अमिताभ बच्चन को हिंदी सिनेमा का ‘एंग्री यंग मैन' कहा जाता है, लेकिन उनके करियर से जुड़ा एक ऐसा संयोग भी है जो बेहद दिलचस्प है. जिस तरह सलमान खान के साथ ‘प्रेम' और शाहरुख खान के साथ ‘राहुल' या ‘राज' नाम जुड़ गया, उसी तरह अमिताभ बच्चन के लिए ‘विजय' नाम खास बन गया. बिग बी ने अपने लंबे करियर में 20 से ज्यादा फिल्मों में विजय नाम का किरदार निभाया. खास बात यह रही कि हर फिल्म में यह विजय एक जैसा नहीं था. कहीं वह पुलिस ऑफिसर था, कहीं अपराध की दुनिया में उतर चुका शख्स, कहीं बदला लेने वाला बेटा तो कहीं गैंगस्टर की दुनिया में फंसा आम आदमी. ‘जंजीर' से शुरू हुआ यह सिलसिला ‘दीवार', ‘डॉन', ‘त्रिशूल', ‘काला पत्थर' और ‘अग्निपथ' जैसी फिल्मों तक पहुंचा और विजय नाम अमिताभ की स्क्रीन पहचान का हिस्सा बन गया.
‘जंजीर' में पहली बार बने विजय
अमिताभ बच्चन ने पहली बार 1973 की फिल्म ‘जंजीर' में विजय नाम का किरदार निभाया था. वह फिल्म में इंस्पेक्टर विजय खन्ना बने थे और इसी फिल्म ने उनके करियर में बड़ा मोड़ दिया. इसके बाद 1974 में ‘रोटी कपड़ा और मकान', 1975 में ‘दीवार' और फिर ‘हेरा फेरी' में भी उनका नाम विजय रहा. ‘दीवार' में विजय वर्मा का किरदार पूरी तरह अलग था. वह कानून की राह पर चलने वाला पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि परिस्थितियों से लड़ते हुए अपराध की दुनिया में पहुंचा शख्स था. इसके बाद 1978 में ‘डॉन' में भी अमिताभ का नाम विजय था. खास बात यह कि इसी फिल्म में उन्होंने डॉन और विजय दोनों भूमिकाएं निभाईं.
कभी डॉन, कभी पुलिसवाला, कभी बदला लेने वाला बेटा
‘विजय' नाम अमिताभ के लिए किसी एक तरह के किरदार तक सीमित नहीं रहा. ‘त्रिशूल' में वह विजय कुमार बने, ‘काला पत्थर' में विजय पाल सिंह, ‘शक्ति' में विजय कुमार, ‘शहंशाह' में विजय कुमार श्रीवास्तव और ‘अग्निपथ' में विजय दीनानाथ चौहान. खास तौर पर ‘अग्निपथ' का विजय आज भी अमिताभ के सबसे चर्चित किरदारों में गिना जाता है. उनका मशहूर संवाद “पूरा नाम विजय दीनानाथ चौहान” आज भी दर्शकों को याद है.
‘त्रिशूल' में 7 गाने, संगीत ने भी छोड़ी अमिट छाप
अमिताभ की विजय वाली फिल्मों में 1978 की ‘त्रिशूल' का संगीत भी खास था. फिल्म में कुल 7 गाने थे और संगीतकार खय्याम थे, जबकि गीत साहिर लुधियानवी ने लिखे थे. ‘मोहब्बत बड़े काम की चीज है', ‘जानेमन तुम कमाल करती हो', ‘आपकी महकी हुई जुल्फ को कहते हैं घटा', ‘जो हो यार अपना' और ‘तू मेरे साथ रहेगा मुन्ने' जैसे गाने आज भी हिंदी फिल्म संगीत के यादगार गीतों में शामिल हैं.
इसलिए अमिताभ बच्चन के करियर में ‘विजय' सिर्फ एक नाम नहीं रहा. यह कभी ईमानदार पुलिसवाले की पहचान बना, कभी सिस्टम से लड़ते युवक की, कभी अपराध की दुनिया में पहुंचे आदमी की और कभी बदले की आग में जलते बेटे की. शायद यही वजह है कि दशकों बाद भी जब स्क्रीन पर अमिताभ का नाम ‘विजय' सुनाई देता है, तो दर्शकों के जेहन में उनका एक पूरा सिनेमाई दौर जिंदा हो जाता है.
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