1 अप्रैल (1 April) 1983 की बात है. इस दिन एक फिल्म रिलीज हुई जिसमें तीन नामचीन चेहरे थे और उनके साथ था मशहूर डायरेक्टर. फिल्म रोमांटिक ड्रामा थी और इसके गाने पहले ही बहुत पसंद किए जा चुके थे. होली के मौके पर रिश्तों के रंगों को लेकर आई इस फिल्म ने रिलीज होते ही दर्शकों के दिलों में जगह बनानी शुरू कर दी और इसने बॉक्स ऑफिस पर मेकर्स की चांदी कर दी. फिल्म का नाम है अर्पण. जिसे डायरेक्ट किया जे. ओम प्रकाश ने. फिल्म में लीड रोल में जितेंद्र, राज बब्बर, रीना रॉय और परवीन बाबी थे. संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था और गीत आनंद बक्शी ने लिखे थे.
धीमी शुरुआत लेकिन माउथ पब्लिसिटी और म्यूजिक ने बदली तकदीर
जितेंद्र और रीना रॉय की फिल्म को लेकर बताया जाता है कि रिलीज के बाद इसका प्रदर्शन शानदार रहा. हालांकि पहले हफ्ते में कुछ थिएटरों में औसत रिस्पॉन्स रहा. लेकिन माउथ पब्लिसिटी और संगीत की बदौलत फिल्म ने पूरे देश में धमाल मचा दिया. लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के गीतों का जादू चला. फिल्म के गाने जैसे परदेस जाके परदेसिया, मोहब्बत अब तिजारत बन गई है, लिखने वाले लिख डाले और तौबा कैसे हैं नादान घुंघरू खूब पसंद किए गए.
43 साल पुरानी फिल्म का बजट और कलेक्शन
अर्पण आज भी बॉलीवुड की उन फिल्मों में गिनी जाती है जिसने कम बजट में जबरदस्त कमाई की. जे. ओम प्रकाश फिल्म की इस रोमांटिक ड्रामा को सिर्फ 80 लाख रुपये के बजट में बनाया गया था. लेकिन जब ये सिनेमाघरों में रिलीज हुई तो इसने गदर ही काट दिया. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर लगभग तीन करोड़ रुपये का कलेक्शन किया. उस दौर में इसे ब्लॉकबस्टर का दर्जा मिला.

अर्पण फिल्म में राज बब्बर और रीना रॉय
जीतेंद्र, रीना और ओमप्रकाश की सुपरहिट तिकड़ी
अर्पण फिल्म की कहानी जितेंद्र, रीना रॉय और परवीन बॉबी के रिश्तों की जटिलताओं को लेकर गढ़ी गई है. दिलचस्प यह है कि अर्पण फिल्म के लिए जया प्रदा को पहले साइन किया गया था. लेकिन दिक्कतों के चलते उन्होंने फिल्म छोड़ दी. फिल्म 1983 में होली वीकेंड पर रिलीज हुई थी. जे. ओम प्रकाश ने इस सीरीज में तीन फिल्में बनाई थीं और यह उसी कड़ी की आखिरी फिल्म थी. इससे पहले उन्होंने अपनापन (1977) और आशा (1980) बनाई थी. इन फिल्मों में भी जितेंद्र और रीना रॉय थे. लेकिन हर फिल्म एक दूसरी एक्ट्रेस भी थीं. जैसे अपनापन में सुलक्षणा पंडित और आशा में रामेश्वरी. इस तरह जे. ओम प्रकाश, जितेंद्र और रीना रॉय की तिकड़ी की तीनों फिल्में सुपरहिट रहीं.
परदे से गायब हुईं दोनों हीरोइनें
लेकिन अर्पण की सबसे दिलचस्प बात दोनों प्रमुख हीरोइनों का परदे से गायब हो जाना है. रीना रॉय, जो 70-80 के दशक की लोकप्रिय अभिनेत्री थीं और जितेंद्र के साथ कई हिट फिल्में दे चुकी थीं, अर्पण के बाद धीरे-धीरे कम स्क्रीन पर नजर आईं. उन्होंने कुछ और फिल्में कीं, लेकिन 1980 के दशक के अंत तक उनकी सक्रियता कम हो गई. बाद में उन्होंने शादी की और परिवार पर फोकस किया.
दूसरी हीरोइन परवीन बाबी का मामला और भी दर्दनाक रहा. 1970 के दशक की ग्लैमर गर्ल, जो मैगजीन कवर और फिल्मों की स्टाइल आइकन थीं, अर्पण (1983) के आसपास के समय में अचानक परदे से गायब हो गईं. 1983 में ही वे फिल्म इंडस्ट्री से लगभग लापता हो गईं. बाद में पता चला कि वे मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं. उन्होंने कुछ फिल्मों में काम किया, लेकिन 1980 के मध्य तक उनकी उपस्थिति खत्म हो गई. वे अकेलेपन में जीती रहीं और 2005 में मुंबई के अपने फ्लैट में अकेले मृत पाई गईं.
43 साल बाद भी अर्पण की कहानी, उसका म्यूजिक और उसकी कामयाबी सिनेप्रेमियों के बीच चर्चा का विषय हैं. लेकिन रीना रॉय और परवीन बाबी का सिनेमा के परदे से एकदम गायब होना याद दिलाता है सुनहरा परदा सिर्फ चमक नहीं, बल्कि कई बार अंधेरा भी छुपाए रहता है.
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