भारत में 14 मार्च को राष्ट्रीय लोक अदालत (National Lok Adalat) का आयोजन हो रहा है. इस दिन लंबे समय से पेंडिंग पड़े ट्रैफिक चालानों को निपटाने का एक अच्छा मौका मिलेगा. इस विशेष अदालत में छोटे ट्रैफिक मामलों को जल्दी और आसान तरीके से सुलझाया जाएगा. सामान्य अदालतों में जहां किसी केस को निपटाने में लंबा समय लग सकता है. वहीं, लोक अदालत में कई मामलों का निपटारा एक ही दिन में हो जाता है.
राष्ट्रीय लोक अदालत क्या होती है?
लोक अदालतें, नेशनल लीगल सर्विस अथॉरिटी और राज्य की लीगल सर्विस अथॉरिटीज के तहत आयोजित की जाती हैं. इन अदालतों का मुख्य उद्देश्य छोटे विवादों और मामलों का आपसी सहमति से सुलझाना होता है. जब कोई व्यक्ति लोक अदालत में अपने मामले को लेकर आता है, तो वहां एक बेंच उस मामले की समीक्षा करती है. इस बेंच में आमतौर पर एक लीगल ऑफिसर और लीगल सर्विस अथॉरिटी का प्रतिनिधि शामिल होता है. अगर दोनों पक्ष समझौते के लिए तैयार हो जाते हैं तो उसी दिन चालान का मामला खत्म कर दिया जाता है.
ट्रैफिक चालान चेक करने का तरीका
लोक अदालत में जाने से पहले यह जानना जरूरी है कि आपके वाहन पर कोई चालान लंबित है या नहीं. इसके लिए आप ऑफिशियल वेबसाइट या पोर्टल पर जाकर चेक करें. भारत में ट्रैफिक चालान चेक करने के लिए Parivahan e-Challan Portal का इस्तेमाल किया जाता है. यहां आपको अपनी गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर, ड्राइविंग लाइसेंस नंबर या चालान नंबर दर्ज करना होता है. इसके बाद सिस्टम आपको उन सभी चालानों की सूची दिखा देता है जो अभी तक भुगतान नहीं किए गए हैं. यह भी जांचना जरूरी होता है कि कौन-से चालान लोक अदालत में सेटलमेंट के लिए योग्य हैं.
लोक अदालत में आम तौर पर छोटे और कंपाउंडेबल ट्रैफिक मामलों को लिया जाता है. जैसे हेलमेट या सीट बेल्ट के बिना गाड़ी चलाना, तेज गति से वाहन चलाना, ट्रैफिक सिग्नल तोड़ना, गलत जगह पार्किंग करना, नंबर प्लेट की समस्या, PUC सर्टिफिकेट न होना या ट्रैफिक संकेतों की अनदेखी करना. हालांकि कुछ गंभीर मामलों को लोक अदालत में नहीं लिया जाता जैसे शराब पीकर गाड़ी चलाना, हिट एंड रन जैसे मामले या दूसरे राज्य में जारी चालान. इसके अलावा जो केस पहले से नियमित अदालत में चल रहे हैं, उन्हें भी यहां शामिल नहीं किया जाता.
लोक अदालत में रजिस्ट्रेशन कैसे करें?
आपका चालान लोक अदालत के लिए योग्य है, तो आपको पहले से रजिस्ट्रेशन करना होगा. इसके लिए ट्रैफिक पुलिस या लीगल सर्विस अथॉरिटी की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन करना पड़ता है. वहां लोक अदालत रजिस्ट्रेशन ऑप्शन चुनकर गाड़ी से जुड़ी जानकारी, चालान नंबर आदि भरना होता है.
फॉर्म जमा करने के बाद आपको एक कन्फर्मेशन स्लिप या टोकन मिलता है. आमतौर पर लोक अदालत में सीधे जाकर रजिस्ट्रेशन नहीं किया जा सकता, इसलिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना जरूरी होता है.
लोक अदालत क्या लेकर जाएं?
14 मार्च को लोक अदालत के दिन जिन लोगों ने रजिस्ट्रेशन किया है, उन्हें अपने निर्धारित कोर्ट परिसर में जाना होगा. वहां उन्हें कुछ जरूरी डाक्यूमेंट्स साथ लेकर जाने होंगे. इनमें गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, ड्राइविंग लाइसेंस, इंश्योरेंस पेपर, PUC सर्टिफिकेट और चालान से जुड़ी जानकारी शामिल होती है.
जब आप वहां पहुंचते हैं तो लोक अदालत की बेंच आपके मामले की समीक्षा करती है और फिर सेटलमेंट राशि तय करती है. जब दोनों पक्ष समझौते पर सहमत हो जाते हैं और तय किया गया जुर्माना जमा कर दिया जाता है, तो चालान को आधिकारिक सिस्टम में निपटाया हुआ माना जाता है. इसके बाद उस चालान से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया समाप्त हो जाती है.














