- हाजीपुर सदर अस्पताल में सफाईकर्मी सुपरवाइजर और प्राइवेट एंबुलेंस चालक मरीजों का इलाज करते पाए गए थे.
- अस्पताल में डॉक्टरों की अनुपस्थिति में सीनियर नर्स मोबाइल में व्यस्त थी और इलाज कर्मियों का स्तर खराब दिखा.
- सफाईकर्मी सुपरवाइजर प्रभात और एंबुलेंस चालक संजय मरीजों को निजी अस्पताल में भर्ती कर मोटी रकम वसूलते हैं.
बिहार की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने का एक मामला वैशाली जिले के हाजीपुर सदर अस्पताल से सामने आया है. यहां सफाईकर्मियों का सुपरवाइजर और प्राइवेट एंबुलेंस चालक मरीजों का इलाज करता नजर आया. इस दौरान डॉक्टर नदारद थे, सीनियर नर्स मोबाइल में चैटिंग में बिजी थी. ऊपर तस्वीर में लाल स्वीटर में मरीज की जांच करता नजर आ रहा शख्स सफाइकर्मियों का सुपरवाइजर है, काले जैकेट में इंजेक्शन देता नजर आ रहा शख्स प्राइवेट एम्बुलेंस का ड्राइवर है. जबकि ड्यूटी पर तैनात सीनियर नर्स काउंटर पर बैठकर कर मोबाइल में चैटिंग करती नजर आई.
इस तस्वीर में लाल स्वीटर में मरीज का इलाज कर रहा ये शख्स सदर अस्पताल के आउटसोर्सस एजेंसी के सफाईकर्मी का सुपरवाइजर है, नाम प्रभात कुमार.
दूसरी तस्वीर में मरीज को इंजेक्शन लगाते नजर आ रहा शख्स प्राइवेट एम्बुलेंस चालक है, इसका नाम संजय है. संजय ने काला जैकेट पहन रखा है. बताया जाता है कि ये लोग अस्पताल में 24 घंटे नजर आते हैं. गंभीर मरीज को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करा कर मोटी रकम वसूलते हैं.
तीसरी तस्वीर में नजर आ रही मैडम का पुष्पा है, पुष्पा हाजीपुर सदर अस्पताल में GNM के पद पर तैनात हैं. वहां भर्री मरीजों का आरोप है कि जिस समय सफाईकर्मी का सुपरवाइजर और प्राइवेट एंबुलेंस ड्राइवर मरीजों का इलाज कर रहे थे, तब पुष्पा हाथों में मोबाइल लिए किसी से चैटिंग करती नजर आ रही थी.
मामला सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों ने क्या कहा?
इस मामले में वैशाली सिविल सर्जन श्याम नंदन प्रसाद सिंह ने बताया कि मीडिया के द्वारा हमें इस मामले की जानकारी मिली. मामले की जांच कराई जा रही है. जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी.
बाद में हाजीपुर सदर अस्पताल की उपधीक्षक डॉ. गुड़िया कुमारी ने बताया कि मामले में कार्रवाई करते हुए नर्स को तत्काल इमरजेंसी ड्यूटी से हटाया गया है. ड्राइवर, सफाई कर्मी पर 48 घंटे का शो कॉज नोटिस दिया गया है. जांच के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी.














