सूरत के मशहूर हीरा कारोबारी सावजी ढोलकिया अपनी व्यावसायिक सफलता के साथ-साथ कर्मचारियों के प्रति अपनी दरियादिली के लिए भी जाने जाते हैं. हर कुछ वर्षों में उनकी ऐसी खबरें सामने आती हैं, जिनमें वे कर्मचारियों को कार, फ्लैट और कीमती उपहार देते नजर आते हैं. उनकी कहानी मेहनत, संघर्ष और सफलता की मिसाल है.
12 रुपये से शुरू हुआ सफर
सावजी ढोलकिया का जन्म गुजरात के अमरेली जिले के धुधाला गांव में हुआ था. महज 12 साल की उम्र में वे केवल 12 रुपये लेकर सूरत पहुंचे. यहां उन्होंने हीरा उद्योग में काम शुरू किया और धीरे-धीरे अनुभव हासिल किया. बाद में अपने चाचा की आर्थिक मदद से उन्होंने खुद का व्यवसाय शुरू किया. लगातार मेहनत, अनुशासन और दूरदृष्टि के दम पर उन्होंने हरि कृष्णा एक्सपोर्टर्स को देश की प्रमुख हीरा निर्यात कंपनियों में शामिल कर दिया. आज कंपनी का सालाना टर्नओवर 15,000 करोड़ रुपये से अधिक बताया जाता है.
कर्मचारियों के लिए अनोखी सोच
सावजी ढोलकिया को 'डायमंड किंग ऑफ इंडिया' कहा जाता है, लेकिन उनकी असली पहचान कर्मचारियों के प्रति उनके व्यवहार से बनती है. दीवाली के मौके पर वे लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों को कार, घर और अन्य महंगे उपहार देते रहे हैं. उनका मानना है कि जब कर्मचारी खुद को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करते हैं, तो वे बेहतर प्रदर्शन करते हैं. इसके लिए वे अपने मुनाफे का हिस्सा कम करके भी कर्मचारियों के साथ सफलता साझा करने में विश्वास रखते हैं.
समाज सेवा में भी आगे
व्यवसाय के अलावा सावजी ढोलकिया सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय हैं. उन्होंने सूखा प्रभावित क्षेत्रों में जल संरक्षण परियोजनाओं का समर्थन किया है और ग्रामीण विकास के लिए भी योगदान दिया है. नए साल के मौके पर उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि सफलता शोर से नहीं, बल्कि निरंतरता, सही इरादे और मूल्यों से मिलती है. उन्होंने सभी के अच्छे स्वास्थ्य, स्पष्ट सोच और मजबूत भविष्य की कामना की.
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