बोधगया में भूटान से आए तिब्बती बौद्ध भिक्षुओं ने किया मास्क डांस, जानें क्यों खास है ये परंपरा

बोधगया के ड्रुक थूपतेंन छोलिंग शाब्दुंग बौद्ध मॉनेस्ट्री में तीन दिवसीय मास्क डांस की शुरुआत हुई. (एनडीटीवी के लिए रंजन सिन्हा की रिपोर्ट)

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  • बोधगया के जानपुर स्थित ड्रुक थूपतेंन छोलिंग शाब्दुंग बौद्ध मॉनेस्ट्री में तीन दिवसीय मास्क डांस का आयोजन
  • बौद्ध लामाओं ने पारंपरिक वेशभूषा और वाद्ययंत्रों के साथ इच्छा और क्रोध जैसी नकारात्मक भावनाओं को रौंदा
  • भूटान की संस्कृति में मास्क डांस का विशेष स्थान है और इसे देखने मात्र से पाप नष्ट होने की मान्यता है
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बोधगया:

बोधगया के जानपुर स्थित ड्रुक थूपतेंन छोलिंग शाब्दुंग बौद्ध मॉनेस्ट्री में रविवार से तीन दिवसीय मास्क डांस की शुरुआत हुई. जहां पर तमाम बौद्ध लामाओं और भिक्षुओं ने पारंपरिक वेशभूषा और वाद्ययंत्रों के साथ यह डांस किया. इस दौरान उन्होंने इच्छा और क्रोध जैसी नकारात्मक भावनाओं को रौंदते हुए नृत्य प्रस्तुत किया.

भूटान की संस्कृति में मास्क डांस का महत्व

भूटान की संस्कृति में मास्क डांस का विशेष स्थान है. ऐसी मान्यता है कि इस नृत्य को देखने मात्र से पाप नष्ट हो जाते हैं और सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं. आपको बता दें कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और ज्यादातर भूटान में देखने को मिलती है.

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तांत्रिक अनुष्ठान और आध्यात्मिक चेतना

भूटान बौद्ध मंदिर के प्रभारी सोनम दोरजी ने बताया कि 7वीं शताब्दी में गुरु पद्म संभव ने वज्रयान की स्थापना की थी, जिसे तिब्बत और हिमालयी क्षेत्रों में प्रचलित किया गया. बौद्ध श्रद्धालु उन्हें दूसरा बुद्ध मानते हैं. तीन दिनों तक तांत्रिक अनुष्ठान के साथ यह मास्क डांस किया जाएगा, जिससे आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है.

मुखौटा पहनने का उद्देश्य

मुखौटा पहनने का उद्देश्य यह है कि मानव विकृत रूपों से न डरे, बल्कि आत्मविश्वास जागृत करे। यह नृत्य बुरी आत्माओं को दूर करने और शत्रुओं को पराजित करने के उद्देश्य से किया जाता है.

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भूटान की अनूठी परंपरा

भूटान का यह महत्वपूर्ण मास्क डांस सिर्फ इसी बौद्ध मॉनेस्ट्री में आयोजित किया जाता है. इसे देखने के लिए हिमालयी क्षेत्रों सहित विभिन्न स्थानों से बौद्ध भिक्षु और श्रद्धालु बोधगया पहुंचते हैं. इसका आयोजन भूटानी कैलेंडर के अनुसार निर्धारित तिथि पर किया जाता है.

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