न मिले...'

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