इस गांव का नाम सुनते ही शर्म से हो जाएंगे पानी-पानी, फेसबुक पर लिखा तो हो जाएंगे ब्लॉक, गांव वाले हैं परेशान

नाम ऐसा कि सुनते ही शरमा जाए...स्वीडन का एक शांत सा गांव सोशल मीडिया की सेंसरशिप में फंस गया है. गांव वाले न गर्व से नाम लिख पा रहे हैं, न पहचान बता पा रहे हैं. अब इतिहास और आज के इंटरनेट जमाने के बीच गांव अपना नाम बदलवाने की जद्दोजहद में जुटा है.

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मत लिखना इस गांव का नाम...नहीं तो फेसबुक कर देगा आपको ब्लॉक

Funny Village Name: हर किसी के लिए अपने गांव का नाम शान होता है. सोशल मीडिया पर लोग बड़े फख्र से लिखते हैं, 'हम फलां गांव से हैं'. मगर जरा सोचिए, अगर गांव का नाम लिखते ही फेसबुक आपको ब्लॉक कर दे तो? यही अजीब दिक्कत झेल रहा है स्वीडन का एक छोटा सा गांव, जहां लोग अपने गांव से प्यार तो करते हैं, मगर उसका नाम लिखने से डरते हैं. वजह कोई अफवाह नहीं, बल्कि ऐसा नाम जो इंटरनेट की नजर में 'अश्लील' बन चुका है. अब गांव वाले इतिहास और इंटरनेट के बीच फंसी अपनी पहचान बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं.

गांव का नाम ही बन गया मुसीबत (Village Name Becomes a Problem)

किसी भी इंसान के लिए उसका गांव उसकी पहचान होता है. लोग सोशल मीडिया पर बड़े फख्र से अपने गांव का नाम लिखते हैं, लेकिन स्वीडन के एक गांव के लोग ऐसा नहीं कर पाते. वजह है सोशल मीडिया सेंसरशिप. गांव का नाम लिखते ही फेसबुक एल्गोरिदम उसे आपत्तिजनक मान लेता है और पोस्ट या अकाउंट ब्लॉक हो जाता है. स्वीडन के इस छोटे से गांव का नाम 'Fucke' और ये ऐतिहासिक तौर पर दर्ज है.

नाम बदलने की मांग और सरकारी अड़चन (Swedan fucke village)

डेली स्टार और दूसरे यूरोपीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गांव में सिर्फ 11 घर हैं. यहां रहने वाले लोग कहते हैं कि गांव में न मौसम की दिक्कत है न सुविधाओं की, मगर नाम की वजह से शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है. व्यापार का विज्ञापन हो या घर का पता, सोशल मीडिया पर कुछ भी डालना मुश्किल हो जाता है. ग्रामीण चाहते हैं कि गांव का नाम बदलकर Dalsro रखा जाए, जिसका मतलब है शांत घाटी, लेकिन समस्या यह है कि यह नाम सैकड़ों साल पुराना और ऐतिहासिक रिकॉर्ड में दर्ज है. स्वीडन का नेशनल लैंड सर्वे विभाग पहले भी ऐसे मामलों में नाम बदलने से इनकार कर चुका है.

Photo Credit: dailymail

गांववाले क्यों चाहते हैं नाम बदलना (Facebook block village name)

ग्रामीण बताते हैं कि जैसे ही वे फेसबुक या अन्य प्लेटफॉर्म पर अपने गांव का नाम लिखने की कोशिश करते हैं, वह ऑब्जेक्टनैस/अश्लील शब्द समझकर सेंसर हो जाता है या पोस्ट हट जाती है. इससे उन्हें अपने गांव का नाम गर्व से शेयर करना मुश्किल हो रहा है. स्थानीय प्रशासन और सांस्कृतिक विभाग भी अब नाम परिवर्त्तन पर विचार कर रहे हैं, लेकिन यह नियमों और इतिहास की वजह से आसान नहीं है. बदलाव के लिए ठोस कारण साबित करना जरूरी होगा और समय लग सकता है.

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सोशल मीडिया से परेशान गांव वाले (weird village names)

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गांव का नाम बदलने पर अब तक कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है. प्रशासन, हेरिटेज बोर्ड और भाषा संस्थान इस मामले पर विचार कर रहे हैं, फिलहाल गांव वाले अपना अभियान जारी रखे हुए हैं और सोशल मीडिया पर नाम लिखने से बच रहे हैं. एक नाम जो कभी इतिहास से जुड़ा था, आज सोशल मीडिया सेंसरशिप के कारण ग्रामीणों के लिए शर्मिंदगी और परेशानी का कारण बन गया है. 

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