अंटार्कटिका के जमा देने वाले पानी में पहली बार दिखा जिंदा शार्क, इस खोज ने वैज्ञानिकों को भी किया हैरान

अंटार्कटिका के बेहद ठंडे पानी में पहली बार शार्क का वीडियो रिकॉर्ड किया गया है. वैज्ञानिकों की यह खोज समुद्र की गहराइयों में जीवन की नई संभावनाओं और रहस्यों को उजागर करती है.

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अंटार्कटिका में शार्क का पहला वीडियो आया सामने

Shark in Antarctica: वैज्ञानिकों ने एक दुर्लभ और चौंकाने वाली खोज में अंटार्कटिका के बर्फ जैसे ठंडे पानी में तैरते हुए शार्क का पहला वीडियो रिकॉर्ड किया है. अब तक माना जाता था कि इतनी ठंड में शार्क जीवित नहीं रह सकते, लेकिन इस नई खोज ने इस धारणा को चुनौती दे दी है.

कहां और कैसे मिला शार्क?

यह फुटेज पिछले महीने मिंडेरू-यूडब्ल्यूए डीप-सी रिसर्च सेंटर (Minderoo-UWA Deep-Sea Research Centre) द्वारा रिकॉर्ड किया गया. यह केंद्र दुनिया के सबसे गहरे समुद्री हिस्सों में जीवन का अध्ययन करता है. कैमरा अंटार्कटिक प्रायद्वीप के पास दक्षिण शेटलैंड द्वीप समूह (South Shetland Islands) के आसपास समुद्र में लगाया गया था. लगभग 490 मीटर की गहराई पर रिकॉर्ड किए गए वीडियो में 3 से 4 मीटर लंबा शार्क दिखाई दिया. द एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, उस गहराई पर पानी का तापमान केवल 1.27 डिग्री सेल्सियस था, जो जमाव बिंदु के बेहद करीब है.

वैज्ञानिक क्यों हुए हैरान?

शोध केंद्र के निदेशक एलन जैमीसन ने बताया, कि टीम को वहां शार्क मिलने की उम्मीद नहीं थी, क्योंकि आमतौर पर माना जाता है कि अंटार्कटिका में शार्क नहीं पाए जाते. उन्होंने कहा, 'यह कोई छोटा शार्क नहीं था, बल्कि काफी बड़ा और शक्तिशाली दिख रहा था. अब तक इस क्षेत्र में शार्क मिलने का कोई रिकॉर्ड नहीं था. वीडियो में शार्क के साथ समुद्र की तलहटी पर एक स्केट (शार्क की ही एक प्रजाति जैसा जीव) भी दिखाई देता है.

देखें Video:

क्या पहले से मौजूद थे ऐसे शार्क?

चार्ल्स डार्विन यूनिवर्सिटी के समुद्री जीवविज्ञानी पीटर काइन ने इस खोज को काफी महत्वपूर्ण बताया. उनका मानना है कि संभव है स्लीपर शार्क जैसी प्रजातियां वर्षों से इस क्षेत्र में मौजूद हों, लेकिन अब तक उनका पता नहीं चल पाया था. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ये शार्क लगभग 500 मीटर की गहराई पर रहते हैं, क्योंकि वहां पानी अपेक्षाकृत थोड़ा गर्म होता है. साथ ही, वे गहराई में मृत व्हेल, विशाल स्क्विड और अन्य समुद्री जीवों के अवशेषों पर निर्भर हो सकते हैं.

समुद्री शोध के लिए क्यों अहम है यह खोज?

यह खोज अंटार्कटिका के समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को समझने में एक बड़ा कदम मानी जा रही है. इससे यह संकेत मिलता है कि पृथ्वी के सबसे कठोर वातावरण में भी जीवन अपनी जगह बना सकता है. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि भविष्य में ऐसी और खोजें अंटार्कटिका की गहराइयों में छिपे रहस्यों को उजागर करेंगी.

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(Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.)

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