- बिहार में लगातार बढ़ती आपराधिक घटनाओं और पुलिस पर हमलों के कारण कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं
- सोनू-मोनू गैंग के अपराधियों द्वारा पुलिस टीम की तलाशी लेने की घटना ने पुलिस की कार्यशैली पर संदेह पैदा किया है
- विपक्ष का आरोप है कि सरकार केवल सख्त बयानबाजी करती है जबकि अपराधियों का मनोबल और हमले बढ़ रहे हैं
बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर राजनीति तेज हो गई है. राज्य में लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं और पुलिस टीमों पर हमलों के बाद विपक्ष सरकार को घेरने में जुट गया है. दूसरी तरफ सरकार और पुलिस प्रशासन अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और एनकाउंटर के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि बिहार में कानून का राज कायम है. लेकिन बीते दो दिनों में हुई कुछ घटनाओं ने पुलिस की कार्यशैली और कानून-व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
क्यों उठ रहे हैं सवाल?
सबसे ज्यादा चर्चा सोनू-मोनू गैंग की घटना को लेकर हो रही है. बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान इस गैंग के अपराधियों ने पुलिस टीम की ही तलाशी ले ली. इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस की तैयारी और काम करने के तरीके पर सवाल उठने लगे. विपक्ष ने इसे बिहार पुलिस की कमजोर होती साख से जोड़ते हुए सरकार पर हमला बोला है.
इसके अलावा बेतिया और सुपौल में पुलिस टीम पर हुए हमलों ने भी सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. बेतिया में छापेमारी करने गई पुलिस टीम पर हमला हुआ, जबकि सुपौल में भी पुलिस पर हमले की घटना सामने आई. इन घटनाओं के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर अपराधियों के मन से पुलिस का डर कितना खत्म हो चुका है?
राजनीतिक तौर पर यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सरकार बनने के बाद से कानून-व्यवस्था को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में बताते रहे हैं. सरकार लगातार अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई, गिरफ्तारी और एनकाउंटर को अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश करती रही है. भाजपा और NDA नेताओं का कहना है कि राज्य में अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है.
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विपक्ष उठा रहा है सवाल
लेकिन अब विपक्ष सवाल उठा रहा है कि अगर कानून-व्यवस्था इतनी मजबूत है तो पुलिस टीमों पर लगातार हमले क्यों हो रहे हैं? RJD और दूसरे विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार सिर्फ एनकाउंटर और सख्त बयानबाजी के जरिए माहौल बनाने की कोशिश कर रही है, जबकि जमीन पर अपराधियों का मनोबल बढ़ा हुआ दिखाई दे रहा है. विपक्ष का आरोप है कि बिहार में अपराध, रंगदारी और पुलिस पर हमले की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में कानून-व्यवस्था हमेशा से बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है. लालू यादव के दौर में 'जंगलराज बनाम सुशासन की राजनीति' लंबे समय तक चली. बाद में नीतीश कुमार ने कानून-व्यवस्था को अपनी सबसे बड़ी ताकत के रूप में पेश किया. अब सम्राट सरकार भी इसी मुद्दे पर अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रही है. ऐसे में पुलिस पर सवाल उठना सरकार की छवि के लिए चुनौती माना जा रहा है.
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सरकार क्या कर रही है?
सूत्रों के मुताबिक सरकार ने हाल की घटनाओं को गंभीरता से लिया है. पुलिस मुख्यालय की तरफ से कई जिलों में अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने और पुलिस टीमों की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं. पुलिस अधिकारियों से यह भी कहा गया है कि कार्रवाई के दौरान पूरी तैयारी के साथ ऑपरेशन चलाए जाएं.
हालांकि सरकार का कहना है कि कुछ घटनाओं के आधार पर पूरी कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाना गलत है. सरकार का दावा है कि बिहार पुलिस लगातार अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है और कई बड़े गैंग पर दबाव बनाया गया है.
लेकिन इतना साफ है कि आने वाले दिनों में बिहार में कानून-व्यवस्था बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने वाला है. विपक्ष इस मुद्दे को लगातार उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा, जबकि सरकार सख्त पुलिसिंग के जरिए अपनी कानून का राज वाली छवि मजबूत करने में जुटी रहेगी.
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