Conjoined Twins: सोशल मीडिया के दौर में अब यह पहचानना मुश्किल होता जा रहा है कि क्या असली है और क्या नकली. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने इस भ्रम को और गहरा कर दिया है. ऐसी ही एक वायरल कहानी है इंस्टाग्राम पर छाई Valeria और Camila नाम की जुड़ी हुई जुड़वां बहनों की, जिनके लाखों फॉलोअर्स हैं. लेकिन बड़ा सवाल यह है- क्या ये जुड़वां बहनें वाकई असली हैं या सिर्फ AI की बनाई हुई कहानी?
सोशल मीडिया पर वायरल ‘दो सिर, एक वाइब'
Valeria और Camila का इंस्टाग्राम अकाउंट खुद को डिजिटल क्रिएटर्स बताता है. उनकी बायो में लिखा है- दो दिमाग. एक ही एहसास. वे फैशन, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़े शानदार फोटो और वीडियो पोस्ट करती हैं. उनके हर पोस्ट पर लाखों व्यूज़ और तारीफों की बाढ़ आ जाती है. लोग उनकी 'खूबसूरती' और 'कॉन्फिडेंस' की जमकर सराहना करते हैं. हालांकि, इस लोकप्रियता के बावजूद, सच्चाई कुछ और ही निकली.
असलियत क्या है?
VICE की रिपोर्ट के मुताबिक, Valeria और Camila कोई असली जुड़वां बहनें नहीं हैं, बल्कि ये पूरी तरह से AI-जनरेटेड डिजिटल अवतार हैं. इनके अकाउंट पर दिखाई गई बचपन की तस्वीरें, मेडिकल हिस्ट्री और सर्जरी की कहानियां तक फर्जी हैं. एक पोस्ट में दावा किया गया था कि, हमारी रीढ़ की हड्डियां आपस में खतरनाक तरीके से जुड़ी थीं, इसलिए हमें कई सर्जरी से गुजरना पड़ा, और यही वजह है इन खूबसूरत निशानों की. विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कहानी सिर्फ भावनात्मक जुड़ाव और एंगेजमेंट बढ़ाने के लिए गढ़ी गई है.
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एक्सपर्ट्स ने कैसे पकड़ी AI की चाल?
news.com.au की रिपोर्ट में बताया गया कि तस्वीरों में कई AI जनरेशन के संकेत पाए गए. विशेषज्ञों ने शरीर की बनावट, स्किन टेक्सचर और लाइटिंग में गड़बड़ियां नोट कीं. एक तस्वीर में दिखाया गया निशान एनाटॉमिकली असंभव पाया गया. रिपोर्ट के अनुसार, दो सिर और एक शरीर की संरचना में गर्दन के पास स्किन और बालों का असामान्य मर्ज होना साफ AI की ओर इशारा करता है. AI के AI असिस्टेंट Grok ने भी साफ कहा, कि यह अकाउंट असली नहीं है और तस्वीरें रियल बायोलॉजी को डिफाई करती हैं.
चिंता क्यों बढ़ा रहा है यह मामला?
हालांकि कई AI क्रिएटर्स साफ तौर पर खुद को फर्जी बताते हैं, लेकिन Valeria और Camila के अकाउंट ने खुद को AI मानने से इनकार किया. कई यूज़र्स ने कमेंट्स में सवाल उठाए- क्या आप सच में असली हैं? मुझे समझ नहीं आ रहा कि यह AI है या इंसान. इसके बावजूद लाखों लोग इसे सच मान बैठे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे हकीकत और खूबसूरती की परिभाषा दोनों पर गलत असर पड़ सकता है.
(Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया पर यूजर द्वारा की गई पोस्ट से तैयार की गई है. एनडीटीवी इस कंटेंट की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.)
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