बिहार में पकड़ी गई अंग्रेजी शराब की मिनी फैक्ट्री, नदी किनारे बन रहा था नकली शराब

उत्पाद विभाग की टीम ने बुधवार (15 अप्रैल) को बड़ी कार्रवाई करते हुए मिनी फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया. यह फैक्ट्री सरबहदी और इटौरा गांव की सीमा पर कुंभरी नदी किनारे बने दो कमरों के एक सुनसान मकान में संचालित हो रही थी.

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नालंदा में शराब की मिनी फैक्ट्री
Bihar News:

बिहार में पूरी तरह से शराब बंदी है. लेकिन इसके बावजूद यहां शराब की तस्करी खूब हो रही है. दूसरे राज्यों से शराब आने के साथ-साथ कई जगहों पर शराब मिनी फैक्ट्री में बनाई जा रही है. पुलिस ने नालंदा में मानपुर थाना क्षेत्र में नकली और जानलेवा अंग्रेजी शराब बनाने वाली मिनी फैक्ट्री को पकड़ा है. उत्पाद विभाग की टीम ने बुधवार (15 अप्रैल) को बड़ी कार्रवाई करते हुए मिनी फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया. यह फैक्ट्री सरबहदी और इटौरा गांव की सीमा पर कुंभरी नदी किनारे बने दो कमरों के एक सुनसान मकान में संचालित हो रही थी.

उत्पाद विभाग को इस मिनी फैक्ट्री के बारे में गुप्त सूचना मिली थी. जिसके आधार पर की गई छापेमारी में भारी मात्रा में नकली शराब और उससे जुड़े उपकरण बरामद किए गए.

शराब बनाने से लेकर पैकिंग तक के सारे सामान

छापेमारी के दौरान टीम ने मौके से 140 लीटर स्प्रीट, 50 लीटर तैयार शराब (10 लीटर के 5 गैलन में), 188 बोतल बोतलबंद शराब (करीब 141 लीटर), 70 खाली बोतलें, 2 बॉटलिंग मशीन, 1 कैपिंग मशीन, आरएस ब्रांड के लेबल, करीब 2 किलोग्राम स्टिकर/होलोग्राम, 322 ढक्कन, 2 हाइड्रोमीटर, मापने के लिए फ्लास्क (एक छोटा और एक बड़ा) तथा लगभग 300 एमएल कलरिंग एजेंट बरामद किया. इससे स्पष्ट है कि यहां बड़े पैमाने पर नकली शराब का निर्माण और पैकेजिंग की जा रही थी.

उत्पाद अधीक्षक लाला अजय कुमार सुमन ने बताया कि यह पूरी कार्रवाई गुप्त सूचना के आधार पर की गई. उन्होंने कहा कि नकली शराब बेहद खतरनाक होती है और इससे लोगों की जान जा सकती है. बरामद शराब को जांच के लिए भेजा जा रहा है. वहीं, फैक्ट्री संचालक की पहचान कर ली गई है और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है. मौके पर मौजूद कमरे को सील कर दिया गया है.

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गौरतलब है कि जिले में पहले भी जहरीली शराब से एक दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है. इसके बावजूद इस तरह की अवैध गतिविधियों का जारी रहना प्रशासन के लिए चिंता का विषय है. स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, नदी किनारे यह धंधा लंबे समय से चल रहा था, लेकिन मानपुर थाना पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी. इस खुलासे के बाद पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं.

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