सैलरी देने के पैसे भी नहीं रहेंगे... बिहार विनियोग विधेयक विधानसभा से पास, विपक्ष ने सरकार को घेरा

Bihar News: वित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने आज भी कहा कि इस बजट में औद्योगीकरण पर फोकस किया गया है. वह बजट में दिखाई देता है. उद्योग विभाग का बजट पिछली बार के मुकाबले बढ़ा है. पिछले साल विभाग का बजट 1966 करोड़ रुपया था, यह इस बार 3337 करोड़ हो गया है.

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बिहार विनियोग विधेयक विधानसभा से पास.
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  • बिहार विनियोग विधेयक पास हो गया. सरकार को 3 लाख 47 हजार करोड़ से अधिक की राशि खर्च की अनुमति मिली
  • विपक्ष ने वित्तीय कुप्रबंधन और ट्रेजरी बंद रहने को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं
  • वित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने बजट वृद्धि और राज्य में रोजगार और विकास कार्यों का समर्थन किया
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पटना:

बिहार विधानसभा में आज मजदूरों को मेहनताना नहीं मिलने, विभागों की बजट कटौती, ठेकेदारों के भुगतान न होने का मुद्दा गूंजा. विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए कहा कि यह स्थिति रही तो सरकार के पास सैलरी देने के पैसे भी नहीं रहेंगे. दरअसल, सोमवार को बिहार विधानसभा से बिहार विनियोग विधेयक पास हो गया इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 3 लाख 47 हजार करोड़ से अधिक की राशि खर्च की अनुमति सरकार को मिल गई. 

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RJD का आरोप- ट्रेजरी बंद, फंड रुका

विधेयक पर चर्चा के दौरान राजद की तरफ से कुमार सर्वजीत ने कहा की 20 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है जब एक महीने से ट्रेजरी बंद है सरकार के पास पैसे नहीं है. सरकारी काम में लगे कंस्ट्रक्शन कंपनियों को पैसा नहीं मिल रहा है मजदूरों का पैसा रोक दिया गया है. सरकार न्याय के साथ विकास की बात करती है लेकिन अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग के बजट में कटौती कर दी गई है. सरकार वित्तीय कुप्रबंधन का शिकार है, राजकोषीय घाटा बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार इन पहलुओं पर ध्यान दे तभी यह अनुमति मांगने का कोई मतलब है.

रोड, बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन का बजट घटा

इस बार के बिहार बजट पर चुनावी वादों का असर दिखाई दे रहा है. महिलाओं को दो लाख रुपये देने, 125 यूनिट फ्री बिजली और रोजगार सृजन के लिए विभागों का बजट बढ़ा है. ग्रामीण विकास विभाग, ऊर्जा, शहरी विकास और उद्योग विभाग के बजट में वृद्धि हुई है. इन विभागों के बजट में बढ़ोतरी के कारण कई विभागों के बजट में कटौती हुई है. स्वास्थ्य, कृषि, आपदा प्रबंधन, जल संसाधन, समाज कल्याण विभाग समेत 32 विभागों के बजट में कटौती की गई है. इन सभी विभागों की हिस्सेदारी कम हुई है. बजट से साफ है कि इस बार सड़क और भवन निर्माण की गति में ब्रेक लगेगा.

मौजूदा बजट में भवन निर्माण विभाग का बजट 6153 करोड़ है, जबकि पिछले बजट में यह 6894 करोड़ था. विभाग की हिस्सेदारी 2.18% थी जो अब घटकर 1.77% हो  गई है. वहीं पथ निर्माण विभाग का बजट पिछली बार के मुकाबले बढ़ा है, लेकिन बजट में हिस्सेदारी कम हुई है. पिछले बजट में विभाग की हिस्सेदारी 2.15% थी, वह अब घटकर 2.13% हो गई है. समाज कल्याण विभाग का बजट पिछले साल 8774 करोड़ था, इस बार यह बजट 8470 करोड़ हो गया है. इसके अलावा अनुसूचित जाति - जनजाति कल्याण विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, पिछड़ा - अत्यंत पिछड़ा कल्याण विभाग के बजट में भी कमी आई है. इन्ही सवालों को विपक्ष ने अपने भाषण में उठाया था.

फ्री बिजली, औद्योगीकरण के लिए विभाग का बजट बढ़ा

मुख्यमंत्री महिला रोजगार का असर इस बजट पर दिख रहा है. इस योजना के संचालन का संचालन कर रहे ग्रामीण विकास विभाग के बजट में भारी इजाफा हुआ है. पिछली बार इस विभाग का बजट 16 हजार 93 करोड़ था जो इस बार बढ़कर 23 घर 71 करोड़ हो गया है. पिछले बजट में इस विभाग की हिस्सेदारी 5.08% थी जो इस बार बढ़कर 6.82% हो गई है.

वित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने आज भी कहा कि इस बजट में औद्योगीकरण पर फोकस किया गया है. वह बजट में दिखाई देता है. उद्योग विभाग का बजट पिछली बार के मुकाबले बढ़ा है. पिछले साल विभाग का बजट 1966 करोड़ रुपया था, यह इस बार 3337 करोड़ हो गया है. पिछले बजट में उद्योग विभाग की हिस्सेदारी 0.62% थी, इस बार यह बढ़कर .96% हो गई है. 125 यूनिट फ्री बिजली और ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहे नवाचारों का असर बजट पर दिखा है. ऊर्जा क्षेत्र का बजट पिछली बार 13 हजार 484 करोड़ था, इस बार यह बढ़कर 18 हजार 737 करोड़ हो गई है. बजट में हिस्सेदारी 4.26% से बढ़कर 5.39% हो गई है.
 

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