लेह में बिका 25 हजार का एक अंडा...मुर्गा भी सवा लाख के पार, वजह जानकर आपकी आंखों में आ जाएंगे आंसू

बाजार में अंडे की कीमत तो महज 10 रुपये है, लेकिन लेह में लगी 25 हजार की बोली ने बता दिया कि, जब बात इंसानियत और जज्बे की हो, तो कीमत मायने नहीं रखती. ईरान के जंग प्रभावित मासूमों के आंसू पोंछने के लिए लद्दाखियों ने अपना दिल ऐसा खोला कि सवा लाख का मुर्गा और हजारिया अंडा आज पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया है.

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अंडे की कीमत 25 हजार और मुर्गा 1.25 लाख का...लेह-कारगिल में इंसानियत की अनोखी नीलामी

25000 Rupee Egg Leh: क्या आपने कभी सुना है कि एक अंडा 25,000 रुपये में बिक सकता है? चौंकिए मत, लेह की वादियों में इंसानियत और जज्बे की ऐसी मिसाल पेश की गई है कि दुनिया देखती रह गई. ईरान के जंग प्रभावित मासूमों की मदद के लिए यहां के लोगों ने अपनी तिजोरियां और दिल दोनों खोल दिए हैं. लद्दाख की कड़कड़ाती ठंड में लेह के लोगों ने अपनी दरियादिली से पूरी दुनिया में गर्मी पैदा कर दी है. ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग के बीच, वहां के बेगुनाह बच्चों और परिवारों की मदद के लिए लेह में एक खास नीलामी रखी गई. इस नीलामी का आलम यह था कि जिस अंडे की कीमत बाजार में महज 10 रुपये होती है, उसके लिए शब्बीर हुसैन नाम के शख्स ने खुशी-खुशी 25 हजार रुपये की बोली लगा दी.

एक मुर्गा सवा लाख रुपये में खरीदा गया (Iran War Victims Donation)

अंजुमन इमामिया और मजलिस-ए-उलेमा लेह की इस मुहिम में लोग सिर्फ सामान नहीं, बल्कि अपनी भावनाएं दान कर रहे हैं. शब्बीर हुसैन ने साफ कहा कि, यह पैसा उन्होंने किसी अमीरी की नुमाइश के लिए नहीं, बल्कि ईरान में जुल्म सह रहे बच्चों के दर्द को कम करने के लिए दिया है. लेह के बाजार में जब इस अंडे की नीलामी हुई, तो हर कोई दंग रह गया. यह सिर्फ एक अंडा नहीं था, बल्कि एक कौम का अपने रहबर (नेता) के प्रति यकीन और मजलूमों के लिए प्यार था. इससे पहले कारगिल के त्रेसापोन इलाके में भी कुछ ऐसा ही मंजर दिखा था, जहां दान में मिले एक मुर्गे को सवा लाख रुपये में खरीदा गया. वहां भी एक अंडा 6 हजार रुपये में बिका था.

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कारगिल से लेह तक दान का सैलाब (Donations from Kargil to Leh)

रविवार को हुई इस नीलामी में सिर्फ अंडे या मुर्गे ही नहीं, बल्कि लोगों ने अपने गहने, कीमती कपड़े और फर्नीचर तक दान कर दिए. आयोजकों का कहना है कि यह सिलसिला अभी रुकने वाला नहीं है. आने वाले शुक्रवार और रविवार को फिर से ऐसी ही नीलामियां होंगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा इमदाद (मदद) जुटाई जा सके. ईरान में युद्ध की वजह से हालात बेहद नाजुक हैं और लेह-लद्दाख के ये छोटे-छोटे गांव साबित कर रहे हैं कि मदद करने के लिए जेब से ज्यादा दिल बड़ा होना चाहिए.

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