US से आए NRI के साथ भारत में ऐसा क्या हुआ? फिर भाग रहा विदेश, पोस्ट पर मचा बवाल

US से लौटे NRI ने बेंगलुरु की जिंदगी को “अमानवीय” और “रहने लायक नहीं” बताते हुए फिर से विदेश जाने का फैसला किया. उनकी वायरल पोस्ट ने भारत के मेट्रो शहरों पर बहस तेज़ कर दी है.

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बेंगलुरु ने तोड़ दिया हौसला, NRI फिर भाग रहा विदेश

एक भारतीय मूल के सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल, जो 10 साल अमेरिका में रहने के बाद बेहतर जीवन और जल्दी रिटायरमेंट की उम्मीद लेकर बेंगलुरु लौटे थे, अब फिर से भारत छोड़ने की तैयारी में हैं. उनका दावा है कि भारत के बड़े शहर “रहने लायक नहीं” और “मान-सम्मान छीन लेने वाले” हो चुके हैं. उनकी ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रही है.

अब और नहीं सह सकता

40 वर्षीय इस टेक प्रोफेशनल ने एक वायरल पोस्ट में लिखा कि उन्होंने US के Bay Area और Seattle में 10 साल काम किया, 2 मिलियन डॉलर की नेट वर्थ बनाई और बेंगलुरु में अपना घर भी खरीदा. वे मानकर चल रहे थे कि आर्थिक सुरक्षा उन्हें भारत के रोजमर्रा के संघर्षों से बचा लेगी. लेकिन चार साल बाद उनका कहना है- “मैं पूरी तरह टूट चुका हूं. इस शहर की अव्यवस्था ने मुझे बुरी तरह थका दिया है.”

“भारतीय मेट्रो शहर जलते हुए कूड़े के ढेर जैसे”

NRI ने अपनी पोस्ट में बड़े आरोप लगाए- पहला ये कि “भारत एक अराजक, अव्यवस्थित देश है.” दूसरा-     “बेंगलुरु जैसा शहर इज़्ज़त और मानसिक शांति छीन लेता है.” और तीसरा ये कि “मेट्रो शहर जलते हुए कूड़े का ढेर लगते हैं.” उन्होंने लिखा कि भारत लौटकर वे उम्मीद कर रहे थे कि परिवार को बेहतर जीवन देंगे, लेकिन अब उन्हें लगता है कि “भारत के बड़े शहर सिर्फ तनाव और निराशा देते हैं.”

Dear NRIs, think hard before deciding to return to an Indian metro. I did, couldn't tolerate the third-world life, and now leaving India again.
byu/Specialist_File9744 innri
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NRI की शिकायतों की लंबी लिस्ट

पोस्ट में उन्होंने भारतीय मेट्रो शहरों के बारे में कई मुद्दे उठाए-
    •    हवा और शोर प्रदूषण
    •    बदहाल ट्रैफिक
    •    असुरक्षित और टूटी सड़कें
    •    मिलावटी खाना
    •    पानी की खराब गुणवत्ता
    •    खराब सिविक सेंस
    •    पैदल चलने योग्य फुटपाथों की कमी
    •    महिलाओं की सुरक्षा चिंता
    •    बच्चों पर पढ़ाई का अत्यधिक दबाव

उन्होंने कहा, “यहां हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं- ऐसे कि इंसानियत ही खत्म हो जाए.”

अब तैयारी जर्मनी जाने की

पोस्ट में उन्होंने बताया कि उन्हें जर्मनी (म्यूनिख) में 80,000 यूरो सालाना वाली जॉब मिल चुकी है और वे 2026 के मध्य में भारत छोड़कर जर्मनी शिफ्ट होंगे. उन्होंने लिखा- “मुझे बस साफ हवा-पानी, बिना मिलावट का खाना, गड्ढों से मुक्त सड़कें, पैदल चलने की जगह, कानून मानने वाली ड्राइविंग और शांत मोहल्ले चाहिए. अगर जर्मनी ये सब देता है, तो मैं खुशी-खुशी 50% टैक्स देने को तैयार हूं.”

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अपने पोस्ट में उन्होंने साफ कहा- “NRIs को देश बनाने की भावना में वापस आने के लिए मत उकसाइए. बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली, नोएडा जैसे शहर रहने लायक नहीं हैं. आप इससे बेहतर डिज़र्व करते हैं.” उनका यह बयान सोशल मीडिया पर बहस छेड़ चुका है, कुछ लोग उनकी बातों से सहमत हैं, तो कुछ उन्हें बहुत ज्यादा नेगेटिव बता रहे हैं.

NRI की यह पोस्ट भारत के बड़े शहरों की सुविधाओं, जीवन की गुणवत्ता और अव्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है. यह बहस भी तेज़ हो गई है कि क्या भारतीय मेट्रो शहर वास्तव में इतने असहनीय हो चुके हैं, या फिर यह सिर्फ एक शख्स के अनुभव का मुश्किल रूप है.

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