पंकज उधास संगीत की दुनिया के वो सितारे हैं जिन्होंने अपनी आवाज से कई गानों की जिंदगी बदल दी और उन्हें सदाबहार बना दिया. कुछ गाने तो ऐसे हैं जिन्हें हम उनके अलावा किसी और की आवाज में सोच भी नहीं सकते हैं. जरा आप ही बताइए अगर 'ना कजरे की धार' किसी और ने गाया होता तो? मान लीजिए किशोर या रफी ने या फिर महेंद्र कपूर ने...अगर वाकई ऐसा हुआ होता तो गाने की फील कुछ और ही होती. यकीन मानिए कि ऐसा होने भी वाला था. क्योंकि ये गाना 1960 में मुकेश गा चुके थे लेकिन फिल्म रिलीज नहीं हो पाई. पढ़िए किस तरह घूमते-घुमाते ये गाना पंकज उधास तक पहुंचा.
'न कजरे की धार' की असली कहानी
पिछले तीन दशकों से चलता आ रहा ये गाना दरअसल 60 के दशक में बना था. इसे कल्याण जी-आनंद जी की पॉपुलर जोड़ी ने कम्पोज किया था और मुकेश ने रिकॉर्ड किया था. गाना उसी वक्त मार्केट में आ चुका होता लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. ये गाना रिलीज नहीं हो पाया क्योंकि इसे जिस फिल्म का हिस्सा बनाया गया था वह कभी पूरी हो ही नहीं पाई. अधूरी रह गई.
पंकज उधास तक कैसे पहुंचा गाना?
'ना कजरे की धार' उस वक्त रिलीज नहीं हो पाया कुछ साल बाद संगीतकार विजू शाह ने इस पुरानी धुन को इस्तेमाल करने की सोची. शाह ने अपना ये आइडिया राजीव राय की फिल्म मोहरा (194) में इस्तेमाल किया. पंकज उधास और साधना ने जब अपनी आवाज में 'ना कजरे की धार' गाया तो इस गाने ने धूम मचा दी. कमाल की बात ये है कि इसे आज तक कोई बीट नहीं कर पाया है. बात करें गाने के वीडियो की तो इसे सुनील शेट्टी और पूनम झावर पर फिल्माया गया था. बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त हिट रही इस फिल्म के गाने भी खूब चले. तू चीज बड़ी है मस्त मस्त, टिप टिप बरसा पानी इसी फिल्म के नगीने हैं.
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