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55 साल पहले आया था ये रोमांटिक गाना, न VFX थे न करोड़ों का सेट, फिर भी यंग जेनरेशन का फेवरेट, रफी-आशा की जोड़ी आज भी हिट

1971 में रिलीज हुआ ‘गोरिया कहां तेरा देश’ आज भी अपनी सुरीली धुन, रफी-आशा की जादुई आवाज और जीतेंद्र-अरुणा ईरानी की शानदार केमिस्ट्री के लिए याद किया जाता है.

55 साल पहले आया था ये रोमांटिक गाना, न VFX थे न करोड़ों का सेट, फिर भी यंग जेनरेशन का फेवरेट, रफी-आशा की जोड़ी आज भी हिट
आशा-रफी का गाना गोरिया कहां तेरा देश हुआ था हिट

कुछ गाने वक्त के साथ पुराने नहीं होते, बल्कि हर गुजरते साल के साथ और भी खास बन जाते हैं. 55 साल पहले रिलीज हुआ एक गाना आज भी लोगों को पलभर में पुरानी यादों की सैर करा देता है. न इसमें बड़े-बड़े विजुअल इफेक्ट्स थे, न करोड़ों का सेट और न ही मॉडर्न टेक्नोलॉजी. फिर भी इसका जादू ऐसा चला कि आज की नई पीढ़ी भी इसे बार-बार सुनना पसंद करती है. पहाड़ों के बीच फिल्माए गए खूबसूरत सीन, रोमांस से भरा अंदाज और दो महान गायकों की आवाज ने इस गीत को हमेशा के लिए अमर बना दिया. हम बात कर रहे हैं फिल्म 'कारवां' के सुपरहिट गीत 'गोरिया कहां तेरा देश' की, जिसका अट्रैक्शन आज भी बिल्कुल कम नहीं हुआ है.

रफी और आशा की आवाज ने बना दिया सदाबहार

'गोरिया कहां तेरा देश' को मोहम्मद रफी और आशा भोसले ने अपनी जादुई आवाज से सजाया था. दोनों की गायकी में जो मस्ती, मिठास और नटखटपन सुनाई देता है, वही इस गाने की सबसे बड़ी ताकत है. यही वजह है कि जैसे ही इसकी धुन बजती है, पुराने हिंदी सिनेमा के चाहने वालों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. ये उन चुनिंदा गानों में शामिल है जिन्हें लोग आज भी पूरे दिल से सुनते हैं.

जीतेंद्र और अरुणा ईरानी की जोड़ी ने लूट ली महफिल

गाने को सिर्फ आवाज ही नहीं, बल्कि पर्दे पर नजर आई जीतेंद्र और अरुणा ईरानी की शानदार केमिस्ट्री ने भी यादगार बना दिया. उस दौर में जीतेंद्र अपने जबरदस्त डांस स्टाइल के लिए मशहूर थे और इस गीत में भी उनका वही एनर्जी से भरपूर अंदाज देखने को मिलता है. वहीं अरुणा ईरानी की खूबसूरती, मुस्कान और एक्सप्रेशंस हर फ्रेम को और भी खास बना देते हैं. दोनों की जोड़ी ने इस गाने में ऐसी जान डाली कि लोग आज भी इसे बड़े चाव से देखते हैं.

पहाड़ों की वादियां और ऐसा संगीत जो कभी पुराना नहीं पड़ता

इस गाने की सबसे बड़ी खास बात इसकी खूबसूरत लोकेशन भी है. पहाड़ों की शानदार वादियों और बैलगाड़ियों के लंबे काफिले के बीच फिल्माए गए सीन आज भी देखने में बहुत अच्छे लगते हैं. उस दौर में बड़े-बड़े विजुअल इफेक्ट्स नहीं होते थे, फिर भी ये गाना अपनी सादगी से लोगों का दिल जीत लेता है. फिल्म 'कारवां' का संगीत आर.डी. बर्मन ने दिया था और इसके बोल मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे. शानदार धुन, आसान शब्द और बेहतरीन फिल्मांकन ने इस गाने को खास बना दिया. यही वजह है कि 1971 में रिलीज हुआ ये गाना आज भी पुराने हिंदी गानों के सबसे पसंदीदा गानों में गिना जाता है.

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