बीत गई कड़ाके की ठंड, लेकिन बिहार का समाज कल्याण विभाग नहीं बांट सका 30 हजार से ज्यादा कंबल

पिछले साल जिलों को 5 करोड़ रुपये की राशि कपड़े बांटने के लिए दिए गए थे. इस राशि से 1 लाख 22 हजार 636 कंबल की खरीद हुई. इनमें 91 हजार 711 कंबल बांटे गए. 30 हजार 925 कंबल अब भी बांटने को बाकी हैं.

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  • बिहार में समाज कल्याण विभाग ने 30 हजार 925 कंबल अब तक गरीबों और भूमिहीनों में नहीं बांटे हैं
  • विभाग ने कंबल वितरण की समय सीमा 15 दिसंबर तक तय की थी लेकिन अभी तक लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है
  • पिछले साल 5 करोड़ रुपये की राशि से 1 लाख 22 हजार 636 कंबल खरीदे गए थे, जिनमें से अधिकांश बांटे गए हैं
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पटना:

ठंड का मौसम बीतने को है, लेकिन बिहार में फुटपाथ पर और झुग्गियों में रहने वाले गरीब लोगों के लिए आए 25% कंबल विभाग बांट नहीं पाया. 30 हजार 925 कंबल अब भी बांटे जाने बाकी हैं, जबकि समाज कल्याण विभाग इन कंबलों की बिक्री के लिए 15 दिसंबर तक की समय सीमा तय रखता है. दिसंबर से लेकर 20 जनवरी तक बिहार में कड़ाके की ठंड थी, अब पारा ऊपर चढ़ रहा है, लेकिन विभाग अब तक कंबल वितरण का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाया है.

15 दिसंबर तक ही बांटना था कंबल

समाज कल्याण विभाग के वस्त्र वितरण कार्यक्रम के तहत भूमिहीन, गरीब, भीख मांगने वालों के बीच धोती, साड़ी, चादर और कंबल बांटे जाते हैं. पिछले साल जिलों को 5 करोड़ रुपये की राशि कपड़े बांटने के लिए दिए गए थे. इस राशि से 1 लाख 22 हजार 636 कंबल की खरीद हुई. इनमें 91 हजार 711 कंबल बांटे गए. 30 हजार 925 कंबल अब भी बांटने को बाकी हैं.

समाज कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव योगेश कुमार ने बताया कि इस योजना के तहत मार्च में ही जिलों को राशि भेज दी जाती है. ठंड की शुरुआत में ही कंबल बांटना होता है. 15 दिसंबर तक इसे बांटना होता है. बेगूसराय में इस बार टेंडर में कुछ तकनीकी दिक्कत हुई थी, लेकिन वहां भी 31 दिसंबर तक पूरा करना था.

विपक्ष ने उठाए सवाल

वहीं सहरसा से विधायक और आईआईपी के अध्यक्ष आईपी गुप्ता ने इस देरी पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार संवेदनहीन है. जब रात का पारा 5 डिग्री से नीचे था, तब गरीबों और भूमिहीनों को कंबल की आवश्यकता थी, लेकिन सरकार खुद कंबल ओढ़कर सो रही थी. 30 हजार कंबलों का न बंटना बताता है कि सरकार गरीबों को लेकर कितनी संवेदनहीन है. यही रफ्तार रही तो वे जून में कंबल बांटेंगे.

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