मां की अर्थी को कंधा देती लड़कियों के वायरल वीडियो के पीछे की कहानी! जमीन विवाद या समाज की विफलता?

वीडियो के वायरल होने के बाद छपरा और आसपास से नेताओं, समाजसेवियों का लड़कियों के घर पहुंचने का सिलसिला जारी है. गांव के लोग इससे नाराज हैं. पड़ोसी वीरेंद्र सिंह कहते हैं कि इससे गांव की बदनामी हो रही है.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
बिहार में बेटियों ने दिया मां की अर्थी को कंधा
ndtv
फटाफट पढ़ें
Summary is AI-generated, newsroom-reviewed
  • छपरा की दो बेटियों ने मां के अंतिम संस्कार में परिजनों और गांव वालों के न आने पर अर्थी को खुद कंधा दिया
  • बबीता देवी टीबी की मरीज थीं और उनका इलाज बेटी दिल्ली में नौकरी करने वाली बड़ी बेटी के खर्चे पर होता था
  • वीडियो वायरल होने के बाद नेताओं और समाजसेवियों का परिवार के घर आना शुरू हुआ, जिससे गांव के लोग नाराज हैं
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
पटना:

बिहार के छपरा में मां की अर्थी को कंधा देते दिख रही दो लड़कियों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अब उनके घर पर लोगों का तांता लगा हुआ है. 22 वर्षीय मौसम और 18 साल की रौशनी कहती हैं कि मां के अंतिम संस्कार में जाने के लिए सबको बुलाया, घर के लोग नहीं आए, गांव वालों ने भी किनारा कर लिया. रिश्ते के एक चाचा सत्येंद्र सिंह और उनके ननिहाल के लोग ही अंतिम संस्कार में पहुंचे. इसलिए उन्होंने ही मुखाग्नि भी दी. लेकिन श्राद्ध कर्म के लिए अपने चाचा से आग्रह किया, फिर भी वे नहीं आए. जब अर्थी को कंधा देने का वीडियो वायरल हुआ तब वे श्राद्ध के लिए तैयार हुए. 

जमीन विवाद के कारण अंतिम यात्रा में शामिल नहीं हुए परिजन!

मौसम ने बताया कि जुलाई 2024 में उनके पिता रविन्द्र सिंह का निधन हो गया था. इसके बाद से उनकी मां पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा अलग करने की मांग कर रही थी. लेकिन उनके चाचा इसके लिए तैयार नहीं हुए. इसलिए उनकी मां का भी अच्छे से इलाज नहीं हो पाया. बबीता देवी ने इस मामले में पुलिस ने शिकायत भी दर्ज कराई थी. इसके बाद अपने देवर से उनके संबंध अच्छे नहीं थे. मौसम कहती हैं कि इसीलिए वे लोग अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए. हालांकि मौसम के चाचा इन आरोपों से इंकार करते हैं. वे कहते हैं कि हम अहमदाबाद में थे. हमें जानकारी मिली तो हम आए. हमारे पास इतने पैसे नहीं थे कि हम फ्लाइट से आ जाते. दोनों लड़कियां झूठ बोल रही हैं. हम श्राद्ध कर्म भी कर रहे हैं. लेकिन आपसी विवाद के कारण यह वीडियो वायरल कराया गया है. इससे हमारी बदनामी हो रही है.

लोगों की भीड़ से परेशान गांव वाले

वीडियो वायरल होने के बाद छपरा और आसपास से नेताओं, समाजसेवियों का लड़कियों के घर पहुंचने का सिलसिला जारी है. गांव के लोग इससे नाराज हैं. पड़ोसी वीरेंद्र सिंह कहते हैं कि इससे गांव की बदनामी हो रही है. दोपहर के समय ज्यादातर लोग काम पर थे, लड़कियों ने आनन - फानन में अंतिम संस्कार कर दिया और अब लोगों को दूसरी कहानी बता रही हैं. हालांकि रौशनी और मौसम इससे इंकार करती हैं, वे कहती हैं कि हमारे परिवारवालों के दबाव में आकर गांव के लोग अंतिम संस्कार में नहीं गए. अब उन पर सवाल उठ रहा है तो वे हमें ही बदनाम कर रहे हैं. 

टीबी की मरीज थी बबीता देवी, बेटी करा रही थी इलाज

मौसम और रौशनी की मां बबीता देवी दो साल से अधिक से टीबी की मरीज थीं. बड़ी बेटी दिल्ली में नौकरी करती हैं, उन्हीं के खर्चे से बबीता का इलाज होता था. 17 जनवरी को उनकी तबियत ज्यादा बिगड़ी तो छोटी बेटी रौशनी उन्हें स्थानीय डॉक्टर के पास ले गईं. वहां से छपरा सदर अस्पताल और फिर PMCH. रौशनी ने बताया कि इलाज के दौरान भी कोई उनके साथ नहीं था. 20 जनवरी को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. दोपहर ढाई बजे वे बबीता देवी की लाश को लेकर अपने गांव आईं. लोगों से अंतिम संस्कार में शामिल होने को कहा. अपनी दादी, बुआ से भी कहा लेकिन कोई चलने को तैयार नहीं हुआ. तब साढ़े 5 बजे उन्होंने मां की अर्थी को कंधा दिया. 

यह भी पढ़ें: बिहार में गरीब होना इतना बड़ा गुनाह है? कोई न आया तो बेटियों ने उठाई अर्थी, तेरहवीं के पैसे के लिए भटक रहीं

यह भी पढ़ें: 10 मिनट की जुदाई… और थम गई दो ज़िंदगियां, पति की मौत का सदमा पत्नी न सह सकी, साथ उठी दोनों की अर्थी

Advertisement
Featured Video Of The Day
अजित की विरासत संभालेंगी सुनेत्राअब कैसी होगी महाराष्ट्र की सियासत?
Topics mentioned in this article