200-300 ग्राहक लौटे खाली हाथ... 31 दिसंबर की रात अंगूर बन गए ‘सोना’, जानिए क्या है 12 Grapes Ritual?

नए साल 2026 की रात 12 अंगूर खाने की स्पेनिश परंपरा ने भारत में मचाया हड़कंप. हरे अंगूरों की भारी किल्लत, 200–300 ग्राहक लौटे खाली हाथ.

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नए साल की रात 12 अंगूरों का ऐसा क्रेज

12 Grapes Ritual: नए साल की पूर्व संध्या पर इस बार भारत में एक अनोखा ट्रेंड देखने को मिला. स्पेन की मशहूर परंपरा 12 अंगूर खाने की रस्म ने ऐसा क्रेज पैदा किया कि ऑनलाइन डिलीवरी ऐप्स से लेकर लोकल मार्केट तक में हरे अंगूरों की भारी किल्लत हो गई. सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में एक दुकानदार ने दावा किया कि इस ट्रेंड की वजह से सैकड़ों ग्राहक बिना अंगूर खरीदे ही लौट गए.

क्या है 12 अंगूरों की रस्म?

स्पेन में इसे Las Doce Uvas de la Suerte कहा जाता है. मान्यता है कि नए साल की रात ठीक 12 बजे, 12 अंगूर खाने से आने वाले 12 महीनों के लिए सौभाग्य, सफलता और इच्छाओं की पूर्ति होती है. हाल के वर्षों में सोशल मीडिया के जरिए यह परंपरा भारत में भी तेजी से लोकप्रिय हुई है.

‘अंडर द टेबल अंगूर खाने से आती है किस्मत'

वायरल वीडियो में दुकानदार कुछ लड़कियों को बताते नजर आते हैं कि लोगों का मानना है कि 12 बजे के बाद टेबल के नीचे बैठकर 12 अंगूर खाने से गुड लक आती है. जब उनसे पूछा गया कि क्या अंगूर बचे हैं, तो उन्होंने साफ कहा, मेरे पास एक भी अंगूर नहीं बचे हैं. बाजार में मिलने की 10 फीसदी से भी कम संभावना है.

देखें Video:

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200-300 ग्राहक लौटे खाली हाथ

दुकानदार के मुताबिक, करीब 200 से 300 लोग ऐसे थे जिन्हें मैं अंगूर नहीं दे सका. कितनों ने खरीदे होंगे, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है. उन्होंने यह भी बताया कि इस रस्म के लिए सिर्फ हरे अंगूर ही जरूरी माने जा रहे थे, लाल या काले अंगूर लोग स्वीकार नहीं कर रहे थे.

सोशल मीडिया पर भी दिखा अंगूर संकट

वीडियो को अब तक 26 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है. कमेंट सेक्शन में लोग अपने अनुभव शेयर कर रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, मेरे पापा पूरे बाजार में घूमने के बाद कहीं जाकर अंगूर ढूंढ पाए. दूसरे ने कहा, हरे अंगूर नहीं मिले, काले से ही काम चलाना पड़ा. एक यूजर ने इसे बिजनेस आइडिया बताते हुए लिखा कि 12 अंगूर का पैकेट बनाकर ‘न्यू ईयर ग्रेप्स' नाम से बेचना चाहिए.

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1909 से जुड़ा है इस परंपरा का इतिहास

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, इस परंपरा की शुरुआत 1909 में स्पेन के मैड्रिड शहर में हुई थी, जब किसानों ने अपनी बंपर अंगूर की फसल नए साल का जश्न मना रहे लोगों को बेचनी शुरू की. समय के साथ यह परंपरा दुनिया के कई देशों में फैल गई.

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