आज की फिल्मों में रिश्तों का अंदाज काफी बदल चुका है. लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब हिन्दी सिनेमा में ‘भाभी' का किरदार बेहद भावनात्मक और सम्मान से भरा हुआ दिखाया जाता था. वह सिर्फ घर की बहू नहीं होती थी, बल्कि कई बार मां की तरह पूरे परिवार को संभालने वाली महिला बनकर सामने आती थी. 70, 80 और 90 के दशक की फिल्मों में ऐसी कई यादगार भाभियां दिखीं, जिन्हें दर्शक आज भी नहीं भूले हैं.
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कालिया मूवी में अमिताभ बच्चन की भाभी बनी आशा पारेख
फिल्म ‘कालिया' में आशा पारेख ने अमिताभ बच्चन के किरदार ‘कल्लू' की भाभी शांति का रोल निभाया था. फिल्म में कल्लू अपनी भाभी को मां की तरह मानता है. बड़े भाई की मौत के बाद अमिताभ का किरदार बदले की राह पकड़ लेता है. लेकिन इस गुस्से और एक्शन के बीच भाभी-देवर का रिश्ता फिल्म को भावनात्मक गहराई देता है.
‘घायल' में मौसमी चटर्जी बनी सनी देओल की भाभी
मौसमी चटर्जी ने इस फिल्म में राज बब्बर की पत्नी का किरदार निभाया था, जो सनी देओल की भाभी हैं. लेकिन खलनायक बलवंत राय इस हंसते-खेलते परिवार को बर्बाद कर देता है. भाभी पर ऐसे लांछन लगाए जाते हैं कि वो खुदकुशी कर लेती हैं और फिर सनी देओल का एक्शन अवतार बदला लेता है.
रेणुका शाहणे बनी सलमान की भाभी
भाभी और देवर की बात हो और रेणुका शाहणे का जिक्र न आए ऐसा तो हो ही नहीं सकता. ‘हम आपके हैं कौन' में “पूजा भाभी” शायद हिन्दी सिनेमा की सबसे प्यारी भाभियों में गिनी जाती हैं. सलमान खान के साथ उनकी बॉन्डिंग, घर संभालने का तरीका और उनका भावुक अंत आज भी दर्शकों को याद है.
‘संसार' में परिवार को जोड़कर रखने वाली भाभी बनीं रेखा
‘संसार' की कहानी में रेखा का किरदार यह भी दिखाता है कि उस दौर की फिल्मों में भाभी सिर्फ घर की सदस्य नहीं, बल्कि पूरे परिवार को साथ बांधे रखने वाली सबसे अहम कड़ी की तरह पेश की जाती थी. शायद यही वजह है कि आज भी कई लोग उनके इस रोल को पुराने हिन्दी सिनेमा की सबसे मजबूत फैमिली वुमन किरदारों में गिनते हैं.
‘हम साथ-साथ हैं' कि साधना भाभी यानी तब्बू
कई लोग ‘हम साथ-साथ हैं' को रामायण से प्रेरित मॉडर्न फैमिली ड्रामा भी मानते रहे हैं. यही वजह है कि फिल्म में तब्बू के साधना भाभी वाले किरदार को भी कई दर्शकों ने सीता जैसी शांत, समझदार और परिवार को साथ लेकर चलने वाली महिला की छवि से जोड़ा. फिल्म में उनका सौम्य और स्नेहभरा स्वभाव दर्शकों को काफी पसंद आया था.
आज की फिल्मों और वेब सीरीज में रिश्तों को कहीं ज्यादा मॉडर्न और प्रैक्टिकल अंदाज में दिखाया जाता है, लेकिन पुराने हिन्दी सिनेमा में ‘भाभी' सिर्फ एक रिश्ते का नाम नहीं होती थी. वह कई बार मां जैसी ममता, बड़ी बहन जैसी समझदारी और पूरे परिवार को जोड़कर रखने वाली ताकत के रूप में दिखाई जाती थी. शायद यही वजह है कि दशकों बाद भी लोग इन किरदारों को सिर्फ फिल्मों की कहानी की वजह से नहीं, बल्कि उनसे जुड़े अपनापन, त्याग और भावनात्मक जुड़ाव की वजह से याद करते हैं.
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