Indian woman success story: ज़िंदगी कभी-कभी ऐसे इम्तिहान लेती है, जहां इंसान के पास टूटने के अलावा कोई रास्ता नहीं दिखता. लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जो यह साबित कर देती हैं कि हालात चाहे जैसे भी हों, हिम्मत और आत्मसम्मान इंसान को दोबारा खड़ा कर सकते हैं. ऐसी ही एक कहानी है हिमी शर्मा की, जिनका सफ़र 5,000 रुपये की नौकरी से शुरू होकर कनाडा में 3 करोड़ रुपये के घर तक पहुंचा.
प्यार से संघर्ष तक: जब पति ने प्रॉपर्टी को चुना
ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे से बातचीत में हिमी शर्मा ने बताया कि साल 2005 में MBA के दौरान उनकी मुलाकात अपने पति से हुई. जाति के कारण परिवारों के विरोध के बावजूद दोनों ने शादी की. शादी के शुरुआती तीन साल अच्छे रहे, लेकिन नवंबर 2010 में उनकी ज़िंदगी अचानक बदल गई. हिमी के अनुसार, मेरे पति को मेरी और हमारे दो साल के बेटे के बजाय 3 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी चुननी थी… उन्होंने प्रॉपर्टी चुनी. उस वक्त हिमी एक टीचर थीं और उनकी सैलरी सिर्फ़ 5,000 हजार रुपये प्रति माह थी.
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अकेली मां की जंग
पति के जाने के बाद हिमी अपने बेटे के साथ पीजी में रहने लगीं, जहां किराया ही उनकी सैलरी से ज़्यादा था. कर्ज़ बढ़ता गया और ज़िंदगी सिर्फ़ 'आज कैसे गुज़रे' तक सिमट गई. बाद में उन्हें 30,000 रुपये की नौकरी मिली और वह माता-पिता के घर लौटीं, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली. उनके पिता ने उनसे 10,000 हजार रुपये महीने का किराया मांगा. हिमी कहती हैं- मुझे बोझ समझा जाने लगा. सबसे दर्दनाक पल तब आया, जब बेटे की स्कूल फ़ीस न भर पाने के कारण उन्हें अपने गहने गिरवी रखने पड़े. उनका बेटा जब पूछता है- क्या मैं स्कूल जा पाऊंगा? तो वह पल आज भी हिमी को तोड़ देता है.
नई शुरुआत: भारत से कनाडा तक का सफ़र
करीब 10 साल पहले हिमी ने ज़िंदगी को फिर से बनाने का फैसला किया. 2 लाख रुपये से भी कम सेविंग के साथ उन्होंने कनाडा का वीज़ा अप्लाई किया. 2019 में वह कनाडा पहुंचीं और महज़ एक महीने में कॉलेज प्रोफेसर की नौकरी हासिल कर ली. बिना किसी सपोर्ट सिस्टम के उन्होंने धीरे-धीरे अपनी ज़िंदगी दोबारा खड़ी की. आज वही महिला, जिसे कभी छोड़ दिया गया था, 3 करोड़ रुपये के घर की मालकिन है.
मैंने खुद को बचाया...
हिमी कहती हैं- मुझसे कहा गया था कि बेटा बड़ा होकर तुम्हें संभालेगा. लेकिन मैंने इंतज़ार नहीं किया. मैंने खुद हमें बचाया. आज उनका बेटा ऐसे माहौल में बड़ा हो रहा है, जहां न ताने हैं. हिमी शर्मा की कहानी सिर्फ़ एक महिला की नहीं, बल्कि हर उस इंसान की है, जिसे कभी बोझ समझा गया. यह कहानी बताती है कि खुद पर भरोसा हो, तो टूटे रिश्ते भी नई मंज़िलों की नींव बन सकते हैं.
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