Surya Grahan 2026: साल का पहला सूर्य ग्रहण आज! टोटल से हाइब्रिड तक समझिए 4 प्रकार के Solar Eclipse

Solar Eclipse 2026:17 फरवरी 2026 को साल का पहला वलयाकार सूर्य ग्रहण यानी ‘रिंग ऑफ फायर’ लगेगा. जानिए सूर्य ग्रहण क्या होता है और इसके टोटल, एन्युलर, पार्शियल और हाइब्रिड चारों प्रकारों के बारे में.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
सूर्य ग्रहण के 4 रूप, लेकिन ‘रिंग ऑफ फायर’ क्यों है खास?

Surya Grahan 2026: साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को यानी आज लगेगा. यह वलयाकार सूर्य ग्रहण (एन्युलर सोलर एक्लिप्स) है, जिसे 'रिंग ऑफ फायर' के नाम से जाना जाता है. अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के अनुसार, सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी एक सीधी रेखा में आ जाते हैं, जिससे चंद्रमा सूर्य की रोशनी को पृथ्वी के कुछ हिस्सों में कुछ समय के लिए रोक देता है. यह घटना साल में दो बार आने वाले एक्लिप्स सीजन में होती है, क्योंकि चंद्रमा की कक्षा सूर्य-पृथ्वी की कक्षा से थोड़ी झुकी हुई होती है.

इस ग्रहण में चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता, क्योंकि वह पृथ्वी से अपेक्षाकृत दूर होता है. नतीजा यह होता है कि सूर्य का केंद्र भाग ढक जाता है, लेकिन चारों ओर एक चमकदार रिंग दिखाई देता है, जो आग के गोले जैसा लगता है. मंगलवार को रिंग ऑफ फायर का यह नजारा मुख्य रूप से अंटार्कटिका के दूरस्थ और बर्फीले क्षेत्रों में दिखेगा, एन्युलर फेज की अधिकतम अवधि लगभग 2 मिनट 20 सेकंड रहेगी. भारत में यह नहीं दिखाई देगा.

सूर्य ग्रहण एक-दो नहीं बल्कि कुल चार प्रकार के होते हैं, इनमें टोटल सोलर एक्लिप्स, एन्युलर सोलर एक्लिप्स, पार्शियल सोलर एक्लिप्स और हाइब्रिड सोलर एक्लिप्स.

1- टोटल सोलर एक्लिप्स :- इसमें चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है और अस्थाई तौर पर सूर्य किरणे पृथ्वी तक पहुंच पाती, जिससे दिन के समय में भी अंधकार हो जाता है और सूर्य का कोरोना (बाहरी वायुमंडल) दिखाई देता है. यह सबसे दुर्लभ और खूबसूरत नजारा होता है.

2- एन्युलर सोलर एक्लिप्स : इसमें चंद्रमा सूर्य से छोटा दिखता है, इसलिए रिंग बनती है. वलयाकार सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है और चंद्रमा सूर्य से छोटा दिखाई देता है, सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता. परिणामस्वरूप, सूर्य के चारों ओर चमकदार वलय (रिंग ऑफ फायर) बन जाता है, जो खूबसूरत लगता है.

3- पार्शियल सोलर एक्लिप्स : इसमें सूर्य का केवल एक हिस्सा ढकता है, जैसे कोई टुकड़ा काटा गया हो. पार्शियल सोलर एक्लिप्स के दौरान चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है, लेकिन तीनों पूरी तरह एक सीधी रेखा में नहीं होते. इससे सूर्य का केवल एक हिस्सा ढक जाता है, बाकी हिस्सा चमकता रहता है, जिससे सूर्य आधा-आधा या चांद के आकार जैसा दिखाई देता है.

Advertisement

4- हाइब्रिड सोलर एक्लिप्स : पृथ्वी की वक्रता के कारण इसमें कुछ जगहों पर टोटल और कुछ पर एन्युलर दिखता है. हाइब्रिड सोलर एक्लिप्स तब होता है जब चंद्रमा सूर्य को कुछ जगहों पर पूरी तरह ढक लेता है (टोटल एक्लिप्स) और कुछ जगहों पर केवल छल्ला बनाता है (एन्युलर एक्लिप्स). यह पृथ्वी की वक्रता और चंद्रमा की छाया की लंबाई के कारण होता है.

यह भी पढ़ें: ड्यूटी के बीच बस में पढ़ाई करती दिखी महिला कंडक्टर, लोगों को प्रेरित कर रहा Video, यूजर्स बोले- लगन हो तो ऐसी!

Advertisement

8 साल में 2.6 लाख रुपये से 85 लाख रु पहुंची सैलरी! 5 बार बदली जॉब, वायरल हो रही करियर ग्रोथ की कहानी

हर दीवाली कर्मचारियों को कार और फ्लैट बांटते हैं ये कारोबारी, जानिए कौन हैं सूरत के ‘डायमंड किंग'

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
Featured Video Of The Day
AI Impact Summit Delhi 2026: पीएम मोदी ने लोगों के हित के लिए टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर दिया जोर
Topics mentioned in this article