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34 साल का वो टैलेंटेड डायरेक्टर, जिसने बनाई सिर्फ 1 फिल्म, जिस दिन जीता नेशनल अवार्ड, उसी दिन हुई मौत

सिनेमा की जगमगाती दुनिया में कुछ नाम ज्यादा दिन तक नहीं चमकते, लेकिन अपने पीछे एक ऐसी पहचान छोड़ जाते हैं जो दशकों तक गूंजती रहती है. आज हम ऐसी ही एक फिल्ममेकर के बारे में बात कर रहे हैं.

34 साल का वो टैलेंटेड डायरेक्टर, जिसने बनाई सिर्फ 1 फिल्म, जिस दिन जीता नेशनल अवार्ड, उसी दिन हुई मौत
34 की उम्र में हो गई थी अवतार कृष्णा कौल की मौत

सिनेमा की जगमगाती दुनिया में कुछ नाम ज्यादा दिन तक नहीं चमकते, लेकिन अपने पीछे एक ऐसी पहचान छोड़ जाते हैं जो दशकों तक गूंजती रहती है. आज हम ऐसी ही एक फिल्ममेकर के बारे में बात कर रहे हैं. उन्होने एक टाइमलेस क्लासिक फिल्म बनाई जिसने दो नेशनल फिल्म अवॉर्ड जीते और इंडियन पैरेलल सिनेमा में एक मील का पत्थर बन गई, लेकिन विडंबना देखिए कि फिल्म की रिलीज के कुछ समय बाद ही ये डायरेक्टर दुनिया छोड़ गया. जिसमें लोग जबरदस्त संभावनाएं देख रहे थे वो उन सब को विराम देकर अलविदा कह गया. हम बात कर रहे हैं अवतार कृष्ण कौल की, जिन्होंने फिल्म 27 डाउन (1974) बनाई थी.

अवतार कृष्ण कौल का जन्म 27 सितंबर, 1939 को कश्मीर के श्रीनगर के एक इलाके फतेहकदल में हुआ था. वे एक साधारण घर में पले-बढ़े, उनका सिनेमा या थिएटर से कोई लेना-देना नहीं था. फिल्ममेकर बनने का उनका सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था.

स्टेशन पर बेची चाय

जवानी में अवतार कौल को पर्सनल और फाइनेंशियल मुश्किलों का सामना करना पड़ा. घर में झगड़े के बाद, उनके पिता ने उन्हें घर से निकाल दिया. अकेले और बहुत कम सपोर्ट के साथ, उन्होंने रेलवे प्लेटफॉर्म पर एक चाय की दुकान पर काम किया और बाद में अंबाला के एक होटल में नौकरी की. नौकरी के साथ उन्होंने ओपन स्कूलिंग से ग्रेजुएशन पूरा किया.

इस तरह बदली जिंदगी

आखिरकार, अवतार को विदेश मंत्रालय में क्लास IV की नौकरी मिल गई. हालांकि, यह मामूली सरकारी नौकरी ज़िंदगी बदलने वाली साबित हुई. इससे उन्हें यूनाइटेड स्टेट्स में पोस्टिंग का मौका मिला, जहां उनके लिए एक पूरी नई दुनिया खुल गई. न्यूयॉर्क में उन्होंने सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ़ न्यूयॉर्क में एडमिशन लिया और फिल्म में बैचलर डिग्री हासिल की.

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उन्होंने अपना गुज़ारा करने के लिए कई काम किए, जिसमें एसोसिएटेड प्रेस और ब्रिटिश इन्फॉर्मेशन सर्विसेज जैसे इंटरनेशनल मीडिया ऑर्गनाइजेशन के लिए कॉपीहोल्डर और बाद में न्यूज ब्रीफ राइटर के तौर पर काम करना शामिल था. कौल की समझ और पढ़ने की आदतों से प्रभावित एक एडिटर ने न्यूजरूम में उन्हें आगे बढ़ने में मदद की.

फिल्म डायरेक्शन में आजमाया हाथ

US में अवतार कौल की मुलाकात ऐनी से हुई और उन्होंने उनसे शादी कर ली, जो उनकी जिंदगी भर की पार्टनर बनीं. यह जोड़ा 1970 में भारत लौट आया. इसके तुरंत बाद उन्हें मशहूर मर्चेंट आइवरी प्रोडक्शंस ने फिल्म बॉम्बे टॉकी में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम पर रखा. इस अनुभव ने उन्हें अपने डायरेक्टोरियल डेब्यू के लिए तैयार किया. 1974 में, उन्होंने 27 डाउन लिखी, डायरेक्ट की और प्रोड्यूस की. यह एक ऐसी फिल्म थी, जिसमें एक आम आदमी की कहानी थी, जो फर्ज और चाहत के बीच फंसा हुआ था. इस फिल्म को खूब सराहना मिली और दो नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी मिले, जिसमें हिंदी में बेस्ट फीचर फिल्म भी शामिल है.

एक हादसे ने ले ली जिंदगी

27 डाउन के रिलीज होने के कुछ ही महीनों बाद एक दुखद घटना घटी. 20 जुलाई 1974 को बॉम्बे के वालकेश्वर में अवतार कौल एक लड़की को डूबने से बचाने की कोशिश में अपनी जाव गवां बैठे. हैरानी की बात ये है कि इसी दिन नेशनल अवार्ड का ऐलान हुआ था. वह सिर्फ 34 साल के थे. उनके बहादुरी भरे आखिरी काम ने फिल्म इंडस्ट्री को चौंका दिया और उनके परिवार और चाहने वालों को तोड़ दिया.

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