सरकार और रेलवे के सैकड़ों नियमों के बाद भी रेल टिकट की कालाबाजारी, काउंटर पर वेटिंग... एजेंट के पास कंफर्म

गया में रेलवे टिकट रिजर्वेशन को लेकर बड़ा खेल सामने आया है. जहां आम यात्रियों को काउंटर और ऑनलाइन टिकट के लिए संघर्ष करना पड़ता है, वहीं निजी टूर एंड ट्रेवल्स कारोबारी मोटी रकम लेकर कंफर्म टिकट देने का दावा कर रहे हैं. (गया से रंजन सिन्हा की रिपोर्ट)

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कंफर्म टिकट का दावा
Bihar News:

रेल टिकट की कालाबाजारी को रोकने के लिए सरकार द्वारा लगातार सख्त नियम लागू करने की बात की जाती है. हाल में सरकार ने टिकट की कालाबाजारी को रोकने के लिए ही प्री-रिजर्वेशन टिकट बुकिंग की टाइमिंग 60 दिन की है, जबकि पहले 90 दिन था. इसके अलावा रेलवे ने टिकट कैंसिलेशन के नियमों में भी बदलाव किया है, जिसमें अब टिकट कैंसिलेशन में देरी करने पर अधिक पैसे काटे जाने की शर्त रखी है. इसके बावजूद रेल टिकट की कालाबाजारी अब भी जारी है. ताजा मामला बिहार के गया जिले से आया है.

गया में रेलवे टिकट रिजर्वेशन को लेकर बड़ा खेल सामने आया है. जहां आम यात्रियों को काउंटर और ऑनलाइन टिकट के लिए संघर्ष करना पड़ता है, वहीं निजी टूर एंड ट्रेवल्स कारोबारी मोटी रकम लेकर कंफर्म टिकट देने का दावा कर रहे हैं.

ट्रेवल्स नेटवर्क से कंफर्म टिकट

गया शहर में रेलवे टिकट रिजर्वेशन को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. आम यात्री जब रेलवे काउंटर पर टिकट लेने पहुंचते हैं तो उन्हें अक्सर वेटिंग या नो रूम की स्थिति बता दी जाती है. यहां तक कि तत्काल टिकट भी आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाता. लेकिन इसी बीच निजी टूर एंड ट्रेवल्स कारोबारियों का एक ऐसा नेटवर्क सामने आया है, जो मोटी रकम लेकर कंफर्म टिकट देने की गारंटी दे रहा है.

दोगुनी कीमत पर टिकट उपलब्ध

एक स्टिंग ऑपरेशन के दौरान यह खुलासा हुआ कि गया रेलवे स्टेशन के आसपास स्थित कई टूर एंड ट्रेवल्स एजेंसियां खुलेआम दोगुनी कीमत लेकर टिकट उपलब्ध करा रही हैं. सुर्या टूर एंड ट्रेवल्स नामक एजेंसी से जब 18 अप्रैल 2026 को राजधानी एक्सप्रेस में गया से दिल्ली तक थर्ड एसी का टिकट बुक करने की बात की गई, तो एजेंट ने साफ तौर पर 4500 रुपये की मांग की. जबकि इस टिकट की वास्तविक कीमत लगभग 2200 रुपये है.

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यही नहीं, सिंह टूर एंड ट्रेवल्स और शुभम टूर एंड ट्रेवल्स के संचालकों ने भी अलग-अलग ट्रेनों में कंफर्म टिकट दिलाने का दावा किया. हालांकि इसके लिए उन्होंने भी यात्रियों से दोगुना पैसा देने की शर्त रखी.

इस पूरे मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर जब रेलवे काउंटर और आधिकारिक सिस्टम पर टिकट उपलब्ध नहीं है, तो एजेंटों के पास कंफर्म टिकट कैसे पहुंच रहे हैं? क्या यह रेलवे सिस्टम में किसी बड़े सिंडिकेट की ओर इशारा करता है? स्थानीय लोगों का कहना है कि यह खेल लंबे समय से चल रहा है, लेकिन अब जाकर इसका खुलासा हुआ है.

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