चाय-कॉफी के दाम में किलो भर गोश्त! आखिर इस देश में इतना सस्ता क्यों है मीट?

कल्पना कीजिए एक ऐसे मुल्क की जहां सुबह की चाय का प्याला आपके बटुए पर भारी पड़ जाए, पर ताजा गोश्त कौड़ियों के भाव मिल जाए. इस बर्फीले रेगिस्तान का दस्तूर ही कुछ ऐसा है कि यहां अनाज से ज्यादा आसान 'मौत' को मात देने वाला 'रेड फूड' हासिल करना है.

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सब्जियों के लिए तरसते हैं लोग, पर मीट मिलता है कौड़ियों के भाव, जानिए इस देश का राज
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Why meat cheap in Mongolia: क्या आप यकीन करेंगे कि दुनिया में एक ऐसा मुल्क भी है जहां एक कप गर्मागर्म कॉफी की कीमत, एक किलो ताजे मीट से कहीं ज्यादा है? सुनकर हैरानी होना लाजिमी है, लेकिन इस देश की हकीकत आपको हैरान कर देगी. आखिर क्या है इस रहस्यमयी डाइट का राज?

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दुनिया के नक्शे पर एक ऐसा देश मौजूद है जहां की रवायतें और दस्तूर बाकी दुनिया से बिल्कुल जुदा हैं. हम बात कर रहे हैं मंगोलिया की, जिसे 'नीले आसमान की जमीन' कहा जाता है. यहां का सबसे बड़ा अजूबा ये है कि यहां मीट के दाम इतने कम हैं कि कई बार एक आम चाय या कॉफी पीना आपको महंगा पड़ सकता है, लेकिन इस हैरानी के पीछे छिपे हैं कुछ बेहद दिलचस्प और कुदरती कारण.

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इसानों से कई गुना ज्यादा जानवरों का राज (More Livestock Than Humans in Mongolia)

मंगोलिया की कुल आबादी महज 35 लाख के करीब है, लेकिन यहां जानवरों की तादाद किसी को भी हैरत में डाल सकती है. यहां 7 करोड़ से भी ज्यादा भेड़, बकरियां, गाय और घोड़े घास के मैदानों में आजाद घूमते हैं. जब आबादी कम हो और कुदरती दौलत यानी पशुधन बेहिसाब हो, तो जाहिर है वहां की कीमतों में गिरावट आ ही जाती है. यहां हर शख्स के हिस्से में करीब 20 जानवर आते हैं, जो इसे दुनिया का सबसे अनोखा देश बनाते हैं.

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हाड़ कंपा देने वाली ठंड और 'रेड फूड' का तिलिस्म (The Nomadic Lifestyle and Red Food Diet)

यहां के लोग आज भी नॉमैडिक जिंदगी जीते हैं. कड़कड़ाती ठंड में खुद को जिंदा और गर्म रखने के लिए इन्हें भारी मात्रा में कैलोरी की जरूरत होती है. यही वजह है कि इनकी थाली में रोटी या सब्जी से ज्यादा 'लाल खाना' यानी मीट और 'सफेद खाना' यानी दूध के उत्पाद नजर आते हैं. खेती करना यहां के मौसम में किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है, इसलिए कुदरत ने इन्हें पशुपालन का तोहफा दिया है, जिससे यहां मीट ही मुख्य आहार बन गया है.

(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)

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