उपेन्द्र कुशवाहा के नाराज विधायकों के अगले कदम को लेकर सस्पेंस, बेटे को मंत्री बनाने से चल रहे खफा, दिल्ली में की बैठक

बिहार में एनडीए की सहयोगी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के तीन विधायकों ने बगावत का झंडा उठा रखा है. तीनों विधायक इस बात से नाराज हैं कि पार्टी अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने पार्टी विधायकों की बजाए अपने बेटे को बिहार सरकार में मंत्री पद दिलाया. इन विधायकों के मुताबिक कुशवाहा के इस कदम से पार्टी के नेता और कार्यकर्ता बेहद नाराज हैं.

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उपेंद्र कुशवाहा के बेटे को मंत्री बनाए जाने को लेकर अन्य विधायक खफा

पिछले साल नवंबर में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के चार उम्मीदवार चुनाव जीते थे. इनमें उपेन्द्र कुशवाहा की पत्नी भी शामिल हैं. हालांकि चुनाव के बाद कुशवाहा ने इन चारों विधायकों को छोड़ अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाने का फैसला किया.

बिहार में एनडीए की सहयोगी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के तीन विधायकों ने बगावत का झंडा उठा रखा है. तीनों विधायक इस बात से नाराज हैं कि पार्टी अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने पार्टी विधायकों की बजाए अपने बेटे को बिहार सरकार में मंत्री पद दिलाया. इन विधायकों के मुताबिक कुशवाहा के इस कदम से पार्टी के नेता और कार्यकर्ता बेहद नाराज हैं. इन तीन विधायकों में बाजपट्टी से विधायक रामेश्वर महतो, मधुबनी के विधायक माधव आनंद और दिनारा से विधायक आलोक कुमार सिंह शामिल हैं.

चार उम्मीदवारों ने जीता था चुनाव

पिछले साल नवंबर में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के चार उम्मीदवार चुनाव जीते थे. इनमें उपेन्द्र कुशवाहा की पत्नी भी शामिल हैं. हालांकि चुनाव के बाद कुशवाहा ने इन चारों विधायकों को छोड़ अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाने का फैसला किया. तभी से कुशवाहा की पत्नी को छोड़ बाकी तीनों विधायक नाराज चल रहे हैं और बगावती तेवर अपनाए हुए हैं. ऐसे में इन बागी विधायकों के अगले कदम को लेकर सस्पेंस बना हुआ है.

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बागी विधायकों ने दिल्ली में की बैठक

इसी सस्पेंस के बीच इन तीनों विधायकों ने बुधवार रात दिल्ली में एक बैठक की. बैठक में तीनों विधायकों के अलावा कुछ ऐसे नेता भी मौजूद थे जो कुछ दिनों पहले ही पार्टी छोड़ चुके हैं. बैठक में विधायकों के बीच क्या बात हुई , इसे लेकर किसी ने भी कुछ कहने से इनकार कर दिया. हालांकि पिछले कई दिनों से इन विधायकों के 

 बागी तेवर के चलते इस बैठक का महत्व काफी बढ़ गया है. वैसे सूत्रों की मानें तो तीनों विधायक तुरंत कोई कदम उठाएंगे इसकी संभावना कम दिख रही है. हो सकता है कि बिहार विधानसभा के अगले सत्र तक सभी विकल्पों को टटोलने के बाद कोई निर्णय लिया जाए.

'परिवारवाद के खिलाफ देते थे बयान'

कुछ दिनों पहले एनडीटीवी से बात करते हुए रामेश्वर महतो ने कहा था कि उपेन्द्र कुशवाहा खुद परिवारवाद के खिलाफ बातें करते थे लेकिन अपने बेटे को ही मंत्री बना दिया जबकि वो विधायक भी नहीं था. महतो के मुताबिक कुशवाहा के इस कदम से पार्टी कार्यकर्ताओं में निराशा और नाराजगी दोनों है. हालांकि पार्टी विधायक माधव आनंद ने दावा किया कि वो पार्टी में हैं और बने रहेंगे. आनंद ने ये भी कहा कि अगर कोई मुद्दा होगा तो उसपर पार्टी में चर्चा की जाएगी. माधव आनंद बिहार विधानसभा में राष्ट्रीय लोक मोर्चा विधायक दल के नेता हैं.

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बेटे को विधान परिषद भेजेंगे उपेन्द्र कुशवाहा  

पार्टी अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा का राज्यसभा का कार्यकाल इसी साल अप्रैल के महीने में खत्म हो रहा है. इसलिए माना जा रहा है कि उन्हें फिर से राज्यसभा में भेजा जाएगा या नहीं, ये इस बात पर निर्भर करेगा कि उनके विधायक पार्टी में बने रहते हैं या फिर कोई और रास्ता चुनते हैं. साथ ही, बिहार सरकार में मंत्री बनाए गए उनके बेटे दीपक प्रकाश को भी छह महीने के भीतर बिहार विधानसभा या विधान परिषद में से किसी एक सदन का सदस्य बनना जरूरी है तभी उनका मंत्रीपद बरकरार रह सकेगा. हालांकि सूत्रों के मुताबिक उनके बेटे को विधान परिषद का सदस्य बनाया जाना तय है.

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