केरल: कई दिन तक लोगों की नींद उड़ाने के बाद आखिरकार पिंजरे में कैद हुआ बाघ

बाघ को पकड़ने के लिए सभी संभावित उपाय तलाश रहे वन्यजीव अधिकारियों ने इसकी आवाजाही की निगरानी के बाद एक तय जगह पर पिंजरा रखा. वन्यजीव पशुचिकित्सक अरुण जकारिया की टीम बाघ को पकड़ने के लिए इलाके में डेरा डाले हुए थी. जकारिया ने कहा कि बाघ और उसके आने-जाने के रास्तों का पता लगाना बहुत कठिन था.

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केरल के वायनाड में पिछले एक महीने से स्थानीय निवासियों की रातों की नींद उड़ाने वाला एक बाघ आखिरकार शुक्रवार तड़के वन अधिकारियों द्वारा रखे गए पिंजरे में कैद हो गया. एक महीने पहले वन क्षेत्र में बाघ के होने का पता चला था। तब से यह कम से कम 13 घरेलू जानवरों पर हमला कर चुका था.

स्थानीय लोगों ने बाघ को पकड़ने में लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद 10 वर्षीय नर बाघ को वन जांच चौकी के पास रखे पिंजरे में कैद कर लिया गया.

बाघ को पकड़ने के लिए सभी संभावित उपाय तलाश रहे वन्यजीव अधिकारियों ने इसकी आवाजाही की निगरानी के बाद एक तय जगह पर पिंजरा रखा. वन्यजीव पशुचिकित्सक अरुण जकारिया की टीम बाघ को पकड़ने के लिए इलाके में डेरा डाले हुए थी. जकारिया ने कहा कि बाघ और उसके आने-जाने के रास्तों का पता लगाना बहुत कठिन था क्योंकि यह केवल रात के दौरान ही निकलता था. वन अधिकारियों ने कहा कि बाघ स्वस्थ दिखता है. हालांकि उसके एक दांत को कुछ नुकसान हुआ है.

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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