Chandranath Rath Murder Case: पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पर्सनल असिस्टेंट (PA) चंद्रनाथ रथ की 6 मई की रात गोली मारकर हत्या के मामले ने बंगाल और बिहार के बीच अपराधियों की निर्बाध आवाजाही और गहरे गठजोड़ को एक बार फिर उजागर कर दिया है. चंद्रनाथ रथ शुभेंदु अधिकारी के लंबे समय से करीबी सहयोगी रहे थे और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते थे. इस मामले में बंगाल STF की जांच बिहार के बक्सर तक पहुंची, जहां से दो युवकों को गिरफ्तार किया गया. इस हाई-प्रोफाइल मामले में तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर बक्सर के विभिन्न थाना क्षेत्रों में छापेमारी की गई. बक्सर एसपी शुभम आर्य ने बताया कि दो लोगों की गिरफ्तारी हुई है. हालांकि उन्होंने जांच की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए विस्तृत जानकारी देने से परहेज किया.
चंद्रनाथ मर्डर केस में गिरफ्तार बिहार का एक आरोपी 18 तो एक 17 साल का
बंगाल STF डुमरांव थाना क्षेत्र के हरदी चट्टी के मयंक मिश्रा (18) और सिकरौल थाना क्षेत्र के विक्की मौर्य (17) को हिरासत में लेकर पूछताछ के बाद पश्चिम बंगाल ले गई है. इन दोनों को नॉर्थ 24 परगना के बारासात कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने 13 दिन की पुलिस रिमांड दी. बक्सर के कुख्यात अपराधी विशाल श्रीवास्तव से भी पूछताछ हुई, हालांकि प्रत्यक्ष संलिप्तता न पाए जाने पर उसे छोड़ दिया गया. इस पूरे अभियान में बंगाल पुलिस को स्थानीय सहायता मिली.
क्या कहते हैं परिजन
विक्की मौर्य के पिता गौतम कुमार सिंह मेडिकल स्टोर चलाते हैं. उन्होंने बताया कि बेटा मुंबई में काम करता था तथा कुछ दिन की छुट्टी में घर आया था. घटना वाली रात वह घर पर ही था. कुछ दिनों पहले यह कहकर निकला था कि वह वापस काम करने जा रहा है. पुलिस ने उसे कहाँ से गिरफ्तार किया इसकी जानकारी उन्हें नहीं है. उन्होंने बताया कि मुझे और मेरे बड़े बेटे को भी पूछताछ के लिए 30 घंटे थाने में रखा गया लेकिन मामला क्या है यह नहीं बताया जा रहा. वही उसकी मां ने रोते हुए कहा कि उनका बेटा निर्दोष है और किसी ने उसे फंसाया है. मुंबई में उसकी तबीयत ठीक नहीं थी इसीलिए मैंने उसे घर बुलाया था.
मामले में यूपी के अयोध्या से एक शार्प शूटर राज सिंह की गिरफ्तारी भी हुई, जो बक्सर में सक्रिय रहता था. हत्या में इस्तेमाल की गई बाइक दमदम इलाके से चोरी हुई थी और घटनास्थल के पास बरामद हुई. ग्लॉक 47X पिस्तौल जैसे आधुनिक हथियार का इस्तेमाल इस बात का संकेत है कि हत्याकांड में पेशेवर और संगठित तत्व शामिल थे.
बिहार-बंगाल का क्राइम रूट
बक्सर-भोजपुर बेल्ट के अपराधी बंगाल में बड़े अपराधों के लिए हायर किए जाते हैं, जबकि बंगाल में अपराध करके वे बिहार के इन इलाकों में सुरक्षित ठिकाने बना लेते हैं. इसी तरह बिहार के अपराधी बंगाल के कोलकाता, न्यूटाउन या पुरुलिया जैसे क्षेत्रों में गेस्ट हाउस या किराए के फ्लैट लेकर छिप जाते हैं.
पिछले मामलों में भी यही ट्रैक दिखा है. बांकुड़ा जिले में एक करोड़पति व्यवसायी के अपहरण का मोस्टवांटेड सरगना दिलीप राय बक्सर के कोरानसराय का रहने वाला था. बंगाल और बक्सर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में उसे पकड़ा गया था. गिरोह बंगाल में अपहरण कर बिहार में शरण लेने का रणनीति अपनाता था.
हथियार तस्करी का रूट भी दोनों राज्यों को जोड़ता है
बक्सर का बंगाल-बिहार बॉर्डर से निकटता, ट्रेन और सड़क मार्गों की सुविधा तथा पुराना आपराधिक इतिहास इन राज्यों के बीच अपराधियों के गठजोड़ को मजबूत बनाता है. फरार अपराधी एक राज्य से दूसरे में आसानी से शिफ्ट हो जाते हैं. हथियार तस्करी का रूट भी इन दोनों राज्यों को जोड़ता है. कोलकाता में चुनाव से पहले बिहार के नालंदा से लाए गए अवैध हथियारों का जखीरा बरामद हुआ था.
बक्सर-भोजपुर बेल्ट से बंगाल पहुंचता है हथियार
बक्सर-भोजपुर बेल्ट को बंगाल में इस्तेमाल होने वाले आधुनिक हथियारों का प्रमुख स्रोत माना जाता है. अपराधियों की यह आवाजाही जेलों के अंदर से भी संचालित होती है. इसमें पुरुलिया जेल, बेऊर जेल, भागलपुर जेल में बंद गैंगस्टर की अहम भूमिका रहती है. जिसमें कुख्यात चंदन-शेरू की जोड़ी में शामिल शेरू सिंह का नाम भी आता है. बंगाल STF और बिहार STF अब संयुक्त ऑपरेशन और SIT के जरिए इन नेटवर्क को तोड़ने का प्रयास कर रही हैं.
बताते चले कि चंदन मिश्रा और शेरू सिंह पहले साथ काम करते थे, लेकिन बाद में वर्चस्व और लूट के माल बंटवारे को लेकर दुश्मनी हो गई. जिसके बाद शेरू ने अपने गुर्गे को सुपारी देकर चंदन मिश्रा की हत्या करवा दी थी. इस घटना का कनेक्शन भी पुरुलिया जेल से जुड़ा था.
शुभेंदु पीए मर्डर केस से दोनों राज्यों का अपराधिक गठजोड़ फिर चर्चा में
शुभेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ हत्याकांड ने इस अंतरराज्यीय आपराधिक गठजोड़ को केंद्र में ला दिया है. जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों और तकनीकी जानकारी के आधार पर पूरे नेटवर्क को खंगाल रही हैं. दोनों राज्यों के बीच अपराधियों की यह निर्बाध आवाजाही और जेल-आधारित साजिशें सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गई हैं.
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